कार्यक्रम अध्यक्ष कुुदन उपाध्याय जी के भागीरथी प्रयास से गोपाल राम
गहमरी साहित्य समारोह -17 दिनांक 20 से 23 जनू 2014 का प्रथम चरण हमारा मुक्तक
पूर्ण हुआ। हम समस्त गहमरक्षेत्र वासीयों की तरफ से समस्त रचनाकारों एवं
अध्यक्ष,महोदय का आभार प्रकट करते है तथा आप सबके स्वस्थ जीवन एवं
उज्ज्वल भविष्य के लिये प्रार्थना करतें है।
रचनाकारों के नाम क्रमस: ओम प्रकाश नाटीयवाल जी, कवि सतीश मधुप जी, कुदन उपाध्याय जी, कांति शुक्ला, रजनीश तपन जी ,कल्ैाश चंन्द्र जी, अखंड गहमरी जी,सतीश वर्मा जी, लव कुमार प्रणय जी,महेश जैन ज्योति जी, अभीषेक जैन जी,डाक्टर मुकेश कुमार जी, नारायण गौरव जी, सुरेश मिश्रा जी,करन एस पी जी, उदय देवल जी आप सबका हार्दिक आभार एंव आगे भी आपके सहयोग की आशा रहेगी ।
प्रथम विजेता
ओम प्रकाश नौटियाल जी
दिद्वतीय --- कवि सतीश मधुप जी
प्रतिक्रिया ''''सतीश वर्मा जी
आप सब विजेताओं को हार्दिक बधाई
*हमारा मुक्तक *
अध्यक्षः सम्मान्य श्री कुन्दन उपाध्याय जी
शीर्षकः कमल//पंकज/नीरज /कंज
-
जन्मे स्वर्ण पलने में, ना दीन हीन प्यारा हैं ,
प्रकृति ने घमंड पर उनके एक तंज मारा है ,
जिस कीच को करता ना कोई देखना गवारा
वही पर पल्लवित होता सुंदर कंज न्यारा है !
-
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह 17
शीर्षक:-कमल /पंकज/जलज /वारिज आदि
अध्यक्ष:-आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी को समर्पित
हमारा मुक्तक
वायु तत्व विसराओगे तो,सांस न वापस आनी है ।
अग्नि तत्व विसराओगे तो,आभा ही खो जानी है।
धरा गगन विसराओगे तो,आप अधर में लटकोगे,
जीवन जलज सूख जाएगा,अगर न जड़ में पानी है।
सतीश 'मधुप'
घिरोर (मैनपुरी)
श्री गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह~
शुक्रवार 20जून प्रात: 10 बजे से 22 जून प्रात:10 बजे तक~ हमारा मुक्तक ।
शीर्षक~ कमल , पंकज ,नीर ,शतलज आदि पर्यायवाची ।
परम आदरणीय श्री ओम नीरव जी एवं श्री अंखड गहमरी जी तथा गुणीजनों को सादर समर्पित~
(अतिथि रचना )
जो कमल सरीखा हो जग में, वो जीवन आदर्शित होता है।
खिलता है कमल का फूल जहाँ, किचड में सुशोभित होता है।
किचड में जमाता धाक सदा,किचड को स्वर्ग बनाता है।
रुप रंग आभा मण्डल से जन मन आकर्षित होता है॥
श्री गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह
२० जून प़ात: १० बजे से २२ जून प़ात:१०बजे तक-हमारा मुक्तक
शीर्षक-कमल /नीरज/पंकज/कंज/समानार्थी
अध्यक्ष- श्री कुन्दन उपाध्याय जी को सादर समर्पित
रचनाकारों के नाम क्रमस: ओम प्रकाश नाटीयवाल जी, कवि सतीश मधुप जी, कुदन उपाध्याय जी, कांति शुक्ला, रजनीश तपन जी ,कल्ैाश चंन्द्र जी, अखंड गहमरी जी,सतीश वर्मा जी, लव कुमार प्रणय जी,महेश जैन ज्योति जी, अभीषेक जैन जी,डाक्टर मुकेश कुमार जी, नारायण गौरव जी, सुरेश मिश्रा जी,करन एस पी जी, उदय देवल जी आप सबका हार्दिक आभार एंव आगे भी आपके सहयोग की आशा रहेगी ।
प्रथम विजेता
ओम प्रकाश नौटियाल जी
दिद्वतीय --- कवि सतीश मधुप जी
प्रतिक्रिया ''''सतीश वर्मा जी
आप सब विजेताओं को हार्दिक बधाई
Om Prakash Nautiyal
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -17*हमारा मुक्तक *
अध्यक्षः सम्मान्य श्री कुन्दन उपाध्याय जी
शीर्षकः कमल//पंकज/नीरज /कंज
-
जन्मे स्वर्ण पलने में, ना दीन हीन प्यारा हैं ,
प्रकृति ने घमंड पर उनके एक तंज मारा है ,
जिस कीच को करता ना कोई देखना गवारा
वही पर पल्लवित होता सुंदर कंज न्यारा है !
-
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह 17
शीर्षक:-कमल /पंकज/जलज /वारिज आदि
अध्यक्ष:-आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी को समर्पित
हमारा मुक्तक
वायु तत्व विसराओगे तो,सांस न वापस आनी है ।
अग्नि तत्व विसराओगे तो,आभा ही खो जानी है।
धरा गगन विसराओगे तो,आप अधर में लटकोगे,
जीवन जलज सूख जाएगा,अगर न जड़ में पानी है।
सतीश 'मधुप'
घिरोर (मैनपुरी)
श्री गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह~
शुक्रवार 20जून प्रात: 10 बजे से 22 जून प्रात:10 बजे तक~ हमारा मुक्तक ।
शीर्षक~ कमल , पंकज ,नीर ,शतलज आदि पर्यायवाची ।
परम आदरणीय श्री ओम नीरव जी एवं श्री अंखड गहमरी जी तथा गुणीजनों को सादर समर्पित~
(अतिथि रचना )
जो कमल सरीखा हो जग में, वो जीवन आदर्शित होता है।
खिलता है कमल का फूल जहाँ, किचड में सुशोभित होता है।
किचड में जमाता धाक सदा,किचड को स्वर्ग बनाता है।
रुप रंग आभा मण्डल से जन मन आकर्षित होता है॥
श्री गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह
२० जून प़ात: १० बजे से २२ जून प़ात:१०बजे तक-हमारा मुक्तक
शीर्षक-कमल /नीरज/पंकज/कंज/समानार्थी
अध्यक्ष- श्री कुन्दन उपाध्याय जी को सादर समर्पित
व्योम को प्यास की ही विकलता सदा ।
दर्द के तार छू मन मचलता सदा ।
कंज खिलता हृदय का प़णय-रश्मि पा -
ओस-कण बन के सपना भी पलता सदा ।
कान्ति शुक्ला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह
< हमारा मुक्तक>
कार्य क्रम अध्यक्ष आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी
शीर्षक~पंकज,नीरज,कमल आदि।***
दर्द के तार छू मन मचलता सदा ।
कंज खिलता हृदय का प़णय-रश्मि पा -
ओस-कण बन के सपना भी पलता सदा ।
कान्ति शुक्ला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह
< हमारा मुक्तक>
कार्य क्रम अध्यक्ष आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी
शीर्षक~पंकज,नीरज,कमल आदि।***
दिखते हो सुंदर,कमल कह दिया।
सूरत दिखी तो,ग़जल कह दिया।
बरसो न बरसो, मर्जी तुम्हारी ।
शायर ने तुमको,सजल कह दिया।
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-17
*हमारा मुक्तक*
समारोह अध्यक्ष -आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी के समक्ष प्रस्तुत
शीर्षक- कमल/पंकज/समानार्थी
मात्रा भार 1222 1222 1222 1222
**********
किसी ने भाव को समझा, किसी ने राग को देखा
किसी ने रौशनी देखी, किसी ने आग को देखा
नजर का भेद है कोई कमल देखे है कीचड़ में
किसी ने चाँद को देखा किसी ने दाग को देखा ******
कैलाश भारद्वाज
फरीदाबाद (हरि.)
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह 17
शीर्षक:-कमल /पंकज/जलज /वारिज आदि
अध्यक्ष:-आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी को समर्पित
हमारा मुक्तक
बातें नेता की अब करना छोड़ाे यारो
उनके वादो से अब तुम मुँह मोड़ो यारो
जल में कमल तो बागो में गुलाब खिला है
केवल पूजा हेतु इन्हें तुम तोड़ो यारो
शुक्रवार प्रात: 20 जुन प्रात: 10 बजे से 22 जुन प्रात: 10 बजे तक हमारा मुक्तक |
विषय----कमल,नीरज,पंकज,जलज, शतदल,वारिज,कंज आदि पर्यायवाची।
कार्यक्रम अध्य क्ष आदरणीय कुंदन उपाध्यावय जी को सादर समर्पित |
( साथ ह़ी अन्य प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ , प्रतिक्रिया आमंत्रण के संग )
विषय ( शीर्षक ) : कमल / पंकज |
तुम कहाँ जन्में और रहते हो कहाँ, इसका तनिक भी अर्थ नहीं |
कीचड़ में जन्में , पंकज सरीख खिले, इस दुनिया में समर्थ वही |
जल की बूंदों से लिप्त रहे, पर आसक्ति से ये सदा निर्लिप्त रहे |
कमल से सीखो जीने की कला ताकि जीवन जाये कभी व्यर्थ नहीं |
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -17
*हमारा मुक्तक *
अध्यक्षः सम्मान्य श्री कुन्दन उपाध्याय जी
शीर्षकः कमल//पंकज/नीरज ...
(अतिथि रचना )
नाम बदल कर मेरा मुझसे कहता है अब काम नहीं
भेदभाव की भाषा पढ़ता मन में उसके राम नहीं
जीवन की सच्चाई है यह कीचड़ में ही कमल खिले
प्रेम लुटाओ प्रेम मिलेगा इसका कोई दाम नहीं
लव कुमार 'प्रणय '
श्री गोपालराम गहमरी साहित्य
समारोह -17 ।
(20 से 22 जून )
अध्यक्षः सम्मान्य श्री कुन्दन उपाध्याय जी ।
शीर्षकः कमल/जलज/पंकज/आदि ।
-------------
*अतिथि रचना *
------------
खिल गया लो कमल भारती के अँगन ,
गंध से आज गमका हुआ है गगन ,
सूर्य की रश्मियों में नया ओज है ,
हैं सभी देशवासी हृदय में मगन ।
***
महेश जैन 'ज्योति' ,
मथुरा ।
गोपल गहमर साहित्य-17
विषय-कमल पंकज
आद.कुदन जी से इजाजत
कीचड मे खिलके भी दिलो,पे राज होता है,
फूलो के राजा के सर पे,काटो का ताज होता,है
देके ही होती है मोहब्बत,की शुरूवात
प्यार का इसी से
आगज होता है
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-17
"हमारा मुक्तक" / विषय- कमल व पर्याय
आदरणीय श्री कुंदन उपाध्याय जी को सादर समर्पित !
प्रेम सही माईने में परिभाषित हो.
प्रमाणिकता हृदय से सत्यापित हो.
एक भ्रमर जो रात्रि भर बेचैन रहा,
व्याकुलता ये पुष्प कमल को ज्ञापित हो.
सूरत दिखी तो,ग़जल कह दिया।
बरसो न बरसो, मर्जी तुम्हारी ।
शायर ने तुमको,सजल कह दिया।
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-17
*हमारा मुक्तक*
समारोह अध्यक्ष -आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी के समक्ष प्रस्तुत
शीर्षक- कमल/पंकज/समानार्थी
मात्रा भार 1222 1222 1222 1222
**********
किसी ने भाव को समझा, किसी ने राग को देखा
किसी ने रौशनी देखी, किसी ने आग को देखा
नजर का भेद है कोई कमल देखे है कीचड़ में
किसी ने चाँद को देखा किसी ने दाग को देखा ******
कैलाश भारद्वाज
फरीदाबाद (हरि.)
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह 17
शीर्षक:-कमल /पंकज/जलज /वारिज आदि
अध्यक्ष:-आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी को समर्पित
हमारा मुक्तक
बातें नेता की अब करना छोड़ाे यारो
उनके वादो से अब तुम मुँह मोड़ो यारो
जल में कमल तो बागो में गुलाब खिला है
केवल पूजा हेतु इन्हें तुम तोड़ो यारो
शुक्रवार प्रात: 20 जुन प्रात: 10 बजे से 22 जुन प्रात: 10 बजे तक हमारा मुक्तक |
विषय----कमल,नीरज,पंकज,जलज, शतदल,वारिज,कंज आदि पर्यायवाची।
कार्यक्रम अध्य क्ष आदरणीय कुंदन उपाध्यावय जी को सादर समर्पित |
( साथ ह़ी अन्य प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ , प्रतिक्रिया आमंत्रण के संग )
विषय ( शीर्षक ) : कमल / पंकज |
तुम कहाँ जन्में और रहते हो कहाँ, इसका तनिक भी अर्थ नहीं |
कीचड़ में जन्में , पंकज सरीख खिले, इस दुनिया में समर्थ वही |
जल की बूंदों से लिप्त रहे, पर आसक्ति से ये सदा निर्लिप्त रहे |
कमल से सीखो जीने की कला ताकि जीवन जाये कभी व्यर्थ नहीं |
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -17
*हमारा मुक्तक *
अध्यक्षः सम्मान्य श्री कुन्दन उपाध्याय जी
शीर्षकः कमल//पंकज/नीरज ...
(अतिथि रचना )
नाम बदल कर मेरा मुझसे कहता है अब काम नहीं
भेदभाव की भाषा पढ़ता मन में उसके राम नहीं
जीवन की सच्चाई है यह कीचड़ में ही कमल खिले
प्रेम लुटाओ प्रेम मिलेगा इसका कोई दाम नहीं
लव कुमार 'प्रणय '
श्री गोपालराम गहमरी साहित्य
समारोह -17 ।
(20 से 22 जून )
अध्यक्षः सम्मान्य श्री कुन्दन उपाध्याय जी ।
शीर्षकः कमल/जलज/पंकज/आदि ।
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*अतिथि रचना *
------------
खिल गया लो कमल भारती के अँगन ,
गंध से आज गमका हुआ है गगन ,
सूर्य की रश्मियों में नया ओज है ,
हैं सभी देशवासी हृदय में मगन ।
***
महेश जैन 'ज्योति' ,
मथुरा ।
गोपल गहमर साहित्य-17
विषय-कमल पंकज
आद.कुदन जी से इजाजत
कीचड मे खिलके भी दिलो,पे राज होता है,
फूलो के राजा के सर पे,काटो का ताज होता,है
देके ही होती है मोहब्बत,की शुरूवात
प्यार का इसी से
आगज होता है
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-17
"हमारा मुक्तक" / विषय- कमल व पर्याय
आदरणीय श्री कुंदन उपाध्याय जी को सादर समर्पित !
प्रेम सही माईने में परिभाषित हो.
प्रमाणिकता हृदय से सत्यापित हो.
एक भ्रमर जो रात्रि भर बेचैन रहा,
व्याकुलता ये पुष्प कमल को ज्ञापित हो.
अर्क़ान-
फ़ेलुन,फ़ेलुन,फ़ेलुन,फ़ेलुन,फ़ेलुन,फ़ा.
--------मुकेश कुमार "राज"
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-17
आदरणीय अध्यक्ष श्री कुंदन उपाध्याय जी को समर्पित ।
विषय-कमल ।
किसी को कुछ दिया नही, बदले में मिलेगा क्यों ?
सही नीयत से किया नही, पुण्य फिर फलेगा क्यों ?
इच्छित फल की प्राप्ति हेतु सत्कर्म आवश्यक है,
कली गर लगाई नही, कमल उम्मीद का खिलेगा क्यों ?
फ़ेलुन,फ़ेलुन,फ़ेलुन,फ़ेलुन,फ़ेलुन,फ़ा.
--------मुकेश कुमार "राज"
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-17
आदरणीय अध्यक्ष श्री कुंदन उपाध्याय जी को समर्पित ।
विषय-कमल ।
किसी को कुछ दिया नही, बदले में मिलेगा क्यों ?
सही नीयत से किया नही, पुण्य फिर फलेगा क्यों ?
इच्छित फल की प्राप्ति हेतु सत्कर्म आवश्यक है,
कली गर लगाई नही, कमल उम्मीद का खिलेगा क्यों ?
-नारायण गौरव ।
२० जून से २२ जून तक हमारा मुक्तक
शीर्षक =कमल /कंज
विधा -मुक्तक
बहर=२१२ २१२ २१२ २१२
आ .श्री कुंदन उपाध्याय जी को समर्पित
जन्म तुमको मिला, अब मुस्कराइए
गत वर्ष जो जिये ,सोच हरषाइये
कंज जैसा हमेशा ,महकते रहो
हर दिलों पर ,मधुर गीत बरषाइये
सुरेश कुमार उत्साही
गोपाल राम गहमरी साहित्यिक समारोह- 17
बिषय- कमल/ अम्बुज/ कंज/ सरोज/ आदि पर्यायवाची।
ँँँँ
समारोह अध्यक्ष सम्मान्य कुंदन उपाध्याय जी एवं आदरणीय अखण्ड गहमरी जी को सादर समर्पित।
ँँँँ
यह तन भी तो कीचड रूपी, जिसमें क्यों बसता है मनोज।
क्षण दूर करो इसको मन से, पालो मानवता का सरोज।
जीवन के इस पंच तत्व मे, गर खिल जाये चेतन अम्बुज।
तो समझो सृजित हुआ तन मे, नैतिकता का अनुपम सरोज।
ँँँँँ
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -१७ |
हमारा मुक्तक |
समारोह प्रमुख-आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी |
शीर्षक-कमल/नीरज/पंकज/शतदल/वारिज/कंज/आदि |
====================================
अच्छाई सभी ढूंडते नीरज में,
पर कमल उदास रहते मन में ,
एक कमल की किस्मत कीचड ,
व दूजा ब्रह्म कमल बीरानें में ||
नोट:-ब्रह्म कमल ५००० मीटर की ऊँचाई से ऊपर पहाड़ों पर उगनें वाला पुष्प है ,इसे अति पवित्र माना जाता है|
आप सब सभी रचाकारों को मंच की तरफ से हार्दिक श्ुाभ कामना आपका जीवन स्वस्थ एवं भविष्य उज्जवल हो
२० जून से २२ जून तक हमारा मुक्तक
शीर्षक =कमल /कंज
विधा -मुक्तक
बहर=२१२ २१२ २१२ २१२
आ .श्री कुंदन उपाध्याय जी को समर्पित
जन्म तुमको मिला, अब मुस्कराइए
गत वर्ष जो जिये ,सोच हरषाइये
कंज जैसा हमेशा ,महकते रहो
हर दिलों पर ,मधुर गीत बरषाइये
सुरेश कुमार उत्साही
गोपाल राम गहमरी साहित्यिक समारोह- 17
बिषय- कमल/ अम्बुज/ कंज/ सरोज/ आदि पर्यायवाची।
ँँँँ
समारोह अध्यक्ष सम्मान्य कुंदन उपाध्याय जी एवं आदरणीय अखण्ड गहमरी जी को सादर समर्पित।
ँँँँ
यह तन भी तो कीचड रूपी, जिसमें क्यों बसता है मनोज।
क्षण दूर करो इसको मन से, पालो मानवता का सरोज।
जीवन के इस पंच तत्व मे, गर खिल जाये चेतन अम्बुज।
तो समझो सृजित हुआ तन मे, नैतिकता का अनुपम सरोज।
ँँँँँ
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -१७ |
हमारा मुक्तक |
समारोह प्रमुख-आदरणीय कुंदन उपाध्याय जी |
शीर्षक-कमल/नीरज/पंकज/शतदल/वारिज/कंज/आदि |
====================================
अच्छाई सभी ढूंडते नीरज में,
पर कमल उदास रहते मन में ,
एक कमल की किस्मत कीचड ,
व दूजा ब्रह्म कमल बीरानें में ||
नोट:-ब्रह्म कमल ५००० मीटर की ऊँचाई से ऊपर पहाड़ों पर उगनें वाला पुष्प है ,इसे अति पवित्र माना जाता है|
आप सब सभी रचाकारों को मंच की तरफ से हार्दिक श्ुाभ कामना आपका जीवन स्वस्थ एवं भविष्य उज्जवल हो
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