गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्पदी (विषय -सेना/सैनिक/जवान)
चौपई छंद चतुष्पदी
--------------------
माँ वसुधा पर जो कुर्बान, उनको समझो वीर जवान
रानी झांसी जैसी शान, अहिल्या बाई की भी आन |
सीमा पर जो वीर जवान, सच्चे प्रहरी उनको जान
उनकी भक्ति सच्ची जान, लोक तंत्र के रखते आन |
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
शीर्षक. * सेना /जवान
जवानी आज देशवा के नाम करजा
बलीदानी क लाल तू पहचान करजा
सेना क जवान पुत्र हव भारतमाता के
सुन..हो सिपाही न्योक्षावर प्राण करजा.
धनन्जय उपाध्याय 'गजल
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्पदी (विषय -सेना/सैनिक/जवान)
मुक्तक
=====
सैनिक का जब हो सम्मान.
देश सुरक्षित तब ही मान
कुर्बानी को तत्पर वीर जवान-
वीर प्रसूता माँ की यह शान,
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्पदी (विषय -सेना/सैनिक/जवान)
अध्यक्ष -- आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाल जी एवं
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी को सादर समर्पित
###############################################
अनुशासन के पूजारी होते हैं जवान
देश की आन बान शान होते हैं जवान
देशभक्ति भरी होती हैं इनमें कूट-कूट कर
दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते हैं जवान
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्पदी (विषय -सेना/सैनिक/जवान)
चौपई छंद चतुष्पदी
--------------------
माँ वसुधा पर जो कुर्बान, उनको समझो वीर जवान
रानी झांसी जैसी शान, अहिल्या बाई की भी आन |
सीमा पर जो वीर जवान, सच्चे प्रहरी उनको जान
उनकी भक्ति सच्ची जान, लोक तंत्र के रखते आन |
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
शीर्षक. * सेना /जवान
जवानी आज देशवा के नाम करजा
बलीदानी क लाल तू पहचान करजा
सेना क जवान पुत्र हव भारतमाता के
सुन..हो सिपाही न्योक्षावर प्राण करजा.
धनन्जय उपाध्याय 'गजल
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्पदी (विषय -सेना/सैनिक/जवान)
मुक्तक
=====
सैनिक का जब हो सम्मान.
देश सुरक्षित तब ही मान
कुर्बानी को तत्पर वीर जवान-
वीर प्रसूता माँ की यह शान,
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्पदी (विषय -सेना/सैनिक/जवान)
अध्यक्ष -- आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाल जी एवं
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी को सादर समर्पित
###############################################
अनुशासन के पूजारी होते हैं जवान
देश की आन बान शान होते हैं जवान
देशभक्ति भरी होती हैं इनमें कूट-कूट कर
दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते हैं जवान
"कल्याणी झा"
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
शनिवार -हमारी चतुष्पदी (विषय -सेना/सैनिक/जवान)
अध्यक्ष -- आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाल जी एवं
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी को सादर समर्पित
---------------माननीय अध्यक्ष एंव सभी रचनाकारो का हार्दिक आभार गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
शनिवार -हमारी चतुष्पदी (विषय -सेना/सैनिक/जवान)
अध्यक्ष -- आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाल जी एवं
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी को सादर समर्पित
प्यार तो हम दुश्मनो को भी सिखा के रहेगें
वतन में अमन चैन के फूल खिला के रहेगे
हमारी शराफत को कमजोरी न समझना तुम
भारत के जवान सबको घुल चटाके रहेगें
एडमिन रचना अखंड गहमरी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
सोमवार- मंगलवार- हमारा दिन हमारी मर्जी
अध्यक्ष -- आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाल जी एवं
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी को सादर समर्पित
*मुक्तक *
अपना घर तो आज उदासी में डूबा
कहने का अन्दाज उदासी में डूबा
गीत -गजल -कविता सारे क्या रूठ गये
लगता है हर साज उदासी में डूबा
लव कुमार 'प्रणय '
-------------------------------------------------------
कुंडलिया छंद
ऊँचा कद इंसान का, नहीं ह्रदय में भाव
कागज़ खुशबू दे नहीं, दिखे नहीं सद्भाव |
दिखे नहीं सद्भाव, स्नेह हिवडे से मिलता
नेह न बरसे भाव, प्यार फिर कैसे टिकता
लक्षमण करे न काम,तभी मस्तक हो नीचा
माँ को आवे लाज, झुका सिर करे न ऊँचा |
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-१३
सोमवार मंगलवार- हमारा दिन हमारी मर्जी।
अध्यक्ष -- आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाल जी एवं
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी को सादर समर्पित
###############################################
दौलत का क्या मुझे करना हैं
दौलत तो यहीं रह जाना हैं
सच्ची दौलत तो प्रभु आप हो
आप में ही अब रम जाना हैं
वतन में अमन चैन के फूल खिला के रहेगे
हमारी शराफत को कमजोरी न समझना तुम
भारत के जवान सबको घुल चटाके रहेगें
एडमिन रचना अखंड गहमरी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-13*
सोमवार- मंगलवार- हमारा दिन हमारी मर्जी
अध्यक्ष -- आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाल जी एवं
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी को सादर समर्पित
*मुक्तक *
अपना घर तो आज उदासी में डूबा
कहने का अन्दाज उदासी में डूबा
गीत -गजल -कविता सारे क्या रूठ गये
लगता है हर साज उदासी में डूबा
लव कुमार 'प्रणय '
-------------------------------------------------------
कुंडलिया छंद
ऊँचा कद इंसान का, नहीं ह्रदय में भाव
कागज़ खुशबू दे नहीं, दिखे नहीं सद्भाव |
दिखे नहीं सद्भाव, स्नेह हिवडे से मिलता
नेह न बरसे भाव, प्यार फिर कैसे टिकता
लक्षमण करे न काम,तभी मस्तक हो नीचा
माँ को आवे लाज, झुका सिर करे न ऊँचा |
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-१३
सोमवार मंगलवार- हमारा दिन हमारी मर्जी।
अध्यक्ष -- आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाल जी एवं
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी को सादर समर्पित
###############################################
दौलत का क्या मुझे करना हैं
दौलत तो यहीं रह जाना हैं
सच्ची दौलत तो प्रभु आप हो
आप में ही अब रम जाना हैं
"कल्याणी झा"
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-१३
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी एवं श्री अखंड गहमरी जी के समक्ष प्रस्तुत
तभी देश का हो उत्थान (चौपई छंद) १५ माताए अंत गुरु लघु से
================
जनता में हो जिसका मान, उसे देश का नेता मान
सुभाषचन्द्र बोस का ध्यान,हर बच्चे को जिसका ज्ञान
नेहरु जी ने किया कमाल, वाजपेयी सा किसका भाल
नेतृत्व गुण का हो विकास, उस नेता में रखते आस ||
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-१३
मंच संचालक - आदरणीय चन्द्रमौली पांडे जी एवं श्री अखंड गहमरी जी के समक्ष प्रस्तुत
तभी देश का हो उत्थान (चौपई छंद) १५ माताए अंत गुरु लघु से
================
जनता में हो जिसका मान, उसे देश का नेता मान
सुभाषचन्द्र बोस का ध्यान,हर बच्चे को जिसका ज्ञान
नेहरु जी ने किया कमाल, वाजपेयी सा किसका भाल
नेतृत्व गुण का हो विकास, उस नेता में रखते आस ||
उसका ही नेतृत्व महान, श्रमिको में है जिसका मान,
सेना का कप्तान प्रधान, देश सुरक्षित तब ही मान |
राष्ट्र सृजन में जिसका योग, वह नेता कहलाने योग्य |
खिले कमल को लेकर हाथ,चलना होगा सबके साथ ||
जन हित में जो करता काम, उस नेता का होता नाम,
खाने में अटकी हो जान, उस नेता का हो अपमान |
उस नेतृत्व से करे आस, जो जीते सब का विश्वास
उस नेता के हाथ कमान, तभी देश का हो उत्थान ||
(नितांत मौलिक रचना) रचनाकार -
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
सेना का कप्तान प्रधान, देश सुरक्षित तब ही मान |
राष्ट्र सृजन में जिसका योग, वह नेता कहलाने योग्य |
खिले कमल को लेकर हाथ,चलना होगा सबके साथ ||
जन हित में जो करता काम, उस नेता का होता नाम,
खाने में अटकी हो जान, उस नेता का हो अपमान |
उस नेतृत्व से करे आस, जो जीते सब का विश्वास
उस नेता के हाथ कमान, तभी देश का हो उत्थान ||
(नितांत मौलिक रचना) रचनाकार -
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
No comments:
Post a Comment