Sunday, 29 June 2014

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -11 एक साथ अध्‍यक्ष -- आदरणीय लव कुमार प्रणय जी

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ---११
शुक्रवार से शनिवार
चतुष्पदी-- गंगा
गंगा के तीर पर पहुंचे अरविंद,नरेन्द्र और राहुल
पाने को आशीष मां का सबके सब अति आकुल
सतपथ पर चल जो अपनी जवाबदेही निभाएगा
पतितपाविनी शोकहारिणी छोड़े न उसे व्याकुल
रमन कुमार झा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्‍पदी (विषय - गंगा )
अध्यक्ष -आदरणीय लव कुमार प्रणय जी को सादर समर्पित
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गंगा माँ की महता का क्या कहना
उन सा पावन न कोई होना
सबके पापों को ये तो धोती हैं
अमृत का काम गंगा करती हैं
"कल्याणी झा"
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
शुक्रवार शनिवार -हमारी चतुष्‍पदी विषय गंगा
अध्यक्ष -आदरणीय लव कुमार प्रणय जी एवं
मंच संचालिका - आदरणीया कल्‍याणी झा जी को सादर समर्पित
मैं गुजरता हूँ पास से
मन में लिये इक आस से
साफ होगी गंगा कभी
मुक्‍ति होगी क्‍या बास से
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्‍पदी (विषय - गंगा )
साहित्यकारों की धरती गहमर के सम्मानित गुणीजन एवं आदरणीय अखंड गहमरी जी और
मंच संचालिका - आदरणीया कल्‍याणी झा जी को सादर समर्पित
*चतुष्‍पदी *
गंगा मैया के आँचल में , हर सुख मिलता है जीवन का
पावन ,निर्मल जलधारा से ,सब पाप कटे इस तन- मन का
क्यों भूल गया तू ऐ मानव , कल्याणी गंगा मैया को
है वक्त अभी भी जाग अरे , अब पार लगाले नैया को
लव कुमार 'प्रणय'
Piyush Parashar
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
बुधवार से गुरुवार ***दुनिया गीत गजल
की ,विषय माँ
अध्यक्ष -आदरणीय लव कुमार प्रणय
जी को सादर समर्पित......
माँ के होठों की एक हंसी सब दुःख की हरिता बन
जाती है,
माँ की आँखों का एक आंसू आँखों की सरिता बन
जाती है,
महाकाव्य भी लिख दूँ तो भी कम ही पड़ जाएगा,
माँ को बस माँ ही लिख दूँ पूरी कविता बन जाती है।
~~~पीयुष पराशर~~~~~
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
अध्‍यक्ष -- आदरणीय लव कुमार प्रणय जी
मंच संचालिका - आदरणीया कल्‍याणी झा जी
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्‍पदी (विषय - गंगा 
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
सोमवार मंगलवार *****हमारा दिन हमारी मर्जी
अध्यक्ष -आदरणीय लव कुमार प्रणय जी एवं
मंच संचालिका - आदरणीया कल्‍याणी झा जी को सादर समर्पित
एक मुक्‍तक '''''''इस मंच की स्थिती पर आधारित
चल रहे अकेले मगर हौसला हारेगे हम नही
तोड़ दे हमारे हौसलो को जमाने में दम नही
तुम क्‍या कारवा भी साथ आयेगा इक दिन हमारे
मजबूत इरादे हमारे किसी पत्‍थर से कम नही
अखंड गहमरी
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गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
बुधवार से गुरुवार ***दुनिया गीत गजल की (विषय= माँ )
साहित्यकारों की धरती गहमर के सम्मानित गुणीजन एवं आदरणीय अखंड गहमरी जी और
मंच संचालिका - आदरणीया कल्‍याणी झा जी को सादर समर्पित
**गीत **
तेरे चरणों की रज माँ इस जग को देती ज्ञान
सूर ,कबीरा ,तुलसी -मीरा तेरे अमर विधान
तेरी वीणा के स्वर से है जीवन का सिंगार
मोहक वाणी तेरी सुन्दरता का है आधार
स्वर की ज्योति -पुंज माँ मुझको दो सरगम का दान
सूर ,कबीरा ,तुलसी -मीरा तेरे अमर विधान
मेरे मन मन्दिर में आकर, तम का कर दो नाश
वातावरण सुगन्धित करने को लाओ मधुमास
भारत भू के जन -गण -मन का दूर करो अज्ञान
सूर ,कबीरा ,तुलसी -मीरा तेरे अमर विधान
लव कुमार 'प्रणय'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
बुधवार से गुरुवार ***दुनिया गीत गजल की ,विषय माँ
अध्यक्ष -आदरणीय लव कुमार प्रणय जी को सादर समर्पित
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मेरी माँ कितनी अच्छी हो
सब रिस्तो से तो प्यारी हो
तेरे बिना कैसे रहूंगी
सुख -दुःख तो किससे कहूँगी
तेरे लिए रोती रहूंगी
मेरी माँ कितनी अच्छी हो
इससे अच्छी होती छोटी
ससुराल फिर जनि न पड़ती
तुम से मैं चिपकी रहती
मेरी माँ कितनी अच्छी हो
सब रिस्तो से तो प्यारी हो
"कल्याणी झा"
**गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११**
सोमवार मंगलवार *****हमारा दिन हमारी मर्जी *****
साहित्यकारों की धरती गहमर के सम्मानित गुणीजन एवं
मंच संचालिका - आदरणीया कल्‍याणी झा जी को सादर समर्पित
*मुक्तक *
सदा अपना बनाने की, हमें सौगन्ध देता है
कभी वो दर्द देता है,कभी वो छन्द देता है
बहारें पूँछती हैं ये ,हमारा बागवां कैसा
सजाकर फूल कागज के ,हमें वो गन्ध देता है
लव कुमार 'प्रणय'
Akhand Gahmari
अध्‍यक्ष -- आदरणीय लव कुमार प्रणय जी
मंच संचालिका - आदरणीया कल्‍याणी झा जी
बुधवार से गुरूवार *****दुनिया गीत गजल की , विषय माँ
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गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
सोमवार मंगलवार *****हमारा दिन हमारी मर्जी
अध्यक्ष -आदरणीय लव कुमार प्रणय जी को सादर समर्पित
मुझे तुम से हो गया प्यार
करती हूँ मैं इसे स्वीकार
तेरे बिना जीना बेकार
सुन ले ना ओ मेरे यार
"कल्याणी झा"
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गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-११
सोमवार मंगलवार *****हमारा दिन हमारी मर्जी
अध्यक्ष -आदरणीय लव कुमार प्रणय जी एवं
मंच संचालिका - आदरणीया कल्‍याणी झा जी को सादर समर्पित
5 हायकु
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