हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ --
हिन्दू हैं हम हिंदी हमारी है पहचान
सर्व धर्म पल्ल्वित वो वतन है हिंदुस्तान
हिंदी से अर्जित कर जो अंग्रेजी को जीते हैं
माँ भारती कैसे करे उन पर अभिमान ---
मँजु शर्मा १४-०९-२०१४
हिंदी -दिवस पर आ .आशतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार को समर्पित रचना .
------------------------------------------------------------------------------------
घनाक्षरी
-----------------
हिन्दी बिन्दी मेरी माता ,भारती के भाल की है .
माँ भारती के भाल पे ,----------इसे चमकाइये .
-------
चाहे हों गरीब लोग ,-------चाहे पूंजीपति होय.
जन -मन अंग्रेजी की ,-------- मार से बचाइये.
-------
फले -फूले हिन्दी रूपी ,-----चमन हमारा यह .
भारत के गौरव का ,------मान भी बढाइये.
-------
भारत अखंड मेरा ,------खंड -खंड हो न जाये .
भाषा विवाद न अब ,---------और सुलगाइये.
---------------------------------------------------
------------भारती जैन --------------------------
--------------१४-९-२०१४ ---------------------------
हिन्दी दिवस पर बिशेष कार्यक्रम के अंतर्गत।
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को बधाई के साथ एक रचना समर्पित।
मुक्तक -- रविवार (14-09-2014)
अपने हाथो में थामे कलम, सभी साहित्यकार है
प्रहरी हिन्दी भाषा के बने , देश के कलमकार है
रक्षा , सेवा तन मन सब करें, चमका हिन्दी नाम तब
हिन्दी भाषा का गुणगान कर, करे सभी जयकार है
पवन बत्तरा
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ "एक कुण्डलियाँ " सादर समर्पित हैं!
----------------------------
हिंदी को सम्मान दो ,हिंदी को दो मान ,
हिंदी अपने देश की,है सच्ची पहचान ,
है सच्ची पहचान ,देश को जोड़े हरदम ,
जग में उसकी धूम ,देख हिंदी की दमखम ,
सजी भाल पर खूब ,माँ भारती की बिंदी ,
हर भाषा से तेज ,हमारी प्यारी हिंदी।
---महेंद्र वर्मा "धीर "
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत
आदरणीय Ashutosh Kumar जी को हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई के साथ सादर समर्पित तीन मुक्तक
1
इंसान हर पल कई इम्तहान से गुजरता है
किसी मे असफल तो कहीं पर सुधरता है
जीवन सबसे बड़ी परीक्षा नदी हर शक्स की
जीवंटता से लबरेज ही पार उतरता है
2
बरसे घन झिमिर झिमिर धरा रूप खिलता है
प्यासे खग विहग तृप्त लोप मानुष विकलता है
चहूँ और हरियाली खेतो में उपजे सुधा रस
देख कर फलती फसल को धरती पुत्र निखरता है
3
कुदरत का तोहफा अनमोल है बसंत ऋतु
ऋतुओ का राजा धरा श्रंगार है बसंत ऋतु
नव कोंपल आगाज पतझर की हुई विदाई
वृक्ष सघन सुमन सौरभ समीरण बसंत ऋतु
*********************************************शान्ति पुरोहित
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समरर्पित..
मातृ भाषा का जब तक न सम्मान होगा
अपने देश में ही जिसका अपमान होगा
घर घर बोली जाये हिंदी को तब ही तो
इसका *देश *विदेश में खूब मान होगा !!
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
-----
आदरणीय आशुतोष कुमार
जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक
शुभकामनाओँ सहित ।
-----
* गीत *
दीपक अभी नहीं जल पाया ,
माँ के मन की आशा का ।
अभी अधूरा अभिनन्दन है ,
अपनी प्यारी भाषा का ।।
यों तो सिंहासन पर हमने
लाकर इसे बिठाया है ,
पर अपने ही हाथों से
विष प्याला इसे पिलाया है ,
टूट गया है कच्चा धागा
इसकी मन अभिलाषा का ।
अभी...........................(1)
बड़े अनूठे अक्षर अनुपम
अद्'भुत शक्ति भरे प्यारे ,
अनुस्वार लगते ही करते
ब्रह्मनाद मिलकर सारे ,
हर अक्षर है एक योगिनी
अंत न ज्ञान पिपासा का ।
अभी........................(2)
अब तक मान दिया है थोथा
फिर भी तो मुस्काते हैं ,
देख रहे दुर्दशा मौन हम
मन में नहीं लजाते हैं ,
दूर करो अँधियार आवरण
तोड़ो धुंध कुहासा का ।
अभी.....................(3)
छंद गीत कविता मल्हार का
अमृत सा जल पिलवायें ,
रसिया राग रागिनी के
व्यंजन मेवा फल खिलवायें ,
बहुत दिनों से दिया खिलौना
इसको मात्र दिलासा का ।
अभी........................(4)
-----
हिन्दी दिवस.....
हिन्दी
आज भी घूँघट में
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ --
हिन्दू हैं हम हिंदी हमारी है पहचान
सर्व धर्म पल्ल्वित वो वतन है हिंदुस्तान
हिंदी से अर्जित कर जो अंग्रेजी को जीते हैं
माँ भारती कैसे करे उन पर अभिमान ---
मँजु शर्मा १४-०९-२०१४
हिंदी -दिवस पर आ .आशतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार को समर्पित रचना .
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घनाक्षरी
-----------------
हिन्दी बिन्दी मेरी माता ,भारती के भाल की है .
माँ भारती के भाल पे ,----------इसे चमकाइये .
-------
चाहे हों गरीब लोग ,-------चाहे पूंजीपति होय.
जन -मन अंग्रेजी की ,-------- मार से बचाइये.
-------
फले -फूले हिन्दी रूपी ,-----चमन हमारा यह .
भारत के गौरव का ,------मान भी बढाइये.
-------
भारत अखंड मेरा ,------खंड -खंड हो न जाये .
भाषा विवाद न अब ,---------और सुलगाइये.
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------------भारती जैन --------------------------
--------------१४-९-२०१४ ---------------------------
हिन्दी दिवस पर बिशेष कार्यक्रम के अंतर्गत।
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को बधाई के साथ एक रचना समर्पित।
मुक्तक -- रविवार (14-09-2014)
अपने हाथो में थामे कलम, सभी साहित्यकार है
प्रहरी हिन्दी भाषा के बने , देश के कलमकार है
रक्षा , सेवा तन मन सब करें, चमका हिन्दी नाम तब
हिन्दी भाषा का गुणगान कर, करे सभी जयकार है
पवन बत्तरा
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ "एक कुण्डलियाँ " सादर समर्पित हैं!
----------------------------
हिंदी को सम्मान दो ,हिंदी को दो मान ,
हिंदी अपने देश की,है सच्ची पहचान ,
है सच्ची पहचान ,देश को जोड़े हरदम ,
जग में उसकी धूम ,देख हिंदी की दमखम ,
सजी भाल पर खूब ,माँ भारती की बिंदी ,
हर भाषा से तेज ,हमारी प्यारी हिंदी।
---महेंद्र वर्मा "धीर "
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत
आदरणीय Ashutosh Kumar जी को हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई के साथ सादर समर्पित तीन मुक्तक
1
इंसान हर पल कई इम्तहान से गुजरता है
किसी मे असफल तो कहीं पर सुधरता है
जीवन सबसे बड़ी परीक्षा नदी हर शक्स की
जीवंटता से लबरेज ही पार उतरता है
2
बरसे घन झिमिर झिमिर धरा रूप खिलता है
प्यासे खग विहग तृप्त लोप मानुष विकलता है
चहूँ और हरियाली खेतो में उपजे सुधा रस
देख कर फलती फसल को धरती पुत्र निखरता है
3
कुदरत का तोहफा अनमोल है बसंत ऋतु
ऋतुओ का राजा धरा श्रंगार है बसंत ऋतु
नव कोंपल आगाज पतझर की हुई विदाई
वृक्ष सघन सुमन सौरभ समीरण बसंत ऋतु
*********************************************शान्ति पुरोहित
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समरर्पित..
मातृ भाषा का जब तक न सम्मान होगा
अपने देश में ही जिसका अपमान होगा
घर घर बोली जाये हिंदी को तब ही तो
इसका *देश *विदेश में खूब मान होगा !!
** आलोक **
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत
आदरणीय Ashutosh Kumar जी को हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई के साथ सादर समर्पित एक रचना ....
विधा - चोका
*************************
हमारी हिंदी
मीठी मृदुल बोली
भावों से भरी
अलंकारों से सजी
बहती ऐसे
गंगा की धार जैसे
हिंदी महान
हिंदुओं की है आन
हिंद की शान
साहित्य की जननी
हिंद की बेटी
शारदे का आशीष
क्यूँ उपेक्षित
अपने ही आंगन
करो संकल्प
हिंदी अपनायेंगे
विश्व स्तर पे
इसे आगे लायेंगे
सम्मान दिलाएंगे
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत
आदरणीय Ashutosh Kumar जी को हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई के साथ सादर समर्पित एक रचना ....
विधा - चोका
*************************
हमारी हिंदी
मीठी मृदुल बोली
भावों से भरी
अलंकारों से सजी
बहती ऐसे
गंगा की धार जैसे
हिंदी महान
हिंदुओं की है आन
हिंद की शान
साहित्य की जननी
हिंद की बेटी
शारदे का आशीष
क्यूँ उपेक्षित
अपने ही आंगन
करो संकल्प
हिंदी अपनायेंगे
विश्व स्तर पे
इसे आगे लायेंगे
सम्मान दिलाएंगे
~रमा वर्मा~ (१४-९-१४)
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समरर्पित - हिन्दी पर
******************************************************************************************
तीन मुक्तक ---- गिरिराज भंडारी
************ ***************
अपनी माँ को माँ कहते शर्माते हैं
और गैर को आंटी कह मुसकाते हैं
हिन्दी अपनी माँ की भाषा है यारों
क्यों इसको माँ कहने से डर जाते हैं
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समरर्पित - हिन्दी पर
******************************************************************************************
तीन मुक्तक ---- गिरिराज भंडारी
************ ***************
अपनी माँ को माँ कहते शर्माते हैं
और गैर को आंटी कह मुसकाते हैं
हिन्दी अपनी माँ की भाषा है यारों
क्यों इसको माँ कहने से डर जाते हैं
जितने हिन्दी का झंडा ले चलते हैं
उनके बच्चे अंग्रेजी में पढ़ते हैं
ऐसे दोहरे माप दंड से क्या होगा
मुंह से हिन्दी हिन्दी ही सब कहते हैं
जब अंग्रेजी को परदेशी समझेंगे
तब हिन्दी को अपनी भाषा मानेंगे
तब हिन्दी का मान सही कर पायेंगे
और तभी हिन्दी भाषी कहलायेंगे
***********************************
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समर्पित - हिन्दी पर
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती ---प्यारी हिंदी मेरी !
मान बढ़ाती हम अभिमान हैं करते प्यारी हिंदी मेरी !!
सब भाषा ...................
उनके बच्चे अंग्रेजी में पढ़ते हैं
ऐसे दोहरे माप दंड से क्या होगा
मुंह से हिन्दी हिन्दी ही सब कहते हैं
जब अंग्रेजी को परदेशी समझेंगे
तब हिन्दी को अपनी भाषा मानेंगे
तब हिन्दी का मान सही कर पायेंगे
और तभी हिन्दी भाषी कहलायेंगे
***********************************
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समर्पित - हिन्दी पर
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती ---प्यारी हिंदी मेरी !
मान बढ़ाती हम अभिमान हैं करते प्यारी हिंदी मेरी !!
सब भाषा ...................
गुलदस्ते के--- सारे फूलों में फूल वो गुलाब का !
सपनों को रोज़ सजाए पर बन कर- सुर्खाब का !
घुल जाती यूँ मन में ऐसे मिश्री की डली हो जैसे …
भौंरे आकर गुण गान सुनाते ऐसी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती…………
दीपावली के दीपों में जगमग प्रकाश होता है !
भाव सजा के कवि कविता के मोती पोता है !
भाव सजाते चलते शब्द ज्वाजल्यमान हों जैसे …
नभ के चन्दा सूरज चमकते ऐसी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती …………
…
बुलबुल जैसे गाये तराना कोयल कुहूकती जाए !
झरना झर झर नदिया कलकल कह बहती जाए !
हिंदी भाषा सौन्दर्यवान है अक्षर मोती जैसे ....
ज्ञान जगाती पाठ पढ़ाती प्यारी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती………… ''तनु ''
हिन्दी दिवस पर बिशेष कार्यक्रम के अंतर्गत।
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को बधाई के साथ एक रचना समर्पित।
बने स्वभाव.. मृदुल जल वैसी
भाव न दे...... वो भाषा कैसी
सबको देखा बोल बुलाकर
कोई नहीं है.......हिन्दी जैसी
सपनों को रोज़ सजाए पर बन कर- सुर्खाब का !
घुल जाती यूँ मन में ऐसे मिश्री की डली हो जैसे …
भौंरे आकर गुण गान सुनाते ऐसी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती…………
दीपावली के दीपों में जगमग प्रकाश होता है !
भाव सजा के कवि कविता के मोती पोता है !
भाव सजाते चलते शब्द ज्वाजल्यमान हों जैसे …
नभ के चन्दा सूरज चमकते ऐसी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती …………
…
बुलबुल जैसे गाये तराना कोयल कुहूकती जाए !
झरना झर झर नदिया कलकल कह बहती जाए !
हिंदी भाषा सौन्दर्यवान है अक्षर मोती जैसे ....
ज्ञान जगाती पाठ पढ़ाती प्यारी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती………… ''तनु ''
हिन्दी दिवस पर बिशेष कार्यक्रम के अंतर्गत।
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को बधाई के साथ एक रचना समर्पित।
बने स्वभाव.. मृदुल जल वैसी
भाव न दे...... वो भाषा कैसी
सबको देखा बोल बुलाकर
कोई नहीं है.......हिन्दी जैसी
विनय बाली सिंह*******
श्री आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार को समर्पित
शीर्षक --हिन्दी
हिदी दिवस पर शुभकामनाओ सहित
मत समझो केवल तुम भाषा ये सुरसरि कालिंदी
चमके ये साहित्य जगत में ज्यों ललाट पर बिंदी
देकर नित सम्मान इसे तुम जन जन हिये बसाओ
भारत की पहचान कराती जग को भाषा हिन्दी
.............................................गांधी डीडवाना
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ "दस दोहे" सादर समर्पित हैं!
-1-
भाषा जोड़ सके वही , जिसमें देशज गंध
परभाषा से ना मिले , ममता का आनंद ।
-2
तब होगा इस देश का , दुनियाँ में उत्कर्ष
जब निज भाषा का करें, आदर सभी सहर्ष
-3-
जिस भाषा मे सोचते , उसमें हो संवाद
तभी आपकी सोच का , हो सच्चा अनुवाद
-4-
हिन्दी हिन्दी में कहे, एक पते की बात
निज भाषा में हैं लिखे , अंतस के जज़्बात
-5-
हिन्दी में जब भी करें, अपने व्यक्त विचार
जो कहने की चाह है , निकलें वह उद्गार
-6-
भाषाओं में देश की , परम स्नेह सहकार
हिन्दी को सबसे मिला, माँ बहना सा प्यार
-7-
हर भाषा को देश की, माँ का आशीर्वाद
सबमें खुशबू वतन की , माटी का है स्वाद
-8-
भाषा कोई सीखिए , बढा लीजिए ज्ञान
निज भाषा ही आपको , देगी पर पहचान
-9-
निज भाषा की शान हैं , अलंकार ,रस , छंद
सज धज कर इनसे निकल, भाव बहें स्वछंद
-10-
भाषा मरहम तुल्य है , भर दे सारे घाव
सब कष्टों से तार दे , निज भाषा की नाव
-ओंम प्रकाश नौटियाल
बडौदा , गुजरात , मोबा. 9427345810
श्री आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार को समर्पित
शीर्षक --हिन्दी
हिदी दिवस पर शुभकामनाओ सहित
मत समझो केवल तुम भाषा ये सुरसरि कालिंदी
चमके ये साहित्य जगत में ज्यों ललाट पर बिंदी
देकर नित सम्मान इसे तुम जन जन हिये बसाओ
भारत की पहचान कराती जग को भाषा हिन्दी
.............................................गांधी डीडवाना
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ "दस दोहे" सादर समर्पित हैं!
-1-
भाषा जोड़ सके वही , जिसमें देशज गंध
परभाषा से ना मिले , ममता का आनंद ।
-2
तब होगा इस देश का , दुनियाँ में उत्कर्ष
जब निज भाषा का करें, आदर सभी सहर्ष
-3-
जिस भाषा मे सोचते , उसमें हो संवाद
तभी आपकी सोच का , हो सच्चा अनुवाद
-4-
हिन्दी हिन्दी में कहे, एक पते की बात
निज भाषा में हैं लिखे , अंतस के जज़्बात
-5-
हिन्दी में जब भी करें, अपने व्यक्त विचार
जो कहने की चाह है , निकलें वह उद्गार
-6-
भाषाओं में देश की , परम स्नेह सहकार
हिन्दी को सबसे मिला, माँ बहना सा प्यार
-7-
हर भाषा को देश की, माँ का आशीर्वाद
सबमें खुशबू वतन की , माटी का है स्वाद
-8-
भाषा कोई सीखिए , बढा लीजिए ज्ञान
निज भाषा ही आपको , देगी पर पहचान
-9-
निज भाषा की शान हैं , अलंकार ,रस , छंद
सज धज कर इनसे निकल, भाव बहें स्वछंद
-10-
भाषा मरहम तुल्य है , भर दे सारे घाव
सब कष्टों से तार दे , निज भाषा की नाव
-ओंम प्रकाश नौटियाल
बडौदा , गुजरात , मोबा. 9427345810
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
-----
आदरणीय आशुतोष कुमार
जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक
शुभकामनाओँ सहित ।
-----
* गीत *
दीपक अभी नहीं जल पाया ,
माँ के मन की आशा का ।
अभी अधूरा अभिनन्दन है ,
अपनी प्यारी भाषा का ।।
यों तो सिंहासन पर हमने
लाकर इसे बिठाया है ,
पर अपने ही हाथों से
विष प्याला इसे पिलाया है ,
टूट गया है कच्चा धागा
इसकी मन अभिलाषा का ।
अभी...........................(1)
बड़े अनूठे अक्षर अनुपम
अद्'भुत शक्ति भरे प्यारे ,
अनुस्वार लगते ही करते
ब्रह्मनाद मिलकर सारे ,
हर अक्षर है एक योगिनी
अंत न ज्ञान पिपासा का ।
अभी........................(2)
अब तक मान दिया है थोथा
फिर भी तो मुस्काते हैं ,
देख रहे दुर्दशा मौन हम
मन में नहीं लजाते हैं ,
दूर करो अँधियार आवरण
तोड़ो धुंध कुहासा का ।
अभी.....................(3)
छंद गीत कविता मल्हार का
अमृत सा जल पिलवायें ,
रसिया राग रागिनी के
व्यंजन मेवा फल खिलवायें ,
बहुत दिनों से दिया खिलौना
इसको मात्र दिलासा का ।
अभी........................(4)
-----
हिन्दी दिवस.....
हिन्दी
आज भी घूँघट में
डीजे की थाप पर
हर पल घुटती सी हैं
अपने ही देश में
अग्रेजी को
माई-वाप मानती हैं
पूरा देश
हिन्दी दिवस पर
उसके
आँसुओं पर मनुहार करता हैं
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समर्पित.........................
हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में.*******नवविधा--- ''वर्ण पिरामिड''****
[इसमे प्रथम पंक्ति में -एक ;द्वितीय में -दो ;तृतीया में- तीन; चतुर्थ में -चार; पंचम में -पांच; षष्ठम में- छः; और सप्तम में -सात वर्ण है ]
[1]
मैं
हिंदी
आन हूँ
भारत की
पहचान हूँ
बस अभिलाषी
आदर सम्मान की ...................
[2]
मैं
हिंदी
शान हूँ
अंग्रेजी से
परेशान हूँ
बस अभिलाषी
अपनों के प्यार की......................
[3]
मैं
हिंदी
मान हूँ
सदियों से
अभिमान हूँ
बस अभिलाषी
देश के सम्मान की ........................DR.SHIPRA SHILPI ..............
हिन्दी दिवस के अवसर पर गहमर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत :
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को सादर समर्पित ।
( साथ ही इस मंच के अन्य स्नेहिल एवं प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ : उनकी प्रतिक्रिया आमंत्रण के अनुरोध के संग ।)
हिन्दी दिवस मनाने का भाव अपनी जड़ों को सींचने का भाव है राष्ट्रीयता से जुड़ने का भाव है। भाव -भाषा को अपनाने का भाव है।
हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। संविधान सभा ने 14 सितम्बर , 1949 को एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी!
हिन्दी एक महत्त्वपूर्ण भाषा है। भारत के शिक्षा व्यवस्था में अंग्रेजी के बाद सबसे अधिक प्रयोग होता है हिन्दी का । यह भारत में व्यापक रूप में और विदेशों में सीमित रूप में बोली जाती है। विश्व में सबसे अधिक बोली जाने जाने वाली तीन भाषाओं में इसका स्थान है।
यह भारत के सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है और देश के अधिकांश प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाती है। प्राथमिक स्तर पर हिन्दी सभी हिन्दी प्रदेशों में मातृभाषा के रूप में , क्षेत्रीय भाषा के रूप में तथा प्रदेश की राजभाषा के रूप में पढ़ाई जाती है।
हिन्दी मात्र अपने मानक रूप तक ही सीमित नहीं है, अपितु हिन्दी भाषी प्रदेशों में उन्नीस बोलियाँ या उपभाषायें के रूप में भी बोली जाती है । आइये, हिन्दी दिवस के पुनीत अवसर पर हम इसकी जानकारी लेकर हिन्दी के प्रति अपने अनुराग को हम और अधिक संवर्द्धित करें ।
इन बोलियों का वर्गीकरण एवं क्षेत्रीयकरण यों है :
बोली क्षेत्र केन्द्र बिन्दु
1. बिहारी हिन्दी या मागघी हिन्दी
मगही गया, बिहार
मैथली दरभंगा, बिहार
भोजपुरी छपरा, सिवान (बिहार) , बलिया(उ.प्र.)या आस पास
के क्षेत्र
2. पूर्वी हिन्दी या अर्घमागघी हिन्दी
अवधी लखनऊ (उ.प्र.)
बघेली रीवां (म.प्र.)
छत्तीसगढ़ी रायपुर (छत्तीसगढ़)
3. पश्चिमी हिन्दी या माध्यमिक शौरसेनी हिन्दी (मध्यदेशी हिन्दी) बुन्देली छतरपुर, ( म.प्र,)
कन्नौजी कन्नौज (उ.प्र.)
ब्रजभाषा मथुरा (उ.प्र.)
कौरवी दिल्ली, मेरठ (उ.प्.)
हरियाणी (बांगरू) रोहतक (हरियाणा)
4. पहाड़ी हिन्दी या उत्तरी शौरसेनी हिन्दी
कुल्लई कुल्लू
गढ़वाली टिहरी ( उत्तराखंड)
कुमाऊँनी अल्मोड़ा
5. राजस्थानी हिन्दी या पश्चिमी शौरसेनी हिन्दी
जयपुरी जयपुर (राजस्थान)
निमाड़ी खंडवा (म.प्र.)
मालवी उज्जैन (म.प्र.)
मरवाड़ी जोधपुर (राजस्थान)
मौली राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्र
निसंशय हिन्दी एक जीवंत भाषा है , साथ ही उदार भी । इसने अपने अंदर अंग्रेजी, फारसी, उर्दु या देश के आंचलिक भाषाओं के अनेकानेक प्रचलित शब्दों को अपने अंक में आत्मसात अपने उदारमना होने का प्रमाण दिया है। समस्त भारत में विभिन्न स्तरों पर, विभिन्न रूपों में तथा विभिन्न उदेश्यों के साथ यह पढ़ाई जाती है। विदेशों में भी – प्राय: सभी देशों में अब इसके पढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है।
आइये आज हिन्दी दिवस के महान अवसर पर हम अपने दिल को टटोल कर देखें कि हिन्दी के प्रति इसमें कितना नेह, स्नेह तथा अनुराग अक्षुण्ण है। साथ ही दृढ़ संकल्प के साथ इसके निरंतर उत्थान और विकास में अपना यथेष्ट योगदान देने का आज संकल्प लें।
जय हिन्दी , जय भारत एवं जय माँ भारती ।
हर पल घुटती सी हैं
अपने ही देश में
अग्रेजी को
माई-वाप मानती हैं
पूरा देश
हिन्दी दिवस पर
उसके
आँसुओं पर मनुहार करता हैं
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समर्पित.........................
हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में.*******नवविधा--- ''वर्ण पिरामिड''****
[इसमे प्रथम पंक्ति में -एक ;द्वितीय में -दो ;तृतीया में- तीन; चतुर्थ में -चार; पंचम में -पांच; षष्ठम में- छः; और सप्तम में -सात वर्ण है ]
[1]
मैं
हिंदी
आन हूँ
भारत की
पहचान हूँ
बस अभिलाषी
आदर सम्मान की ...................
[2]
मैं
हिंदी
शान हूँ
अंग्रेजी से
परेशान हूँ
बस अभिलाषी
अपनों के प्यार की......................
[3]
मैं
हिंदी
मान हूँ
सदियों से
अभिमान हूँ
बस अभिलाषी
देश के सम्मान की ........................DR.SHIPRA SHILPI ..............
हिन्दी दिवस के अवसर पर गहमर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत :
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को सादर समर्पित ।
( साथ ही इस मंच के अन्य स्नेहिल एवं प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ : उनकी प्रतिक्रिया आमंत्रण के अनुरोध के संग ।)
हिन्दी दिवस मनाने का भाव अपनी जड़ों को सींचने का भाव है राष्ट्रीयता से जुड़ने का भाव है। भाव -भाषा को अपनाने का भाव है।
हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। संविधान सभा ने 14 सितम्बर , 1949 को एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी!
हिन्दी एक महत्त्वपूर्ण भाषा है। भारत के शिक्षा व्यवस्था में अंग्रेजी के बाद सबसे अधिक प्रयोग होता है हिन्दी का । यह भारत में व्यापक रूप में और विदेशों में सीमित रूप में बोली जाती है। विश्व में सबसे अधिक बोली जाने जाने वाली तीन भाषाओं में इसका स्थान है।
यह भारत के सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है और देश के अधिकांश प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाती है। प्राथमिक स्तर पर हिन्दी सभी हिन्दी प्रदेशों में मातृभाषा के रूप में , क्षेत्रीय भाषा के रूप में तथा प्रदेश की राजभाषा के रूप में पढ़ाई जाती है।
हिन्दी मात्र अपने मानक रूप तक ही सीमित नहीं है, अपितु हिन्दी भाषी प्रदेशों में उन्नीस बोलियाँ या उपभाषायें के रूप में भी बोली जाती है । आइये, हिन्दी दिवस के पुनीत अवसर पर हम इसकी जानकारी लेकर हिन्दी के प्रति अपने अनुराग को हम और अधिक संवर्द्धित करें ।
इन बोलियों का वर्गीकरण एवं क्षेत्रीयकरण यों है :
बोली क्षेत्र केन्द्र बिन्दु
1. बिहारी हिन्दी या मागघी हिन्दी
मगही गया, बिहार
मैथली दरभंगा, बिहार
भोजपुरी छपरा, सिवान (बिहार) , बलिया(उ.प्र.)या आस पास
के क्षेत्र
2. पूर्वी हिन्दी या अर्घमागघी हिन्दी
अवधी लखनऊ (उ.प्र.)
बघेली रीवां (म.प्र.)
छत्तीसगढ़ी रायपुर (छत्तीसगढ़)
3. पश्चिमी हिन्दी या माध्यमिक शौरसेनी हिन्दी (मध्यदेशी हिन्दी) बुन्देली छतरपुर, ( म.प्र,)
कन्नौजी कन्नौज (उ.प्र.)
ब्रजभाषा मथुरा (उ.प्र.)
कौरवी दिल्ली, मेरठ (उ.प्.)
हरियाणी (बांगरू) रोहतक (हरियाणा)
4. पहाड़ी हिन्दी या उत्तरी शौरसेनी हिन्दी
कुल्लई कुल्लू
गढ़वाली टिहरी ( उत्तराखंड)
कुमाऊँनी अल्मोड़ा
5. राजस्थानी हिन्दी या पश्चिमी शौरसेनी हिन्दी
जयपुरी जयपुर (राजस्थान)
निमाड़ी खंडवा (म.प्र.)
मालवी उज्जैन (म.प्र.)
मरवाड़ी जोधपुर (राजस्थान)
मौली राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्र
निसंशय हिन्दी एक जीवंत भाषा है , साथ ही उदार भी । इसने अपने अंदर अंग्रेजी, फारसी, उर्दु या देश के आंचलिक भाषाओं के अनेकानेक प्रचलित शब्दों को अपने अंक में आत्मसात अपने उदारमना होने का प्रमाण दिया है। समस्त भारत में विभिन्न स्तरों पर, विभिन्न रूपों में तथा विभिन्न उदेश्यों के साथ यह पढ़ाई जाती है। विदेशों में भी – प्राय: सभी देशों में अब इसके पढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है।
आइये आज हिन्दी दिवस के महान अवसर पर हम अपने दिल को टटोल कर देखें कि हिन्दी के प्रति इसमें कितना नेह, स्नेह तथा अनुराग अक्षुण्ण है। साथ ही दृढ़ संकल्प के साथ इसके निरंतर उत्थान और विकास में अपना यथेष्ट योगदान देने का आज संकल्प लें।
जय हिन्दी , जय भारत एवं जय माँ भारती ।