Monday, 15 September 2014

हिन्‍दी दिवस पर विशेष

हिन्‍दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ --
हिन्दू हैं हम हिंदी हमारी है पहचान
सर्व धर्म पल्ल्वित वो वतन है हिंदुस्तान
हिंदी से अर्जित कर जो अंग्रेजी को जीते हैं
माँ भारती कैसे करे उन पर अभिमान ---
मँजु शर्मा १४-०९-२०१४
हिंदी -दिवस पर आ .आशतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार को समर्पित रचना .
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घनाक्षरी
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हिन्दी बिन्दी मेरी माता ,भारती के भाल की है .
माँ भारती के भाल पे ,----------इसे चमकाइये .
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चाहे हों गरीब लोग ,-------चाहे पूंजीपति होय.
जन -मन अंग्रेजी की ,-------- मार से बचाइये.
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फले -फूले हिन्दी रूपी ,-----चमन हमारा यह .
भारत के गौरव का ,------मान भी बढाइये.
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भारत अखंड मेरा ,------खंड -खंड हो न जाये .
भाषा विवाद न अब ,---------और सुलगाइये.
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------------भारती जैन --------------------------
--------------१४-९-२०१४ ---------------------------
हिन्दी दिवस पर बिशेष कार्यक्रम के अंतर्गत।
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को बधाई के साथ एक रचना समर्पित।
मुक्तक -- रविवार (14-09-2014)
अपने हाथो में थामे कलम, सभी साहित्यकार है
प्रहरी हिन्दी भाषा के बने , देश के कलमकार है
रक्षा , सेवा तन मन सब करें, चमका हिन्दी नाम तब
हिन्दी भाषा का गुणगान कर, करे सभी जयकार है
पवन बत्तरा
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ "एक कुण्डलियाँ " सादर समर्पित हैं!
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हिंदी को सम्मान दो ,हिंदी को दो मान ,
हिंदी अपने देश की,है सच्ची पहचान ,
है सच्ची पहचान ,देश को जोड़े हरदम ,
जग में उसकी धूम ,देख हिंदी की दमखम ,
सजी भाल पर खूब ,माँ भारती की बिंदी ,
हर भाषा से तेज ,हमारी प्यारी हिंदी।
---महेंद्र वर्मा "धीर "
हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत
आदरणीय Ashutosh Kumar जी को हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई के साथ सादर समर्पित तीन मुक्तक
1
इंसान हर पल कई इम्तहान से गुजरता है
किसी मे असफल तो कहीं पर सुधरता है
जीवन सबसे बड़ी परीक्षा नदी हर शक्स की
जीवंटता से लबरेज ही पार उतरता है
2
बरसे घन झिमिर झिमिर धरा रूप खिलता है
प्यासे खग विहग तृप्त लोप मानुष विकलता है
चहूँ और हरियाली खेतो में उपजे सुधा रस
देख कर फलती फसल को धरती पुत्र निखरता है
3
कुदरत का तोहफा अनमोल है बसंत ऋतु
ऋतुओ का राजा धरा श्रंगार है बसंत ऋतु
नव कोंपल आगाज पतझर की हुई विदाई
वृक्ष सघन सुमन सौरभ समीरण बसंत ऋतु
*********************************************शान्ति पुरोहित
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्‍ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समरर्पि‍त..
मातृ भाषा का जब तक न सम्मान होगा
अपने देश में ही जिसका अपमान होगा
घर घर बोली जाये हिंदी को तब ही तो
इसका *देश *विदेश में खूब मान होगा !!
** आलोक **

हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत
आदरणीय Ashutosh Kumar जी को हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई के साथ सादर समर्पित एक रचना ....
विधा - चोका
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हमारी हिंदी
मीठी मृदुल बोली
भावों से भरी
अलंकारों से सजी
बहती ऐसे
गंगा की धार जैसे
हिंदी महान
हिंदुओं की है आन
हिंद की शान
साहित्य की जननी
हिंद की बेटी
शारदे का आशीष
क्यूँ उपेक्षित
अपने ही आंगन
करो संकल्प
हिंदी अपनायेंगे
विश्व स्तर पे
इसे आगे लायेंगे
सम्मान दिलाएंगे
~रमा वर्मा~ (१४-९-१४)
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्‍ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समरर्पि‍त - हिन्दी पर
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तीन मुक्तक ---- गिरिराज भंडारी
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अपनी माँ को माँ कहते शर्माते हैं
और गैर को आंटी कह मुसकाते हैं
हिन्दी अपनी माँ की भाषा है यारों
क्यों इसको माँ कहने से डर जाते हैं
जितने हिन्दी का झंडा ले चलते हैं
उनके बच्चे अंग्रेजी में पढ़ते हैं
ऐसे दोहरे माप दंड से क्या होगा
मुंह से हिन्दी हिन्दी ही सब कहते हैं
जब अंग्रेजी को परदेशी समझेंगे
तब हिन्दी को अपनी भाषा मानेंगे
तब हिन्दी का मान सही कर पायेंगे
और तभी हिन्दी भाषी कहलायेंगे
***********************************
आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्‍ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समर्पि‍त - हिन्दी पर
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती ---प्यारी हिंदी मेरी !
मान बढ़ाती हम अभिमान हैं करते प्यारी हिंदी मेरी !!
सब भाषा ...................
गुलदस्ते के--- सारे फूलों में फूल वो गुलाब का !
सपनों को रोज़ सजाए पर बन कर- सुर्खाब का !
घुल जाती यूँ मन में ऐसे मिश्री की डली हो जैसे …
भौंरे आकर गुण गान सुनाते ऐसी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती…………
दीपावली के दीपों में जगमग प्रकाश होता है !
भाव सजा के कवि कविता के मोती पोता है !
भाव सजाते चलते शब्द ज्वाजल्यमान हों जैसे …
नभ के चन्दा सूरज चमकते ऐसी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती …………

बुलबुल जैसे गाये तराना कोयल कुहूकती जाए !
झरना झर झर नदिया कलकल कह बहती जाए !
हिंदी भाषा सौन्दर्यवान है अक्षर मोती जैसे ....
ज्ञान जगाती पाठ पढ़ाती प्यारी हिंदी मेरी !
सब भाषाओं की माँ है सरस्वती प्यारी हिंदी मेरी !!
मान बढ़ाती………… ''तनु ''
हिन्दी दिवस पर बिशेष कार्यक्रम के अंतर्गत।
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को बधाई के साथ एक रचना समर्पित।
बने स्वभाव.. मृदुल जल वैसी
भाव न दे...... वो भाषा कैसी
सबको देखा बोल बुलाकर
कोई नहीं है.......हिन्दी जैसी
विनय बाली सिंह*******

श्री आशुतोष कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार को समर्पित
शीर्षक --हिन्दी
हिदी दिवस पर शुभकामनाओ सहित
मत समझो केवल तुम भाषा ये सुरसरि कालिंदी
चमके ये साहित्य जगत में ज्यों ललाट पर बिंदी
देकर नित सम्मान इसे तुम जन जन हिये बसाओ
भारत की पहचान कराती जग को भाषा हिन्दी
.............................................गांधी डीडवाना

हिन्‍दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं के साथ "दस दोहे" सादर समर्पित हैं!
-1-
भाषा जोड़ सके वही , जिसमें देशज गंध
परभाषा से ना मिले , ममता का आनंद ।
-2
तब होगा इस देश का , दुनियाँ में उत्कर्ष
जब निज भाषा का करें, आदर सभी सहर्ष
-3-
जिस भाषा मे सोचते , उसमें हो संवाद
तभी आपकी सोच का , हो सच्चा अनुवाद
-4-
हिन्दी हिन्दी में कहे, एक पते की बात
निज भाषा में हैं लिखे , अंतस के जज़्बात
-5-
हिन्दी में जब भी करें, अपने व्यक्त विचार
जो कहने की चाह है , निकलें वह उद्गार
-6-
भाषाओं में देश की , परम स्नेह सहकार
हिन्दी को सबसे मिला, माँ बहना सा प्यार
-7-
हर भाषा को देश की, माँ का आशीर्वाद
सबमें खुशबू वतन की , माटी का है स्वाद
-8-
भाषा कोई सीखिए , बढा लीजिए ज्ञान
निज भाषा ही आपको , देगी पर पहचान
-9-
निज भाषा की शान हैं , अलंकार ,रस , छंद
सज धज कर इनसे निकल, भाव बहें स्वछंद
-10-
भाषा मरहम तुल्य है , भर दे सारे घाव
सब कष्टों से तार दे , निज भाषा की नाव
-ओंम प्रकाश नौटियाल
बडौदा , गुजरात , मोबा. 9427345810

हिन्दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
-----
आदरणीय आशुतोष कुमार
जी को हिन्दी दिवस पर हार्दिक
शुभकामनाओँ सहित ।
-----
* गीत *
दीपक अभी नहीं जल पाया ,
माँ के मन की आशा का ।
अभी अधूरा अभिनन्दन है ,
अपनी प्यारी भाषा का ।।
यों तो सिंहासन पर हमने
लाकर इसे बिठाया है ,
पर अपने ही हाथों से
विष प्याला इसे पिलाया है ,
टूट गया है कच्चा धागा
इसकी मन अभिलाषा का ।
अभी...........................(1)
बड़े अनूठे अक्षर अनुपम
अद्'भुत शक्ति भरे प्यारे ,
अनुस्वार लगते ही करते
ब्रह्मनाद मिलकर सारे ,
हर अक्षर है एक योगिनी
अंत न ज्ञान पिपासा का ।
अभी........................(2)
अब तक मान दिया है थोथा
फिर भी तो मुस्काते हैं ,
देख रहे दुर्दशा मौन हम
मन में नहीं लजाते हैं ,
दूर करो अँधियार आवरण
तोड़ो धुंध कुहासा का ।
अभी.....................(3)
छंद गीत कविता मल्हार का
अमृत सा जल पिलवायें ,
रसिया राग रागिनी के
व्यंजन मेवा फल खिलवायें ,
बहुत दिनों से दिया खिलौना
इसको मात्र दिलासा का ।
अभी........................(4)
-----
हिन्दी दिवस.....
हिन्दी
आज भी घूँघट में
डीजे की थाप पर
हर पल घुटती सी हैं
अपने ही देश में
अग्रेजी को
माई-वाप मानती हैं
पूरा देश
हिन्दी दिवस पर
उसके
आँसुओं पर मनुहार करता हैं

आदरणीय आशुतोष कुमार जी वरिष्‍ठ पत्रकार रॉंची झारखंड को समर्पि‍त.........................
हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में.*******नवविधा--- ''वर्ण पिरामिड''****
[इसमे प्रथम पंक्ति में -एक ;द्वितीय में -दो ;तृतीया में- तीन; चतुर्थ में -चार; पंचम में -पांच; षष्ठम में- छः; और सप्तम में -सात वर्ण है ]
[1]
मैं
हिंदी
आन हूँ
भारत की
पहचान हूँ
बस अभिलाषी
आदर सम्मान की ...................
[2]
मैं
हिंदी
शान हूँ
अंग्रेजी से
परेशान हूँ
बस अभिलाषी
अपनों के प्यार की......................
[3]
मैं
हिंदी
मान हूँ
सदियों से
अभिमान हूँ
बस अभिलाषी
देश के सम्मान की ........................DR.SHIPRA SHILPI ..............


हिन्‍दी दिवस के अवसर पर गहमर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा
हिन्‍दी दिवस पर विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत :
आदरणीय आशुतोष कुमार जी को सादर समर्पित ।
( साथ ही इस मंच के अन्य स्नेहिल एवं प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ : उनकी प्रतिक्रिया आमंत्रण के अनुरोध के संग ।)
हिन्दी दिवस मनाने का भाव अपनी जड़ों को सींचने का भाव है राष्ट्रीयता से जुड़ने का भाव है। भाव -भाषा को अपनाने का भाव है।
हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। संविधान सभा ने 14 सितम्बर , 1949 को एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी!
हिन्दी एक महत्त्वपूर्ण भाषा है। भारत के शिक्षा व्यवस्था में अंग्रेजी के बाद सबसे अधिक प्रयोग होता है हिन्दी का । यह भारत में व्यापक रूप में और विदेशों में सीमित रूप में बोली जाती है। विश्व में सबसे अधिक बोली जाने जाने वाली तीन भाषाओं में इसका स्थान है।
यह भारत के सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है और देश के अधिकांश प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाती है। प्राथमिक स्तर पर हिन्दी सभी हिन्दी प्रदेशों में मातृभाषा के रूप में , क्षेत्रीय भाषा के रूप में तथा प्रदेश की राजभाषा के रूप में पढ़ाई जाती है।
हिन्दी मात्र अपने मानक रूप तक ही सीमित नहीं है, अपितु हिन्दी भाषी प्रदेशों में उन्नीस बोलियाँ या उपभाषायें के रूप में भी बोली जाती है । आइये, हिन्दी दिवस के पुनीत अवसर पर हम इसकी जानकारी लेकर हिन्दी के प्रति अपने अनुराग को हम और अधिक संवर्द्धित करें ।
इन बोलियों का वर्गीकरण एवं क्षेत्रीयकरण यों है :
बोली क्षेत्र केन्द्र बिन्दु
1. बिहारी हिन्दी या मागघी हिन्दी
मगही गया, बिहार
मैथली दरभंगा, बिहार
भोजपुरी छपरा, सिवान (बिहार) , बलिया(उ.प्र.)या आस पास
के क्षेत्र
2. पूर्वी हिन्दी या अर्घमागघी हिन्दी
अवधी लखनऊ (उ.प्र.)
बघेली रीवां (म.प्र.)
छत्तीसगढ़ी रायपुर (छत्तीसगढ़)
3. पश्चिमी हिन्दी या माध्यमिक शौरसेनी हिन्दी (मध्यदेशी हिन्दी) बुन्देली छतरपुर, ( म.प्र,)
कन्नौजी कन्नौज (उ.प्र.)
ब्रजभाषा मथुरा (उ.प्र.)
कौरवी दिल्ली, मेरठ (उ.प्.)
हरियाणी (बांगरू) रोहतक (हरियाणा)
4. पहाड़ी हिन्दी या उत्तरी शौरसेनी हिन्दी
कुल्लई कुल्लू
गढ़वाली टिहरी ( उत्तराखंड)
कुमाऊँनी अल्मोड़ा
5. राजस्थानी हिन्दी या पश्चिमी शौरसेनी हिन्दी
जयपुरी जयपुर (राजस्थान)
निमाड़ी खंडवा (म.प्र.)
मालवी उज्जैन (म.प्र.)
मरवाड़ी जोधपुर (राजस्थान)
मौली राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्र
निसंशय हिन्दी एक जीवंत भाषा है , साथ ही उदार भी । इसने अपने अंदर अंग्रेजी, फारसी, उर्दु या देश के आंचलिक भाषाओं के अनेकानेक प्रचलित शब्दों को अपने अंक में आत्मसात अपने उदारमना होने का प्रमाण दिया है। समस्त भारत में विभिन्न स्तरों पर, विभिन्न रूपों में तथा विभिन्न उदेश्यों के साथ यह पढ़ाई जाती है। विदेशों में भी – प्राय: सभी देशों में अब इसके पढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है।
आइये आज हिन्दी दिवस के महान अवसर पर हम अपने दिल को टटोल कर देखें कि हिन्दी के प्रति इसमें कितना नेह, स्नेह तथा अनुराग अक्षुण्ण है। साथ ही दृढ़ संकल्प के साथ इसके निरंतर उत्थान और विकास में अपना यथेष्ट योगदान देने का आज संकल्प लें।
जय हिन्दी , जय भारत एवं जय माँ भारती ।





गोपाल राम गहमरी साहित्‍रू समारोह 29 शिल्‍प औश्र शिल्‍पी अध्‍यक्ष करन एस पी जी 11 सितम्‍बर

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 29
समारोह अध्यक्ष आदरणीय श्री करण सिंह परिहार जी के सन्मुख
कार्यक्रम - शिल्प और शिल्पी
बिधा - गजल,
बहर - 2122, 2122, 2122, 212
गालगागा,गालगागा,गालगागा,गालगा
काफिया- ए
रदीफ़- देखा करो
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हम जले है रात दिन किस आह से देखा करो ।
ख़ाक करके रख दिया इक चाह ने देखा करो ।।
जो मिले हो अब हमे तो बात ये भी जान लों ।
खो न जाये हम कही इस राह में देखा करो ।।
चाँद से ये पूछ लो क्यों चांदनी को गम दिया ।
दूर करके रख दिया है, ताब से देखा करो ।।
जो फलक पे लिख दिया इक नाम हमने यार का ।
क्यों मचे है शोर फिर इस नाम पे देखा करो ।।
देखकर अब तुम हमे छुपने लगे हो ओट में ।
दिल हमारा लग गया फिर जाम से देखा करो ।।
कोशिशे कर ली बहुत ये दाग ना देखे कोई ।
पर हमे रुसवा किया वो आप थे देखा करो ।।
जब मिलो उनसे कभी तो अर्ज मेरी मान लो।
वो विनय का प्यार है आदाब से देखा करो।।
विनय बाली सिंह**********
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
सम्‍पूर्ण शिल्‍प परिचय सहित गीत/गजल/दोहा/छंद/3मुक्‍तक/3 कहमुकरी/
दिनॉंक--11 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष ---आदरणीय Karan Sp जी को सादर समर्पित
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विधा - गज़ल
काफिया - आ
रदीफ - कुछ और है
मापनी - २१२२ / २१२२ / २१२२ / २१२
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दिल कहे कुछ पर जुबां से बोलता कुछ और है |
हो गया है दिल दिवाना या हुआ कुछ और है ||
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जी रहें या मर रहें हैं कुछ नहीं हमको पता |
चाहिये कुछ ओर पर ये माँगता कुछ और है ||
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हसरतें कुछ भी नहीं थी पर हमें सब कुछ मिला |
या खुदा है महरबां या माजरा कुछ और है ||
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ये न पूछो इश्क हमपर क्या कयामत ढा रहा |
ये सजा है इश्क की या इंतिहा कुछ और है ||
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जी रहें थे जिंदगी हम जीत की उम्मीद में |
मंजिलें ही दूर थी या फासला कुछ और है ||
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जिंदगी जिनकी निराली मौत भी होगी हसीं |
लग रहा हमको खुदा का फैसला कुछ और है ||
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~रमा वर्मा~
गोपाल राम गमहरी समारोह- 29
कार्यक्रम- शिल्प और शिल्पी
विधा- ग़ज़ल
मापनी- फाइलुन फाइलुन मुफाईलुन (प्रत्येक मिसरे मेँ मात्रा पतन)
काफ़िया- आर
रदीफ़- पाया है
समारोह अध्यक्ष माननीय करन यस पी जी के सम्मान मेँ सादर प्रस्तुत-
..........
जबसे तेरा ये प्यार पाया है
दिल ने असली करार पाया है
जाने कैसा सूरूर है छाया
जबसे तेरा दीदार पाया है
जिन्दगी जैसे खिल गई मेरी
जबसे बाहोँ का हार पाया है
जब भी रहता वो दूर नज़रोँ से
मैँनै खुद को बीमार पाया है
पहला कहते हैँ प्यार हम जिसको
बोलो कोई बिसार पाया है
जो था सपना वो आजकल देखो
मैने वो बार बार पाया है
दिल मेँ जबसे "आकाश" रहता वो
मैँने ग़म भी हजार पाया है
ग़ज़ल- आकाश महेशपुरी
पता-
वकील कुशवाहा उर्फ आकाश महेशपुरी
ग्रा.- महेशपुर
पो.- कुबेरस्थान
जि.- कुशीनगर
उत्तर प्रदेश
09919080399

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
सम्‍पूर्ण शिल्‍प परिचय सहित गीत/गजल/दोहा/छंद/3मुक्‍तक/3 कहमुकरी/
दिनॉंक--11 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष ---आदरणीय करण एस पी जी
विधा-ग़ज़ल
बहर-22 22 22 2
रदीफ - पिता
काफिया- आर
****पिता****
माँ के हर श्रृंगार पिता।
बच्चों के संसार पिता।।
माँ आँगन की तुलसी है।
घर के वंदनवार पिता।।
घर की नीव सरीखी माँ।
घर की छत-दीवार पिता।।
माँ कर्त्तव्य बताती है।
देते है अधिकार पिता।।
बच्चों की पालक है माँ।
घर के पालनहार पिता।।
माँ सपने बुनती रहती।
करते हैं साकार पिता।।
आज विदा करके बेटी।
रोये पहली बार पिता।।
बच्चों की हर बाधा से।
लड़ने को तैयार पिता।।
बच्चे खुशियां पाएं तो।
कर दें जान निसार पिता।।
घर को जोड़े रखने में।
टूटे कितनी बार पिता।।
घर का भार उठाते थे।
अब हैं घर के भार पिता।।
बंटवारे ने बाँट दिए-
बूढ़ी माँ-लाचार पिता।।
----डॉ.कमलेश द्विवेदी
----मो.09415474674

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
सम्‍पूर्ण शिल्‍प परिचय सहित गीत/गजल/दोहा/छंद/3मुक्‍तक/3 कहमुकरी/
दिनॉंक--11 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष ---आदरणीय करण एस पी जी जी को सादर समर्पित
गीत रचना - मेरे लिए
************************
मुखड़े का तुकांत--लिए
अंतरा तुकांत क्रमश:--रही मैं , आमिनी, अंबर मे
मुखड़े का मात्रा भार ---२५ .
अंतरा मात्रा भार -----२६ .
----------------
फूल चम्पा के तुमने बिछाये मेरे लिए
प्रेम गीत तुमने गुनगुनाये मेरे लिए ।
तुम्हारे प्रेम की बारिश मे भीगी रही मैं
तुम्हारे मधुर आगोश मे सोयी रही मैं
प्रिय तुम ऐसा मधुमास लाये मेरे लिए । [1]
अविस्मृत है वो रुपहली मधुर यामिनी
तनिक स्पर्श से चमकती थी वो दामिनी
प्रिय तुम ऐसा परिहास लाये मेरे लिए । [2]
ज्यों दिवाकर सदा मुसकाते रहते अंबर मे
तुम्हारे प्रेम की रागिनियाँ धरती अंबर मे
प्रिय तुम ऐसा प्रेम उजास लाये मेरे लिए । [३]
फूल चम्पा के तुमने बिछाये मेरे लिए
प्रेम गीत तुमने गुनगुनाये मेरे लिए ॥...............अन्नपूर्णा बाजपेई ‘अंजु’

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
समारोह अध्‍यक्ष --आदरणीय करण सिंह परिहार को समरर्पित
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
विधा ग़ज़ल --
बहर 1222 1222 1222 1222
रदीफ ---जाये
काफिया --आ
हमारे दर्द को दुनियाँ तमाशो में न गा जाये
बजा ताली सभी झूमें हमारा दर्द भा जाये
न आये है किनारे पर अभी ठहरा समुन्‍दर है।
बड़ी खामोश लहरे हैं कहीं तूफाँ न आ जाये।।
सहेगें जुल्‍म अब कितना बड़ा जालिम हुआ हाकिम।
पड़ी थी लाश सड़को पे कफन वो बेच खा जाये।।
सभालो अब वतन अपना तबाही का दिखे मंजर
घरों में आज खुशियाँ है कहीं मातम न छा जाये
जला कर आस का दीपक न जाओ छोड़ कर यारो
कुचलने का हमारा सर न दुश्‍मन मौका पा जाये
अखंड गहमरी

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
समारोह अध्‍यक्ष --आदरणीय करण सिंह परिहार को समरर्पित
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
विद्या --गीतिका
मिटटी सने बच्चे भूखे बदन अध् नंगा है
रोटी को हुए फुटपाथी मन चंगा है
पिता के सहारे के अरमान बदरंग हुए
माता की आँखों से बहती अश्रु गंगा है
राखी के टूटे हुए धागे बहन की टूटी आशा
अभाव की आंधी व्यथा का गोरख धंधा है
पेट के लिए घर छोडा दर -दर भटकते हुए
भूखे पेट सोय दुनिया बहु रंगा है
हाथ फैलाते दर पर रोटी के लिए
दे उसका भला हमारी रक्षक माँ गंगा है
शान्ति पुरोहित

गोपालराम गहमरी ,साहित्य समारोह -२९
कार्यक्रम अध्यक्ष --करण सिंह परिहार को समर्पित .
कार्यक्रम -शिल्प और शिल्पी '
विधा --गीत ----( स्वरचित )
मुखड़े का तुकांत-- ईत.
अंतरा तुकांत क्रमश:--ओती,आरा ,ऊरी.
मुखड़े का मात्रा भार ---२७ .
अंतरा मात्रा भार -----२६ .(१६-१० पर यति )
-------------------------------------------------------------------
प्रतिपल सोच रही हूँ जन्मे ,अमर प्रेम का गीत .
जिसको मिल जाये मोहन की, मुरली का संगीत .
बहुत कठिन अनुभूति प्रेम की ,
सहज नही होती .
बड़े जतन से पलता है ज्यों ,
सीपी में मोती .
प्रेमाराधन करूँ प्रेम से ,समझ प्रेम की रीत .
जिसको मिल जाये मोहन की ,मुरली का संगीत .
हिमगिरि पिघले तब बहती ज्यों ,
निर्मल जल धारा .
दर्द आँसुओं में ढलकर त्यों ,
गीत बने प्यारा .
गीत आत्म चिंतन -मंथन से ,निकला है नवनीत .
जिसको मिल जाए मोहन की ,मुरली का संगीत .
संभव नहीं प्रेम की कोई
परिभाषा पूरी .
प्रेम पराकाष्ठा दोनों ही ,
मिलन और दूरी .
किसकी लिख दे हार ' भारती ', किसकी लिखदे जीत .
जिसको मिल जाए मोहन की ,मुरली का संगीत .
*****************************************************
-------------------------भारती जैन ---------११-९ २०१४ -
-----------------------मोरेना( म. प्र. )

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-२९.
प्रथम चरण -शिल्प और शिल्पी .
कार्यक्रम. प्रमुख सम्मानित करन सिंह परिहार जी के सम्मुख. प्रस्तुत
विधा-ग़जल
मापनी-२१२ २१२ २१२ २१२..
काफ़िया-इयाँ
रदीफ़- साथ थीं
* * * * *
डूबता मै गया, कश्तियाँ साथ थीं !
घर जलाते रहे, बस्तियाँ साथ थीं!
झोपड़ी कर रही थी,रहम की दुआ!
जब उजाड़ी गयी,हस्तियाँ साथ थीं!
एक दिन ज़िंदगी,ही कहर ढा गयी!
वो हवा जो चली,आँधियाँ साथ थीं!
जानता कुछ नही,आज नादान हूँ!
कापियाँ अधलिखी, तख्तियाँ साथ थीं!
देखता मै रहा,साँवली गोरियाँ!
हो गया था बड़ा,मस्तियाँ साथ थीं!
आदमी है मरा,साथ अरमान के!
ज़िंदगी भर वही,फब्तियाँ साथ थीं!
आरज़ू है तपन की,आज कल खुश रहें!
आखिरी मे हया,गल्तियाँ साथ थीं !!!

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
सम्‍पूर्ण शिल्‍प परिचय सहित गीत/गजल/दोहा/छंद/3मुक्‍तक/3 कहमुकरी/
दिनॉंक--11 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष ---आदरणीय करण एस पी जी को सादर समर्पित
विधा गीत
==============================================
प्राकर्तिक आपदाएं जब भी ज़मीं पर आती है....!
आदमी के अहं को तिनके सा बहा ले जाती हैं....!
ये जाति-पांति धर्म से भी ऊपर उठ जातीं हैं....!
सितम की ये दास्ताँ दिलों पर लिख जातीं हैं....!
प्रकर्ति जब भी हमें,अपना रोद्र रूप दिखाती है ...!
पैरों तले से हमारी,ज़मीन ही खिसक जातीं है....!
ये अमीरी-गरीबी पल भर में मिट जातीं है ....!
जब विपदा में ये भूख पेट में सिमट जातीं है ....
आपदाएं इंसान को जोड़ने की कला सिखाती हैं ...!
भेद-भाव भुला कर ये परस्पर सौहाद्र बढ़ाती हैं...!
क़तरा क़तरा बिखर रहा है,धरणी सम्हल न पाती है
जल थल अब एक हुए हैं,जन्नत,जहन्नुम बन जाती है
कब तक बांटोगे भारत माँ को,अब उसकी जलती छाती है
प्रकर्ति से खिलवाड़ न करना,"सतोष' वो नहीं सह पाती है...

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२९
कार्यक्रम -शिल्प और शिल्पी
विधा -हिंदी ग़ज़ल
अध्‍यक्ष ---आदरणीय करण एस पी जी
रदीफ़ =कितने दिन
लेखन विधा =गागा गागा गागा गागा (सम मात्रिक )
हे मानव इस जीवन का तो , आधार रहेगा कितने दिन
इस तन में चलतीं साँसों का ,फिर तार रहेंगा कितने दिन
धन- माल कमाया हैं तूनें ,संसार बसाया भी तूनें
सब खाली कर ही जायेंगें ,अधिकार रहेगा कितने दिन
तुम मटक -मटक कर चलतें हों ,किस मद में फूलें फिरते हो
मदहोश हुयें तुम घूम रहें ,यह वार रहेंगा कितने दिन
जब ज्ञान अधूरा तुम लेकर ,खुद ज्ञानी बहुत कहते हो
झूठी पोथी को तू पढ़कर ,गुलजार रहेगा कितने दिन
मात -पिता या घरनी होगी ,बहन सहित सुत होगा भाई
अपना कहने वालो का तो ,यह प्यार रहेगा कितने दिन
लख चौरासी जीवन लेकर ,तू भटक -भटक कर आया हैं
इस नाशवान दुनियाँ का तू ,आधार रहेगा कितने दिन
काल निरंजन की माया से,जब तीनों लोक पसारा हैं
महाकाल से छल तुम करतें ,स्वाविकार रहेगा कितने दिन
इतना खुद तो सोच सकों तो ,थी नाश हुयी रावण नगरी
दम्भ लियें यह घूम रहें हो ,हुंकार रहेगा कितने दिन
सुरेश कुमार उत्साही
९९१९७१०१०६६१

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
विधा- ग़ज़ल
मापनी- 2122 1212 22
काफिया- आ
रदीफ़- देगा
अध्‍यक्ष ---आदरणीय करण एस पी जी को सादर समर्पित
इश्क को गर कोई हवा देगा
आग दरिया में भी लगा देगा
चांदनी भी हसद से देखेगी
अपना चिल्मन वो गर हटा देगा
जान देने की बात करता है
वो यक़ीनन मुझे दगा देगा
सब्र मत आजमा तू अब मेरा
बाँध टूटा तो सब मिटा देगा
नफरतें, बद्दुआ या दिल अपना
देखना है मुझे तू क्या देगा
कोई मुझ में हुआ है यूं 'पागल'
तेरी खातिर मुझे भुला देगा...
नितिन सिकरवार 'पागल'

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
सम्‍पूर्ण शिल्‍प परिचय सहित गीत/गजल/दोहा/छंद/3मुक्‍तक/3 कहमुकरी/
दिनॉंक--11 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष ---आदरणीय करण एस पी जी को सादर समर्पित ...
------------------------------------
विधा - ग़ज़ल
२१२२/१२१२/२२
फ़ायलातुन -मफ़ाइलुन -फेलुन
काफिया - आया
रदीफ़ - है
जिंदगी ने बहुत सताया है !
खूब रोना हमें रूलाया है !!
हम कभी चैन से न रह पाये !
नाच हरदम हमें नचाया है !!
रो रहे है चला नहीं धंधा !
काम हमने नहीं जमाया है !!
सादगी से रहू भला कैसे !
जिस्त को दाव पर लगाया है !!
तोहफा भी कबूल करता में !
दाम हमने नहीं कमाया है !!
आज सब से नजर चुराते क्यों !
झूठ को साच पर मिलाया है !!
** आलोक **

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
सम्‍पूर्ण शिल्‍प परिचय सहित गीत/गजल/दोहा/छंद/3मुक्‍तक/3 कहमुकरी/
दिनॉंक--11 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष ---आदरणीय करण एस पी जी को सादर समर्पित
"गीतिका"
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मापनी 222 222 222 222 222
समांत-आन
पदांत- हमारी हिन्दी माँ
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
संस्कृति भारत की पहली पहचान हमारी हिन्दी माँ
मीठी भारत की मधु तान जुबान हमारी हिन्दी माँ
राष्ट्रसुभाषा हिन्दी भारत का अतिशय गौरव सबका
हर भारतवासी बोली अभिमान हमारी हिंन्दी माँ
जोड़कर सभी प्रांतो हिंन्दी माँ एकजुट सदा रखती
ज्ञान अमर ज्योति जलाती वरदान हमारी हिन्दी माँ
रक्षा सेवा सम्मान सुजान करे सब हिंन्दी माँ का
स्वार्थ सियासत से आज परेशान हमारी हिंन्दी माँ
छूकर हिंन्दी हर हिंदुस्तानी स्नेह दिलो बरसाती
आओ आज प्रणाम करे मान हमारी हिंन्दी माँ
पवन बत्तरा

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
कार्यक्रम अध्‍यक्ष **करण सिंह परिहार को समरर्पित , काफिया ---आर रदीफ --नए
एक ग़ज़ल -- बहर २२ २२ २२ २२ २२ २२ २२ २
इस बहर में २२ मात्रा को ११२ , १२१ ,२११ कर सकने ही छूट रहती है
बस गेयता बाधित न को , इसका ध्यान रखा जाता है
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बे समझे बूझे ले आये घर घर में त्यौहार नए
----------------------------------------------
22 22 22 22 22 22 22 2
लगे कमाने जब भी बच्चे बना लिए घर बार नए
मगर बुढ़ापे को क्या देंगे उस घर में अधिकार नए
आयातित हो गयी सभ्यता पच्छिम उत्तर दच्छिन की
बे समझे बूझे ले आये घर घर में त्यौहार नए
हाय बाय के अब प्रेमी सब, नमस्कार पिछडापन है
परम्पराएं आज पुरानी खोज रहीं स्वीकार नए
पत्ते डाली ही काटे हैं , जड़ें वहीं की वहीं रहीं
इसी लिए तो रोज़ पनपते जाते हैं मक्कार नए
थोड़ा अहम तुम्हारा टूटे , थोड़ा सा पिघले मेरा
इस टूटे रिश्ते में खोजें आ फिर से अधिकार नए
केवल चोरी , बलत्कार या लूट पाट की धटनाएं
रोज़ यही सब धटना है जब, क्या लिख दें अखबार नए
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गिरिराज भंडारी

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --शिल्‍प और शिल्‍पी
सम्‍पूर्ण शिल्‍प परिचय सहित गीत/गजल/दोहा/छंद/3मुक्‍तक/3 कहमुकरी/
दिनॉंक--11 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष ---आदरणीय करण एस पी जी जी को सादर समर्पित
विधा :ग़ज़ल
काफ़िया :आत
रदीफ़ :तुम्हारी
बहर: २२, २२, २२,२२
कुछ शब्द.........
मोहब्बत बहुत पाकीज़ा होती है ,इसमें मिला धोखा महबूब को तोड़ जरूर देता है पर उसके सच्चे प्यार को मिटा नहीं पाता, कुछ ऐसे ही खट्टे- मीठे जज्बातों को पिरोया है आप सब गुणीजनों के लिए.........अपनी ग़ज़ल मे .................
जीवन मे हर बात तुम्हारी
संजोई सौगात तुम्हारी ।।
बीती सुन्दर सपने जैसी
बाहो मे हर रात तुम्हारी।।
इश्क किया था तुमसे बेहद
पूछी थी कब जात तुम्हारी ।।
विषधर भी बन जाती मै,गर
चंदन होती गात तुम्हारी।।
कहते हो अब राह अलग है
क्या मै समझूँ बात तुम्हारी।।
आँगन ,दीवारें इस घर की
सह ना पायीं घात तुम्हारी ।।
टूटे सपने, बिखरा आँगन
रो देगी अब मात तुम्हारी।।
छोड़ेंगे अपने जब होगी
आँखों से बरसात तुम्हारी ।।
खुशिओं को तरसोगे इकदिन
"शह"मेरी वो "मात"तुम्हारी।।
कह पाओ तो माँ से कहना
ग़मगीन न हो रात तुम्हारी।।
जीती हूँ मैं तो अब प्रियतम
यामे हर बात तुम्हारी।।
"शिलपी " हूँ मै गढ़ना जानूँ
चुभती थी ये बात तुम्हारी।। ........DR. SHIPRA

९६३४७६३०७६

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29,हमारा मुक्‍तक,अध्‍यक्ष --आदरणीया Annapurna Bajpai जी के सम्मान में प्रस्तुत

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
दिनॉंक--12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 14 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष --आदरणीया Annapurna Bajpai जी के सम्मान में प्रस्तुत
~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~~*~*
हिन्द देश के वासियो, हिंन्दी है हम सब, हिंन्दी से प्यार करो
राजनीति के स्वार्थ से, अपना अपना हिंन्दी पर, मत वार करो
पृथक पृथक प्रांतो सभी हम जोड़ो दिल से हिंन्दी तार सभी
कलमकार, साहित्यकारों हिंन्दी का तुम दिल से सत्कार करो
पवन बत्तरा
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह 29
कार्यक्रम - हमारा मुक्तक दिए गये विषय पर
विषय - हिंदी
आदरणीय अन्नपूर्णा वाजपेई जी को प्रेषित
हिंदी है इस देश की आन
सब मिल बोलो बढ़ेगी शान
भारत माता को गर्व इस पर
इसकी उन्नति सबका मान
शान्ति पुरोहित
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
दिनॉंक--12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 14 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष --आदरणीया Annapurna Bajpai जी
"हिन्दी" एक भाषा नहीं संस्कार है यारो
व्याकरण से सुसज्जित अविष्कार है यारो
भावो का शब्दों से आलिंगन हो जाये तो
कविता-ग़ज़ल के रूप को नमस्कार है यारो
विजय शंकर मिश्रा

गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-29
हमारा मुक्तक-आदरणीय अध्यक्षा अन्नपूर्णा वाजपेयी जी को समर्पित ।
******विषय-हिंदी******
इंसानी भावों को इसने तराशा है ।
अभिव्यक्ति की सुंदर-जीवंत आशा है ।
करती है सहज ही व्यक्त मनोभावों को,
गर्व है कि हिंदी हमारी मातृभाषा है ।
-नारायण गौरव ।

गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह - २९
हमारा मुक्तक के अन्तर्गत
दि. १२ सितंबर प़ात:१० बजे से
समारोह अध्यक्षा -माननीया Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित
देश दुनिया में पहचान बढ़ाएं !!
अपने हिन्द का अभिमान बढ़ाएं !!
सबका एक ही नारा हो जाये !!
आओ हिंदी की शान बढ़ाएं !!
** आलोक **
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह - २९
हमारा मुक्तक के अन्तर्गत
दि. १२ सितंबर प़ात:१० बजे से
समारोह अध्यक्षा -माननीया Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित
भारत की पहचान है हिन्दी ।
भारतीयता की आन है हिन्दी ।
है अथाह रस-सागर अनुपम-
भाव शिल्प की शान है हिन्दी ।
कान्ति शुक्ला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -29
द्वितीय चरण ...
कार्यक्रम -हमारा मुक्तक के तहत दिए हुए विषय पर मुक्तक रचना
समारोह अध्यक्षा आदरणीया Annapurna Bajpai जी के समक्ष सादर प्रस्तुत
===============================================
विषय - हिंदी
=========
कब तक दुनिया कितना कुछ कहेगी
सरलता समरसता समता राष्ट्र में बहेगी
भाषाओं की भाषा समृद्ध गुणों की खान
जनभाषा 'हिंदी' विश्वभाषा बन के रहेगी ।
***** डॉ.अनीता जैन "विपुला"
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-29
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
विषय - हिंदी
समारोह अध्यक्ष आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक-
शब्द-शब्द माँ हिंदी तेरा, चन्दन है ,
तू भारत की शक्ति है ,अवलम्बन है,
तेरी सेवा में अर्पित, सारा जीवन माँ ,
तेरे शुभ चरणों में शत-शत वंदन है !
*********************धीरेन्द्र कुमार जोशी
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-29
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
विषय - हिंदी
समारोह अध्यक्ष आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक
***********
सुनो माँ शारदे इतना दया का दान हो जाये
मुझे वैभव नही देना अगर अभिमान हो जाये
हमेशा मातृ भाषा का करूं सम्मान दिल से मैं
यही वर दो मुझे सम्पूर्ण हिंदी ज्ञान हो जाये
कैलाश भारद्वाज


गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -२९
---------------------------------------------------
कार्यक्रम ----हमारा मुक्तक
--------------------------------------
विषय --हिंदी
--------------------
कार्यक्रम अध्यक्ष --आ .अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को समर्पित
-----------------------------------------------------------------------
अंग्रेजों से मिली आजादी ,अंग्रेजी से---------- पानी होगी .
निज भाषा की उन्नति खातिर ,अब तदबीर लगानी होगी .
हिंदी हैं हम ,हिंदी को ही ,सच्चा सम्मान------ दिलाना है
अपने मन से अंग्रेजी की दल-दल हमें-------- हटानी होगी .
------------------------------------------------------------------------
----------------------भारती जैन --------------------------------------
---------------------१३-९-२०१४ -----------(स्वरचित )

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
द्वितीय चरण....
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
अध्यक्षा - आदरणीय Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित
*******************************************************************
हिंदू हैं हम सब हिंदी को ही अपनायेंगे
सारी दुनिया में हिंदी का मान बढ़ायेंगे
बहुत हुई अपमानित अब और न होने देंगे
हिंदी भाषा को हम अपनी शान बनायेंगे
~रमा वर्मा~ (१२-९-१४)

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - २९
कार्यक्रम-हमारा मुक्तक....
विषय- हिंदी.....
अध्यछ् , आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को समर्पित..
मातृभाषा हित समर्पण आज क्यों उपहास जैसा !
वार्ता हिंदी मे करना...... लग रहा परिहास जैसा !
हो उपेछि्त निज जनो के बीच हिंदी सोचती यह ,
अपनेआंगन,अपनी भाषा, कब लगे मधुमास जैसा !
{अनुपम आलोक}


गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
दिनॉंक--12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 14 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष --आदरणीया Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित.........................
राष्ट्र गगन के मस्तक पर सूर्य सा चमकाना होगा
हिन्दी को हिंग्लिश के चंगुल से मुक्त कराना होगा
आदर देगें जब हम उसको तो जग से आदर पाएंगे
अपनी हिन्दी को जग मे, गौरवशाली बनाना होगा...............DR.SHIPRA

रामगोपाल गहमरी
साहित्य समारोह - 29
द्वितीय चरण - मुक्तक
विषय - हिन्दी
आ. अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को सादर समर्पित -
मुक्तक रचना -
हिन्दी मेँ तुतलाना सीखा , हिन्दी मेँ बतियाना ।
हिन्दी मेँ ही रोना सीखा , हिन्दी मेँ ही गाना ।
हिन्दी मेँ ही घोली घुट्टी , हिन्दी मेँ ही लोरी -
हिन्दी माँ की बिन्दी जैसी हिन्दी ज्ञान खजाना ।।
. . . . . . . . . . . . . .पल्लव *

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - २९
कार्यक्रम-हमारा मुक्तक....
विषय- हिंदी.....
अध्यछ् , आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को समर्पित..
टिमटिम तारे वाला पाठ नहीं स्टार सिखाते हैं
आभार नहीं थैंक्यु से शिष्टाचार सिखाते हैं
क्या ऐसे हम कर पायेंगे हिन्दी को सम्मानित
जब इन बच्चों को अंग्रेजी व्यवहार सिखाते हैं
डॉ अर्चना गुप्ता

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
मंच के समीक्षार्थ एक मुक्तक
*****************************
आंग्ल के दीवाने होकर छोड़ दी हिन्दी
कहते मातृ भाषा , और छोड़ दी हिन्दी
लिख रहे उल जलूल , न रखते संवेदन
व्यवसायीकरण के फेर मे छोड़ दी हिन्दी ॥..............अन्नपूर्णा बजपीई 'अंजु'


गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-२९
कार्यक्रम-हमारा मुक्तक
विषय-हिन्दी
आदरणीया अन्नपूर्णा वाजपेयी जी को समर्पित
*************************************
हिन्दी मातृभाषा है इसे दिल से अपनाओ तुम
संस्कारों की जननी है इसे मत यूँ ठुकराओ तुम
चोला फेंक अंग्रेज़ी का अंधानुकरण त्यागो
ये पुरखों की विरासत है इसे मत यूँ बिसराओ तुम


गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
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हिंदी है जन जन की भाषा,हिंदी जन जन का अभिमान ,
सब को जोड़ के रखती हरदम ,हिंदी माँ भारती का मान ,
सब के हृदय में बसी हुई है हिंदी ,सब करते हैं गौरव गान
आओ अपनाएं सब हिंदी ,भारत पूतों की हिंदी है पहचान।
--महेंद्र वर्मा "धीर"



राम गोपाल गहमरी साहित्य समारोह =२९
द्वितीय चरण - मुक्तक
विषय - हिन्दी
आ. अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को सादर समर्पित -
हिंदी पेड़ की शाखाओं पर ,कभीं मिलतीं नहीं
नहि ये किसी हाट या ,बाजार में बिकतीं नहीं
हिन्दीं साहूकार की ,तिजोरी की पूजी नहीं
यह दिन दूनी रात ,चौगुनी बढ़तीं नहीं
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६

रामगोपाल गहमरी साहित्य समारोह - 29
विषय - हिन्दी
समारोह अध्यक्ष - आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को समर्पित
भाषायें तो अतिरेक हैं
सम्पन्न हिन्दी एक है
जैसा सुने अंकित करे
उद्बोध तद्सम्वेग है ।।
डा उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -29
कार्यक्रम- दिए गए बिषय पर 1 मुक्तक
बिषय - हिन्दी
समय- 12 सितम्बर समय प्रातः 10 बजे से 14 सितम्बर प्रातः 10 बजे तक
अध्यक्षा- आदरणीया अन्नपूर्ण बाजपाई जी के सन्मुख
हिंदी की महिमा है निराली
शारदे माँ की राज दुलारी ।
भाव में जिसके गंगा बहती
ये मोहन मुरली को प्यारी ।।
विनय बाली सिंह******

गोपालराम गहमरी साहित्य् समारोह -29, हमारा मुक्ततक विषय-हिंदी (दि 12-9-14)
हिन्दी में ही बोलकर रख भाषा का मान
भाषा की सम्पन्नता है हिन्दी की शान |
हीन भाव लाये बिना कर हिन्दी में बात
तब हिन्दी की विश्व में अमित बने पहचान |
-लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

गोपालराम गहमरी साहित्य् समारोह -29, हमारा मुक्ततक विषय-हिंदी
=============================================
पुलिस मिलिट्री से वानर टोली न बन जाये ॥
एटम बम से पिस्टल की गोली न बन जाये ॥
देख के अँग्रेजी के मारे हिन्दी की हालत ,
डर है कहीं वह भाषा से बोली न बन जाये ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत आदरणीया Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित मुक्‍तक रचना l
विषय ---हिन्‍दी
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देश की भावनाओं का अखिल अभिमान है हिन्दी,
राष्ट्रहित साधनाओं का अजब वरदान है हिन्दी।
इसे निज स्वार्थ से हटकर सियासत से अलग देखो,
विश्व साहित्य में सबसे सफल पहचान है हिन्दी।
-----------------------------------------------------------------
-विनोद
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
समारोह अध्यक्षा आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को सादर समर्पित ।
( साथ ही पटल के अन्य स्नेहिल एवं प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ. उनकी प्रतिक्रिया आमंत्रन के संग )
सरल, सहज , सजीव, सरस, सुसंस्कृत भाषा का प्रतिमान है हिन्दी ।
ये है गुलाबे चमन ,रूहे वतन, है माँ भारती के भाल की बिन्दी ।
प्रगति के पथ पर निरंतर चलती रहे, रोज फलती फूलती यह रहे ।
सबके हृदय में बसे, सबको ये जंचे, जन जन को लुभाती रहे हिन्दी ।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 13.09.2014

Monday, 1 September 2014

गोपाल राम गहरी सा0 स0 27 दिनांक 29 अगस्‍त हमारा मुक्‍तक अध्‍यक्षा कान्‍ती शुक्‍ला जी

गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह --२७
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कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
अध्यक्ष --आ .कान्ती शुक्ला जी को समर्पित
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विषय --मुस्कुराना /हॅंसना/ खिलखिलाना /हँसी
--------------------------------------------------
इतना दर्द दिया अपनों ने ,दर्दों से ही प्यार हो गया .
छलती रही हँसी होंठों को ,आँसू अब उपहार हो गया .
नहीं किसी से मुझे बैर था ,नहीं किसी से मेरी यारी
दौलत वालों की दुनिया में ,रिश्ता भी व्यापार हो गया .
----------------------भारती जैन -------------------
---------------------३०-८-२०१४---------------------


गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --27
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक के तहत मुक्‍तक रचना
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना,हँसी
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.--
दुनियां को इंसानियत से सजाने दीजिये
कलियों को चमन में मुस्कुराने दीजिये
नारी बिन मनुष्य का निशान खो जायेगा
बेटियों को भी यहाँ खिलखिलाने दीजिये
--- मँजु शर्मा ३०-०८-२०१४

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना ...................
******************************************************************
कहाँ कैसे न जाने कब ये किस्मत रूठ जायेगी,
साथ चलती धरा एक दिन यहीं पर छूट जायेगी।
जियो हर पल मुस्करा कर ये जीवन चार दिन का है,
डोर जीवन की ना जाने कहाँ पर टूट जायेगी।
---------------------------------------------------------------
-विनोद

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27 ( 29 अगस्त से 31अगस्त 2014 तक
आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत --
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना ।
दर्दे सैलाब में डुबकियाँ लगाती रही जिन्दगी |
नश्तर कभी काँटे भी ...चुभाती रही जिन्दगी |
हँसती रही...जिन्दगी..उड़ा कर हँसी बेशर्म सी...
रौशनी सी दिखी...कभी जलाती रही जिन्दगी ||
-----------------#अलका गुप्ता -------------------
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =
मुक्तक
शीर्षक -मुस्कुराना /हँसना/खिलखिलाना /हँसी
विधा -मुक्तक
बहर= २२१२,१२२
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को संबोधित
चलना सिखा दिया है ,फसना सिखा दिया हैं
घनघोर आँधियों में ,हँसना सिखा दिया हैं
माँ ने हमें दिया हैं ,अपना पुनीत आँचल
इस प्यार के सहारे , बसना सिखा दिया हैं
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६


गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 31 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना,हँसी
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी
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कैसी खुशियां कैसा गम है ,
जीवन अपना कितना कम है ,
आओ बांटें खुशियां जग को ,
देखें किसमे कितना दम है।
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महेंद्र वर्मा "धीर"
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना ...................
कंटक तेरी राहों के मैं हँस - हँस कर चुन लूंगी
पलकों में नवयौवन के सुन्दर सपने बुन लूंगी
शूल चुभन की गहन तड़प को पी लूंगी अधरों से
स्वयं समर्पण करके मैं पल पल जीवन गुन लूंगी.............DR. SHIPRA
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह --२७
कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
विषय --मुस्कुराना /हॅंसना/ खिलखिलाना /हँसी
अध्यक्ष --आ Kanti Shukla जी को सादर समर्पित
==================================
हँसना और हँसाना सीखो
गम को दूर भगाना सीखो
नफरत करने वाले के भी
दिल में प्यार जगाना सीखो
~रमा वर्मा~

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गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ~27
हमारा मुक्तक(द्वितीय चरण)के अन्तर्गत
विषय~मुस्कराहट,हँसना आदि
आदरणीया कार्यक्रम प्रमुख कांति शुक्ला जी के सम्मुख सादर प्रस्तुत~
आके कहाँ बसी है ,इंसान की नगरी।
जाने कहाँ गयी है,मुस्कान की नगरी।
खोये हो अपने आप मे,होश नही है,
शायद नही रही ये,भगवान की नगरी ।

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 31 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना,हँसी
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को सादर
(अतिथि रचना )
*मुक्तक *
आते जाते गाते रहना जीवन है
खुशियाँ खूब लुटाते रहना जीवन है
जीवन है अनमोल धरोहर ईश्वर की
हँसना और हँसाते रहना जीवन है
लव कुमार 'प्रणय'

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना, खिलखिलाना ।
अदा है पास आपके सारे जमाने की ,
चाहत है सभी की आपका हो जाने की,
रूप देखा सदा ही खिलखिलाता आपका
हमको भी थोडी दें वजह मुस्कुराने की !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.
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सुबह की पहली किरण देख फूल मुस्कुरा उठे ,
फूलों को मुस्काते देख नौनिहाल मुस्कुरा उठे
जीवन कितना अनमोल है इन्हे देखो जरा
मुफ़लिसी मे भी, वो बाशिंदे मुस्कुरा उठे । .........अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-27
शीर्षक- मुस्कुराना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्ष आदरणीया Kanti Shukla जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक।
मापनी 2122×4
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सह चुका काफी सितम सबको बताना चाहता है
गान वन्दे मातरम फिर --गुनगुनाना चाहता है
वाद हो प्रतिवाद हो या युद्ध की ललकार बेशक
जिस तरह भी हो तिरंगा मुस्कुराना चाहता है
कैलाश भारद्वाज
फरीदाबाद
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना,हँसी
****************************************************'
दोस्ती हो या दुश्मनी मुस्कराया करो
जिंदगी दो पल की खूब खिलखिलाया करो
जाने कौन सा पल अंतिम आस हो जाये
जीवन का लुफ्त भी मौज से उठाया करो !!
** आलोक **
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गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27 ( 29 अगस्त से 31अगस्त 2014 तक
आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत =
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना ।
कठिन राह को सुगम राह बना हँसना सीखा गया कोई
अँधेरी रात में हँसते हँसाते दीपक जला गया कोई
चीर हरण करता रहा जब तलक वह पापी दुशासन
अरे तभी चीर अबला का बढाता ही चला गया कोई ||
-लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
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विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.
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मुस्कान इक दूसरे में जान.. भरती है
गैरों के भी साथ पहचान ....करती है
बिन पैसों के लाती है ढेरों... खुशियाँ
प्रेमियों के दिलों में उत्साह भरती है ............ कल्पना मिश्रा बाजपेई
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
मधुर मधुर मंद मंद मोहन मुस्कावें ।
माॅखन मुख लेप लेप अनुपम सुख पावें ।।
पुलक पुलक लिपट धाय जसुमति दुलरातीं ।
लीला कर कोटि कोटि मटक मटक जावें ।।
डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31
अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति
शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,
खिलखिलाना ।
---------------
चाह के कोई काँटे उगाता नहीं ,
जो रुपा था उगा मन को भाता नहीं ,
कर्म जैसा किया फल भी वैसा मिला ,
फल मिला पाके क्यों मुस्कुराता नहीं ?
---महेश जैन 'ज्योति' ,मथुरा ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
दिनांक 29 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 31 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
बात पर हंसी आये तो अब हंसना क्या
बात बात पर गुस्से से अब रूठना क्या
बहस बहस बनती आदत अब उनकी हो
एक दूज बीच झमेले फिर फसना क्या
पवन बत्तरा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना ...................
अधिकार पा कर मुस्कराना अच्छा लगता |
अपने गुनाहों को छुपाना अच्छा लगता ||
कभी अपनी कमी को देखता नही यारों |
कमी औरो की नित उड़ाना अच्छा लगता ||
.......................................................
.................................कौशल अस्थाना
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
सोच-सोच कर न तुम कभी मुस्कुराया करो,
हँस-हँस ही हरदम,हँसी के मोती लुटाया करो।
परवरदिगार का सबसे नायब तोहफा है हँसी ;
खोल सब गिरह,खूब खुल,खिलखिलाया करो। ।
मीना मिश्रा
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 31 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक के तहत मुक्‍तक रचना
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना,हँसी
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को सादर सप्रेम समर्पित ....!
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ग़मों के खौफ से क्या हम मुस्कराना छोड़ दें....?
आंधियों के जोर से क्या दिए जलाना छोड़ दें ...?
माना की मुहब्ब्बत के लाख दुश्मन हैं मगर ,
क्या प्रेम का हम आशियाना बनाना छोड़ दें ...?

गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-२७
२९ अगस्त से ३१ अगस्त प़ात:१० बजे तक ।
( हमारा मुक्तक के अन्तर्गत )
विषय-मुस्कराना/हँसना/खिलखिलाना
( अतिथि रचना )
बेवशों और शोषितों से दिल लगाना सीख लो ।
कंटकों के कठिन पथ पर पग जमाना सीख लो ।
फिर नहीं वीरान हो सकती तुम्हारे दिल की बस्ती-
यदि कहीं निश्छल हृदय से मुस्कराना सीख लो ।
कान्ति शुक्ला

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 31 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिलाना,हँसी
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी
मुक्तक-
हँसी है वही जो कि सबको हँसी दे.
खुशी है वही जो कि सबको खुशी दे.
वही दीप है जो हटाकर अँधेरा,
हर इक ओर कर रोशनी-रोशनी दे.
-----डाॅ.कमलेश द्विवेदी
----- मो.09415474674
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह --२७
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कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
अध्यक्ष --आ .कान्ती शुक्ला जी को समर्पित
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-दर्द

समारोह 27 दिनांक 28 अगस्‍त शिल्‍प और शिल्‍पी अध्‍यक्ष श्री डी0के0 नागची रौशन जी विजेता रजनीश तपन जी

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ~27
प्रथम चरण~शिल्प और शिल्पी
विधा~गीत
मुखड़े तथा प्रत्येक पंक्ति का मात्रा भार~16 16
मुखड़े तथा अन्तरोँ का तुकांत ~आम न पूछो।
अध्यक्ष आदरणीय नागइच रोशन जी के सम्मान मे सादर प्रस्तुत
॰॰॰
रहने दो गुमनाम, न पूछो।
यारो!मेरा नाम न पूछो।
काम मिले तो नाम बताऊँ।
रहने दो बेनाम न पूछो।
1-दौलत का जब नशा चढ़ेगा।
हर रिश्ते का भाव बढ़ेगा।
लेकिन मै अनमोल मुहब्बत ।
यारोँ मेरा दाम न पूछो।
रहने दो...
क्यूँ अपने अंदाज बदल दूँ।
कल तो कल था आज बदल दूँ।
बदल गयी जब रूह हमारी,
क्या होगा अंजाम न पूछो।
रहने दो...
फेँक रहा है रोटी कोई।
डूँढ रहा है रोटी कोई।
खुद पर रोती औरत देखो।
बदली है आवाम न पूछो।
रहने दो....
मत पूछो अब जात हमारी।
जीत तुम्हारी ,मात हमारी ।
उड़ न जाये सुबह की लाली।
डरी डरी है शाम न पूछो।
रहने दो गुमनाम....


गोपाल राम गहमरी साहित्यिक समारोह- 27
प्रथम चरण- शिल्प और शिल्पी
विधा- कुण्डलिनी छन्द
शिल्प- यह चार चरणोँ वाला बिषम मात्रिक छन्द है, इसके प्रथम दो चरणोँ की पंक्तियोँ का मात्राभार- 13/11 तथा दूसरे चरण की पंक्तियोँ का मात्राभार- 11/13 होता है।यह एक दोहा तथा अर्धरोला के योग से बनता है,दोहा का अंतिम पद अनिवार्यतः अर्धरोला का प्रथम पद होता है।
तुकान्त-
1-भाव/आती
2-ओर/रूपी
3-अंग/नैया
ँँँ
समारोह अध्यक्ष सम्मान्य आदरणीय Dk Nagich Roshan सर जी को सादर समर्पित
ँँँँ
1-
पापी पर्वत सम बढे, लिए क्रूरता भाव।
राई भर भी ना बढा, पुण्य प्रेम सद्भाव।।
पुण्य प्रेम सद्भाव, धरा आँसू टपकाती।
छुपा हृदय मेँ घाव, गीत नीरव का गाती।।
2-
आज प्रलय विस्मित लिए, बढा तिमिर चहुँ ओर।
द्वेष बाण उर बेधकर, खुद करता है शोर।।
खुद करता है शोर, अश्रु कण पाहन रूपी।
पीकर झूमेँ लोग , हलाहल मदिरा रूपी।।
3-
भाव मृदुल से रहित तन, ज्ञान रहित सत्संग।
दोनों ही जब मिल गये, सृजित हुआ हुडदंग।।
सृजित हुआ हुडदंग, भँवर बिच जीवन नैया।
रखकर प्रेम स्वभाव, उबारो कलुषित नैया।।
ँँँँ
करन सिंह परिहार
पिण्डारन- बाँदा (उ.प्र.)

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह- 27
प्रथम चरण- शिल्प और शिल्पी
समारोह अध्यक्ष सम्मान्य @Dk Nagaich Roshan जी के सम्मान मेँ सादर प्रेषित
विधा : ग़ज़ल
मात्रा भार : २ १ २ २ १ २ २ १ २ २ १ २
काफ़िया : आना .
रदीफ़ : यहाँ .
अब बचा है किसे, क्या सुनाना यहाँ ,
साज़ बिन ही छिड़ा जब तराना यहाँ .
आज हासिल नहीं , लफ्ज़ दो प्यार के ,
लुट गया है , वफ़ा का खजाना यहाँ.
आग दिल में लगी आंसुओं से मेरे ,
दिल बनाया किसी ने निशाना यहाँ .
आज हसरत नहीं है , मेरी दीद की ,
अक्स भी अब हुआ है पुराना यहाँ .
साजिशों को करूं किस तरह बेअसर .
हँस रहा आज मुझपे ज़माना यहाँ .
सूखता हूँ शज़र ,टूटता हूँ बशर ,
किस तरह वो करेगा ठिकाना यहाँ ,
हर किसी ने दिया ठोकरों से उड़ा ,
अब 'अना ' लग रहा हूँ , बेगाना यहाँ ,
अनीता मेहता 'अना'
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -27
प्रथम चरण - शिल्‍प और शिल्‍पी
विधा - गज़ल
बहर - १२२२ / १२२२ / १२२२ / १२२२
काफिया - आम
रदीफ - हो जाये
अध्यक्ष आदरणीय Dk Nagaich Roshan जी को सादर समर्पित एक प्रयास
मिले है आज हम दोनो हसीं इक शाम हो जाये
कसम तुम तोड़ दो उसकी चलो इक जाम हो जाये
पड़ा सूखा मरे भ्‍ूाखो नहीं कोई हमें पूछे
कही ऐसा न हो यारो कि कल्‍लेआम हो जाये
नहीं रखते कभ्‍ाी धीरज किसी भी काम में यारो
बचा लो नाम तुम मेरा न वो बदनाम हो जाये
तुम्‍हारे प्‍यार में जानम मरेगें डूब कर सुन लो
मरा पागल दिवाना है न चरचा आम हो जाये
मिलेगा अब नहीं जीवन मिला इक बार जो तुमको
करो कुछ काम अब ऐसा तुम्‍हारा नाम हो जाये

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -27
प्रथम चरण - शिल्‍प और शिल्‍पी
विधा - गज़ल
बहर - १२२२ / १२२२ / १२२२ / १२२२
काफिया - आऊँ
रदीफ - मैं
अध्यक्ष आदरणीय Dk Nagaich Roshan जी को सादर समर्पित एक प्रयास
************************************************
सुहानी रात का आलम दिया दिल का जलाऊं मैं
सितारों को चुराऊं चाँद को अपना बनाऊँ मैं
सुरों को ढाल कर खुद में भरूं मैं प्यार से दामन
ग़ज़ल में साज भरकर बस उसे ही गुनगुनाऊँ मैं
कभी जागूं कभी सोऊं, अजब है हाल अब दिल का
दिवाना हो गया है दिल यही सबको बताऊँ मैं
ख़ुशी मिलती नहीं है मांगने से है पता हमको
गमों से प्यार करलूं और फिर रिश्ता निभाऊँ मैं
हजारों राह मिल जाए अगर उम्मीद दिल में हो
किरण उम्मीद की ऐसी निगाहों में जगाऊँ मैं
यही अरमान है मेरा ख़ुशी बनकर बिखर जाऊं
रमा ये ख्वाब की बातें कहो किसको सुनाऊँ मैं
~रमा वर्मा~ (२८-६-१४)
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह- 27
प्रथम चरण- शिल्प और शिल्पी
समारोह अध्यक्ष सम्मान्य Nagaich Roshan जी के सम्मान मेँ सादर प्रेषित एक ग़ज़ल-
बहर- मुफ़ाईलुन, मुफ़ाईलुन, मुफ़ाईलुन, मुफ़ाईलुन.
(कहीँ कहीँ मात्रा पतन का लाभ लिया है)
काफ़िया- आन
रदीफ़- के आगे

अगर इतरा रहे हो तुम जो अपनी शान के आगे
चलेगी एक तेरी क्या समय बलवान के आगे

ये माना आसमाँ का भी तूँ सीना चीर सकता है
मगर तूँ जा नहीँ सकता कभी शमशान के आगे

ग़मोँ के आँधियोँ मेँ भी खुशी के सिलसिले देखो
कि ग़म टिकता कहाँ कोई तेरी मुस्कान के आगे

हमारा यार होता तो सभी दुखड़े सुना देता
मगर अच्छा नहीँ लगता किसी अनजान के आगे

अगर वो जा चुका है तो महज रोना है हाथोँ मेँ
तुम्हारा वश चलेगा क्या कभी भगवान के आगे

जड़ेँ 'आकाश' होतीँ हैँ तभी ये फूल खिलते हैँ
मगर वो भूल जाता है जरा पहचान के आगे

ग़ज़ल- आकाश महेशपुरी


गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -27
प्रथम चरण - शिल्‍प और शिल्‍पी
विधा - गज़ल
212 212 212 212
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
काफिया - आऊ
रदीफ़ - ये मुमकिन नहीं
अध्यक्ष आदरणीय Dk Nagaich Roshan जी को सादर समर्पित एक प्रयास
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प्रीत दिल में जगाऊ ये मुमकिन नहीं
औ समझ भी न पाऊ ये मुमकिन नहीं !!
मन कही भी न मेरा लगे अब सखी !
किस तरह दिल लगाऊ ये मुमकिन नहीं !!
जिंदगी यूँ बदलती रही क्या कहू !
पर तुझे सब सुनाऊ ये मुमकिन नहीं !!
हर तरफ प्यार के फूल ही फूल है !
कैसे चाहत छिपाऊ ये मुमकिन नहीं !!
जो न था कुछ वही बन गया जिंदगी !
प्यार सबको बताऊ ये मुमकिन नहीं !!
** आलोक **

गोपाल राम गहमरी सा समारोह -26 दिनॉंक 22 अगस्‍त अध्‍यक्ष रेखा नायक रानो विजेता, हमारा मुक्‍तक

गोपाल राम गहमरी सा समारोह -26 दिनॉंक 22 अगस्‍त अध्‍यक्ष रेखा नायक रानो विजेता, हमारा मुक्‍तक


गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -- 26
दिनांक 22 अगस्त प्रातः 10 बजे से 24 अगस्त 2014 प्रातः 10 बजे तक
कार्यक्रम-हमारा मुक्तक
विषय-आन, मान, शान, गौरव, प्रतिष्ठा
कार्यक्रम अध्यक्षया-आदरणीया रेखा नायक रानो जी को सादर समर्पित
~~~~~~~~~~~~~~`~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
तिरंगा रूह है मेरी, तिरंगा आन है मेरी!
शहीदों को लगे प्यारा,तिरंगा शान है मेरी!!
भले ही ना रहे हस्ती, इसे झुकने नहीं देंगे!
तिरंगा बस गया दिल में, तिरंगा जान है मेरी!!
( नागेन्द्र सिंह निरवाण )

गोपाल राम गहमरी साहित्यिक समारोह -26
द्वितीय चरण -हमारा मुक्तक-
विषय आन मान शान गौरव प्रतिष्ठा
समारोह अध्यक्ष रेखा नायक रानो जी को सादर समर्पित
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हिन्द की शान तिंरगा है ,हिन्द की आन तिरंगा है
हिन्द का गौरव प्रतिष्ठा ,और अभीमान तिरंगा है
तिरंगा विश्व मे अपनी अटल ,पहचान रखता है
सजा जो अपने होटो पे ,वो गौरव गान तिरंगा है
.....निर्देश शर्मा पाबलेवाला.........................
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ~26(द्वितीय चरण)
कार्यक्रम~हमारा मुक्तक
विषय~आन,मान,प्रतिष्ठा आदि
कार्य क्रम अध्यक्षा सम्मान्य रेखा रानो जी की प्रतिष्ठा मे प्रस्तुत~
आन,मान और इज्जत भइया होती अपने हाथ मे।
नीम सी कड़वी बोली को बदल लो मीठी बात मे।
बैरी तेरा जग न होता ,तू ही अपना दुश्मन है।
विष का प्याला घोल रहा तू अपने ही जज्बात मे।


गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह- 26 (द्वितीय चरण)
कार्यक्रम- हमारा मुक्तक
विषय- शान /...
कार्यक्रम अध्यक्ष आदरणीया Rekha Nayak Rano जी के सम्मान मेँ एक मुक्तक-
अगर इतरा रहे हो तुम जो अपनी शान के आगे
बता ये शान जायेगी किसी शमशान के आगे
ये माना आसमाँ का भी तूँ सीना चीर सकता है
मगर इंसान जाये क्या कभी भगवान के आगे
रचना- आकाश महेशपुरी
पता-
वकील कुशवाहा 'आकाश महेशपुरी'
ग्राम- महेशपुर
पोस्ट- कुबेरस्थान
जनपद- कुशीनगर
उत्तर प्रदेश
09919080399

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ~26(द्वितीय चरण)
कार्यक्रम~हमारा मुक्तक
विषय~आन,मान,शान ,प्रतिष्ठा आदि
कार्यक्रम अध्यक्षा सम्मान्य रेखा रानो जी को समीक्षार्थ प्रस्तुत :
ज़रा सोचो , दिखावट और झूठी शान में क्या है ,
नहीं है जो हमारे पास, उस पहचान में क्या है ,
रहो तुम सादगी से , भूल जाओ छल, फरेबों को ,
मुखोटे ओढ़ना छोड़ो , न पूछो मान में क्या है .
अनीता मेहता 'अना'
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26 ( द्वितीय चरण)
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया Rekha Nayak Rano जी को सादर समर्पित...
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जश्ने आजादी का ये अभिमान तिरंगा है,
परचम है प्रतिष्ठा का स्वाभिमान तिरंगा है।
भारत के कण कण में बिखरी आन बान इसकी,
बीरों की शहादत का यही सम्मान तिरंगा है।
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-विनोद

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया रेखा नायक बानो जी को संबोधित.
**********************************
घनाक्षरी****
वीर हैं सपूत सारे, भारती के नैन-तारे!
युद्धभूमि में सदैव झंडा गाड़ देते हैं!!
प्रचंड तेज भाल पे,चाहे हो द्व्ंद्व काल से!
भारती के शत्रुओं का,सीना फाड़ देतेहै!!
विश्व धाक मानता है,वीरता को देख देख !
बड़े बड़ों को भी सदा,ये पछाड़ देते है!!
वज़्र के समान देह,नैनों में प्रचंड आग!!
काँप जाता शत्रु जब ,ये दहाड़ देते है!
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राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26 ( द्वितीय चरण)
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया Rekha Nayak Rano जी को सादर समर्पित...
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खुदा में बंदगी हो जब हमेशा
ख़ुशी हो जिंदगी में तब हमेशा
मिले जब मान सबसे जिंदगी में
रहे फिर ताजगी में अब हमेशा
~~ आलोक ~~
श्री गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-२६.
द्वितीय चरण
दि०२२अगस्त प्रातः१०बजे से२४अगस्त प्रातः१० बजे तक ..
हमारा मुक्तक -- विषय / मान ,शान ,आन .......
अध्यछा् आ०रेखा नायक रानो जी को समर्पित.....
शान से जिसकी गुलशन यह गुलो गुलजार रहता है !
करम से जिसके हम सबके दिलों में प्यार रहता है !
मन्दिर हो या मस्जिद हो सभी में उसकी ही रौनक,
कोई कहता है पैगम्बर....कोई अवतार कहता है !
{ अनुपम आलोक }
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ---२६ ( द्वितीय चरण )
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कार्यक्रम --हमारा मुक्तक ---अध्यक्ष आ .रेखा नायक रानो जी की प्रतिष्ठा में .
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विषय ----आन .मान ,शान ,गौरव ,प्रतिष्ठा .
--------------------------------------------------
क्यों मारते हो कोख में नादान बेटियाँ .
इंसान को भगवान का वरदान बेटियाँ.
चुन कर ये शूल ,पथ में बिछाती प्रसून ही
दोनों कुलों की आन ,मान ,शान बेटियाँ .
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-------------------------------भारती जैन -------
--------------------------२२-८-२०१४ ---------------
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26 ( द्वितीय चरण)
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया Rekha Nayak Rano जी को सादर समर्पित
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डरना है किस बात का....जब ली मन में ठान
सच पे सदा डटे रहो.............चाहे जाये जान
राह लगे मुश्किल अगर,प्रभु का धरना ध्यान
इज्जत से जीना सदा......रखना अपनी आन
~रमा वर्मा~


गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया रेखा नायक रानो जी को सादर समर्पित ।
(साथ ही अन्य प्रबुद्ध एवं प्रिय मित्रों के अवलोकनार्थ, प्रतिक्रिया आमंत्रण अनुरोध के साथ ।)
शीर्षक : आन, शान ।
वतन तेरे आरज़ू का यह मुकदस शजर , ........हमेशा खिलता, फलता और फूलता रहे ,
कभी थके तू नहीं, पल रूके तू नहीं,........ ..बस यों ही चलता रहे, और आगे बढ़ता रहे ।
आन तेरी अलग,शान तेरी अलग , .......... आज सारी दुनिया में पहचान तेरी अलग ।
रूप रोज़ाना तुम्हारा निखरता रहे ,................तू तरक्की की राहों पर सदा चलता रहे ।
: सतीश वर्मा गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26 ( द्वितीय चरण)
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया Rekha Nayak Rano जी को सादर समर्पित...
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हो मौसम उदास फूल को खिलना तो पड़ता है,
वृक्ष को हवा के मान को, हिलना तो पडता है,
मिलन रास न आये जिंदगी को मौत से शायद
बिन बुलाये आ जाये, फिर मिलना तो पडता है !
-ओंम प्रकाश नौटियाल

Santosh Nema
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया रेखा नायक रानो जी को सादर समर्पित ...!
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हमारे घर की आन ,बान शान हैं बेटियां ....!
फिर भी हमारे घर की मेहमान हैं बेटियां ...!
हैं बेटियां दो कुलों की पहचान और रौनक,
क्या मायका,क्या ससुराल कुर्बान हैं बेटियां ....!
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26 ( द्वितीय चरण)
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया Rekha Nayak Rano जी को सादर समर्पित
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मेरी मातृभूमि मेरी आन है
मेरी वीरभूमि मेरी शान है
आओ जन्मभूमि की रक्षा करे
मेरी कर्मभूमि मेरा मान है
पवन बत्तरा , पंचकूला, हरियाणा

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26 ( द्वितीय चरण)
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया Rekha Nayak Rano जी को सादर समर्पित...
हवाएं दरिया पहाड़ जंगल गूंजे शूरवीरों की गाथाओं से |
बच्चा-बच्चा लहराए तिरंगा अपना, गर्व और शान से |
हे ! सरजमीं पर मिट जाने वाले अम्रर शहीद जवानों!
तुम जैसे छलकें भाव देशप्रेम के, हर ह्रदय हर आँख से ||
----------------------#अलका गुप्ता -----------------------
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-26
हमारा मुक्तक-आदरणीय अध्यक्षा रेखाजी को समर्पित ।
विषय-प्रतिष्ठा/समानार्थी ।
सत्कर्म प्रतिष्ठा दिलाते हैं ।
दुष्कर्म प्रतिष्ठा गिराते हैं ।
सत्य के मार्ग पर बढ़ते चलो,
बढ़ते पग प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं ।
-नारायण गौरव ।
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-26
(द्वितीय चरण) हमारा मुक्तक
विषय- आन/मान प्रतिष्ठा/सम्मान
समारोह अध्यक्ष आदरणीया रेखा रानो जी एवं मंच के सभी प्रबुद्धजनों के समक्ष प्रस्तुत।
मापनी-2122 2122 2122 212
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गर्दिशी की धूप में सम्मान जिसका बिक गया
घर हुआ नीलाम सब सामान जिसका बिक गया
आँख से रिसता लहू उसका मुझे यूँ कह गया
शख्स वो जिन्दा कहाँ है मान जिसका बिक गया
~कैलाश भारद्वाज~
फरीदाबाद
श्री गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~26
दिनाँक~22से प्रात:10बजे से24प्रात: 10बजे तक~
हमारा मुक्तक~
विषय ~आन,मान,शान,गौरव
अध्यक्षा आदरणीया रेखा नायक जी को
सादर समर्पित~
छल कपट कूटनीतिक रण में,दुश्मन ने जाल विछाया था!
भारत सैन्य विरता के सम्मुख, कायरता पीठ दिखाया था!
गौरव गरिमा के महिमा से,मेरा भारत महान रहा!
शौर्य~पराक्रम रण कौशल से,विजय तिरंगा लहराया था!
जय हिन्द !जय भारत!
कुन्दन
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
dohe
उठो देश के सपूतो, भारत रहा पुकार ।
भारत पर तुम मर मिटो ,हो जाओ तैयार ॥
आन बान पर देश की ,लाखों हुये शहीद ।
सीमा पर उत्सव मने ,क्या होली क्या ईद ॥
भारत सीमा पर खड़े ,तन कर वीर जवान ।
आँच देश पर न आये ,हो जायें कुरबान ॥
हमारी जन्म भूमि की ,माटी है अनमोल ।
तिलक लगाएँ माटी से ,नाही इसका मोल ॥
रेखा जोशी
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --26 ( द्वितीय चरण)
दिनांक 22 अगस्‍त प्रात:10 बजे से 24 अगस्‍त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया Rekha Nayak Rano जी को सादर समर्पित......
डरते नहीं हम कभी ,किसी आंधी-तूफ़ान को,
ऊँचा रखेंगे सदा हम,विश्व में तेरी शान को।
नहीं झुकेगा शीश कहीं,घुटने हम टेकेंगे नहीं ;
लुटा देंगे सर्वस्व अपना,राष्ट्र-ध्वज महान को। ।
मीना मिश्रा
कार्यक्रम हमारा मुक्‍तक
विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष --आदरणीया रेखा नायक रानो जी को संबोधित--
सीता बन घर द्धार तज वन गामिनी बनी राम के मान पर
शकुन्तला बन परत्यक्ता बनी प्रेम धर्म के आन पर
दुर्गा ,लक्ष्मी , पन्ना ,जीजा , गार्गी बनी गौरव वतन की
वस्तु बन बलि चढ़ेगी कब तक नारी रीति-रिवाज के शान पर
---- मँजु शर्मा २४-०८-२०१४

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह-26 (दि. 22 अगस्‍त से 24 अगस्‍त'14 तक)
हमारा मुक्‍तक(वीर छंद में) --विषय---आन, मान,शान, गौरव, प्रतिष्‍ठा,
देश की रक्षा कर न सके जो, छीनों उनसे देश कमान।
जन-जन का है नारा अब ये, छेड़ो जंग अरु रखो आन ।
मेरी जन्मभूमि वीरो की, जहाँ शहीदों की है करतार
एक नहीं कम सवा लाख से, भारत माँ की ऐसी शान |
-लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - - 26
विषय - आन , मान , शान , गौरव
कार्यक्रम अध्यक्ष्या - आदरणीया रेखा नायक (रानो) जी के समक्ष प्रस्तुत
सजल-नयन अरु रुधिर-कंठ से, कैसे मै गुण गाऊॅ ?
प्रभु-पद उन्मुख सतत् , हृदय मे, मूरति मधुर सजाऊॅ ।।
योग,मंत्र,श्रुति,ग्रन्थ न जानू , अंतर्मन मे चाहूॅ ।
राम रटूं शिव-श्याम "मान" सम, कब मै दर्शन पाऊॅ ?
डा0 उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ