Monday, 15 September 2014

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29,हमारा मुक्‍तक,अध्‍यक्ष --आदरणीया Annapurna Bajpai जी के सम्मान में प्रस्तुत

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
दिनॉंक--12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 14 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष --आदरणीया Annapurna Bajpai जी के सम्मान में प्रस्तुत
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हिन्द देश के वासियो, हिंन्दी है हम सब, हिंन्दी से प्यार करो
राजनीति के स्वार्थ से, अपना अपना हिंन्दी पर, मत वार करो
पृथक पृथक प्रांतो सभी हम जोड़ो दिल से हिंन्दी तार सभी
कलमकार, साहित्यकारों हिंन्दी का तुम दिल से सत्कार करो
पवन बत्तरा
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह 29
कार्यक्रम - हमारा मुक्तक दिए गये विषय पर
विषय - हिंदी
आदरणीय अन्नपूर्णा वाजपेई जी को प्रेषित
हिंदी है इस देश की आन
सब मिल बोलो बढ़ेगी शान
भारत माता को गर्व इस पर
इसकी उन्नति सबका मान
शान्ति पुरोहित
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
दिनॉंक--12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 14 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष --आदरणीया Annapurna Bajpai जी
"हिन्दी" एक भाषा नहीं संस्कार है यारो
व्याकरण से सुसज्जित अविष्कार है यारो
भावो का शब्दों से आलिंगन हो जाये तो
कविता-ग़ज़ल के रूप को नमस्कार है यारो
विजय शंकर मिश्रा

गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-29
हमारा मुक्तक-आदरणीय अध्यक्षा अन्नपूर्णा वाजपेयी जी को समर्पित ।
******विषय-हिंदी******
इंसानी भावों को इसने तराशा है ।
अभिव्यक्ति की सुंदर-जीवंत आशा है ।
करती है सहज ही व्यक्त मनोभावों को,
गर्व है कि हिंदी हमारी मातृभाषा है ।
-नारायण गौरव ।

गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह - २९
हमारा मुक्तक के अन्तर्गत
दि. १२ सितंबर प़ात:१० बजे से
समारोह अध्यक्षा -माननीया Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित
देश दुनिया में पहचान बढ़ाएं !!
अपने हिन्द का अभिमान बढ़ाएं !!
सबका एक ही नारा हो जाये !!
आओ हिंदी की शान बढ़ाएं !!
** आलोक **
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह - २९
हमारा मुक्तक के अन्तर्गत
दि. १२ सितंबर प़ात:१० बजे से
समारोह अध्यक्षा -माननीया Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित
भारत की पहचान है हिन्दी ।
भारतीयता की आन है हिन्दी ।
है अथाह रस-सागर अनुपम-
भाव शिल्प की शान है हिन्दी ।
कान्ति शुक्ला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -29
द्वितीय चरण ...
कार्यक्रम -हमारा मुक्तक के तहत दिए हुए विषय पर मुक्तक रचना
समारोह अध्यक्षा आदरणीया Annapurna Bajpai जी के समक्ष सादर प्रस्तुत
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विषय - हिंदी
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कब तक दुनिया कितना कुछ कहेगी
सरलता समरसता समता राष्ट्र में बहेगी
भाषाओं की भाषा समृद्ध गुणों की खान
जनभाषा 'हिंदी' विश्वभाषा बन के रहेगी ।
***** डॉ.अनीता जैन "विपुला"
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-29
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
विषय - हिंदी
समारोह अध्यक्ष आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक-
शब्द-शब्द माँ हिंदी तेरा, चन्दन है ,
तू भारत की शक्ति है ,अवलम्बन है,
तेरी सेवा में अर्पित, सारा जीवन माँ ,
तेरे शुभ चरणों में शत-शत वंदन है !
*********************धीरेन्द्र कुमार जोशी
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-29
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
विषय - हिंदी
समारोह अध्यक्ष आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक
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सुनो माँ शारदे इतना दया का दान हो जाये
मुझे वैभव नही देना अगर अभिमान हो जाये
हमेशा मातृ भाषा का करूं सम्मान दिल से मैं
यही वर दो मुझे सम्पूर्ण हिंदी ज्ञान हो जाये
कैलाश भारद्वाज


गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -२९
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कार्यक्रम ----हमारा मुक्तक
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विषय --हिंदी
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कार्यक्रम अध्यक्ष --आ .अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को समर्पित
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अंग्रेजों से मिली आजादी ,अंग्रेजी से---------- पानी होगी .
निज भाषा की उन्नति खातिर ,अब तदबीर लगानी होगी .
हिंदी हैं हम ,हिंदी को ही ,सच्चा सम्मान------ दिलाना है
अपने मन से अंग्रेजी की दल-दल हमें-------- हटानी होगी .
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----------------------भारती जैन --------------------------------------
---------------------१३-९-२०१४ -----------(स्वरचित )

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
द्वितीय चरण....
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
अध्यक्षा - आदरणीय Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित
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हिंदू हैं हम सब हिंदी को ही अपनायेंगे
सारी दुनिया में हिंदी का मान बढ़ायेंगे
बहुत हुई अपमानित अब और न होने देंगे
हिंदी भाषा को हम अपनी शान बनायेंगे
~रमा वर्मा~ (१२-९-१४)

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - २९
कार्यक्रम-हमारा मुक्तक....
विषय- हिंदी.....
अध्यछ् , आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को समर्पित..
मातृभाषा हित समर्पण आज क्यों उपहास जैसा !
वार्ता हिंदी मे करना...... लग रहा परिहास जैसा !
हो उपेछि्त निज जनो के बीच हिंदी सोचती यह ,
अपनेआंगन,अपनी भाषा, कब लगे मधुमास जैसा !
{अनुपम आलोक}


गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
दिनॉंक--12 सितम्‍बर प्रात:10 बजे से 14 सितम्‍बर प्रात:10 बजे तक
अध्‍यक्ष --आदरणीया Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित.........................
राष्ट्र गगन के मस्तक पर सूर्य सा चमकाना होगा
हिन्दी को हिंग्लिश के चंगुल से मुक्त कराना होगा
आदर देगें जब हम उसको तो जग से आदर पाएंगे
अपनी हिन्दी को जग मे, गौरवशाली बनाना होगा...............DR.SHIPRA

रामगोपाल गहमरी
साहित्य समारोह - 29
द्वितीय चरण - मुक्तक
विषय - हिन्दी
आ. अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को सादर समर्पित -
मुक्तक रचना -
हिन्दी मेँ तुतलाना सीखा , हिन्दी मेँ बतियाना ।
हिन्दी मेँ ही रोना सीखा , हिन्दी मेँ ही गाना ।
हिन्दी मेँ ही घोली घुट्टी , हिन्दी मेँ ही लोरी -
हिन्दी माँ की बिन्दी जैसी हिन्दी ज्ञान खजाना ।।
. . . . . . . . . . . . . .पल्लव *

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - २९
कार्यक्रम-हमारा मुक्तक....
विषय- हिंदी.....
अध्यछ् , आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को समर्पित..
टिमटिम तारे वाला पाठ नहीं स्टार सिखाते हैं
आभार नहीं थैंक्यु से शिष्टाचार सिखाते हैं
क्या ऐसे हम कर पायेंगे हिन्दी को सम्मानित
जब इन बच्चों को अंग्रेजी व्यवहार सिखाते हैं
डॉ अर्चना गुप्ता

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
मंच के समीक्षार्थ एक मुक्तक
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आंग्ल के दीवाने होकर छोड़ दी हिन्दी
कहते मातृ भाषा , और छोड़ दी हिन्दी
लिख रहे उल जलूल , न रखते संवेदन
व्यवसायीकरण के फेर मे छोड़ दी हिन्दी ॥..............अन्नपूर्णा बजपीई 'अंजु'


गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-२९
कार्यक्रम-हमारा मुक्तक
विषय-हिन्दी
आदरणीया अन्नपूर्णा वाजपेयी जी को समर्पित
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हिन्दी मातृभाषा है इसे दिल से अपनाओ तुम
संस्कारों की जननी है इसे मत यूँ ठुकराओ तुम
चोला फेंक अंग्रेज़ी का अंधानुकरण त्यागो
ये पुरखों की विरासत है इसे मत यूँ बिसराओ तुम


गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
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हिंदी है जन जन की भाषा,हिंदी जन जन का अभिमान ,
सब को जोड़ के रखती हरदम ,हिंदी माँ भारती का मान ,
सब के हृदय में बसी हुई है हिंदी ,सब करते हैं गौरव गान
आओ अपनाएं सब हिंदी ,भारत पूतों की हिंदी है पहचान।
--महेंद्र वर्मा "धीर"



राम गोपाल गहमरी साहित्य समारोह =२९
द्वितीय चरण - मुक्तक
विषय - हिन्दी
आ. अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को सादर समर्पित -
हिंदी पेड़ की शाखाओं पर ,कभीं मिलतीं नहीं
नहि ये किसी हाट या ,बाजार में बिकतीं नहीं
हिन्दीं साहूकार की ,तिजोरी की पूजी नहीं
यह दिन दूनी रात ,चौगुनी बढ़तीं नहीं
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६

रामगोपाल गहमरी साहित्य समारोह - 29
विषय - हिन्दी
समारोह अध्यक्ष - आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को समर्पित
भाषायें तो अतिरेक हैं
सम्पन्न हिन्दी एक है
जैसा सुने अंकित करे
उद्बोध तद्सम्वेग है ।।
डा उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -29
कार्यक्रम- दिए गए बिषय पर 1 मुक्तक
बिषय - हिन्दी
समय- 12 सितम्बर समय प्रातः 10 बजे से 14 सितम्बर प्रातः 10 बजे तक
अध्यक्षा- आदरणीया अन्नपूर्ण बाजपाई जी के सन्मुख
हिंदी की महिमा है निराली
शारदे माँ की राज दुलारी ।
भाव में जिसके गंगा बहती
ये मोहन मुरली को प्यारी ।।
विनय बाली सिंह******

गोपालराम गहमरी साहित्य् समारोह -29, हमारा मुक्ततक विषय-हिंदी (दि 12-9-14)
हिन्दी में ही बोलकर रख भाषा का मान
भाषा की सम्पन्नता है हिन्दी की शान |
हीन भाव लाये बिना कर हिन्दी में बात
तब हिन्दी की विश्व में अमित बने पहचान |
-लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

गोपालराम गहमरी साहित्य् समारोह -29, हमारा मुक्ततक विषय-हिंदी
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पुलिस मिलिट्री से वानर टोली न बन जाये ॥
एटम बम से पिस्टल की गोली न बन जाये ॥
देख के अँग्रेजी के मारे हिन्दी की हालत ,
डर है कहीं वह भाषा से बोली न बन जाये ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत आदरणीया Annapurna Bajpai जी को सादर समर्पित मुक्‍तक रचना l
विषय ---हिन्‍दी
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देश की भावनाओं का अखिल अभिमान है हिन्दी,
राष्ट्रहित साधनाओं का अजब वरदान है हिन्दी।
इसे निज स्वार्थ से हटकर सियासत से अलग देखो,
विश्व साहित्य में सबसे सफल पहचान है हिन्दी।
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-विनोद
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह --29
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक के तहत दिये हुए विषय पर 1 मुक्‍तक रचना
विषय ---हिन्‍दी
समारोह अध्यक्षा आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी को सादर समर्पित ।
( साथ ही पटल के अन्य स्नेहिल एवं प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ. उनकी प्रतिक्रिया आमंत्रन के संग )
सरल, सहज , सजीव, सरस, सुसंस्कृत भाषा का प्रतिमान है हिन्दी ।
ये है गुलाबे चमन ,रूहे वतन, है माँ भारती के भाल की बिन्दी ।
प्रगति के पथ पर निरंतर चलती रहे, रोज फलती फूलती यह रहे ।
सबके हृदय में बसे, सबको ये जंचे, जन जन को लुभाती रहे हिन्दी ।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 13.09.2014

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