गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह --२७
------------------------------ ----------------
कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
अध्यक्ष --आ .कान्ती शुक्ला जी को समर्पित
------------------------------ -------------------
विषय --मुस्कुराना /हॅंसना/ खिलखिलाना /हँसी
------------------------------ --------------------
इतना दर्द दिया अपनों ने ,दर्दों से ही प्यार हो गया .
छलती रही हँसी होंठों को ,आँसू अब उपहार हो गया .
नहीं किसी से मुझे बैर था ,नहीं किसी से मेरी यारी
दौलत वालों की दुनिया में ,रिश्ता भी व्यापार हो गया .
----------------------भारती जैन -------------------
---------------------३०-८-२०१४ ---------------------
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
कार्यक्रम हमारा मुक्तक के तहत मुक्तक रचना
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना,हँसी
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.--
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना ...................
****************************** ****************************** ******
कहाँ कैसे न जाने कब ये किस्मत रूठ जायेगी,
साथ चलती धरा एक दिन यहीं पर छूट जायेगी।
जियो हर पल मुस्करा कर ये जीवन चार दिन का है,
डोर जीवन की ना जाने कहाँ पर टूट जायेगी।
------------------------------ ------------------------------ ---
-विनोद
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27 ( 29 अगस्त से 31अगस्त 2014 तक
आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत --
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना ।
दर्दे सैलाब में डुबकियाँ लगाती रही जिन्दगी |
नश्तर कभी काँटे भी ...चुभाती रही जिन्दगी |
हँसती रही...जिन्दगी..उड़ा कर हँसी बेशर्म सी...
रौशनी सी दिखी...कभी जलाती रही जिन्दगी ||
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना,हँसी
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को सादर
(अतिथि रचना )
*मुक्तक *
आते जाते गाते रहना जीवन है
खुशियाँ खूब लुटाते रहना जीवन है
जीवन है अनमोल धरोहर ईश्वर की
हँसना और हँसाते रहना जीवन है
लव कुमार 'प्रणय'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना, खिलखिलाना ।
अदा है पास आपके सारे जमाने की ,
चाहत है सभी की आपका हो जाने की,
रूप देखा सदा ही खिलखिलाता आपका
हमको भी थोडी दें वजह मुस्कुराने की !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.
------------------------------ ------------------------------ ----------------
------------------------------
कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
अध्यक्ष --आ .कान्ती शुक्ला जी को समर्पित
------------------------------
विषय --मुस्कुराना /हॅंसना/ खिलखिलाना /हँसी
------------------------------
इतना दर्द दिया अपनों ने ,दर्दों से ही प्यार हो गया .
छलती रही हँसी होंठों को ,आँसू अब उपहार हो गया .
नहीं किसी से मुझे बैर था ,नहीं किसी से मेरी यारी
दौलत वालों की दुनिया में ,रिश्ता भी व्यापार हो गया .
----------------------भारती जैन -------------------
---------------------३०-८-२०१४
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
कार्यक्रम हमारा मुक्तक के तहत मुक्तक रचना
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.--
दुनियां को इंसानियत से सजाने दीजिये
कलियों को चमन में मुस्कुराने दीजिये
नारी बिन मनुष्य का निशान खो जायेगा
बेटियों को भी यहाँ खिलखिलाने दीजिये
--- मँजु शर्मा ३०-०८-२०१४
कलियों को चमन में मुस्कुराने दीजिये
नारी बिन मनुष्य का निशान खो जायेगा
बेटियों को भी यहाँ खिलखिलाने दीजिये
--- मँजु शर्मा ३०-०८-२०१४
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
******************************
कहाँ कैसे न जाने कब ये किस्मत रूठ जायेगी,
साथ चलती धरा एक दिन यहीं पर छूट जायेगी।
जियो हर पल मुस्करा कर ये जीवन चार दिन का है,
डोर जीवन की ना जाने कहाँ पर टूट जायेगी।
------------------------------
-विनोद
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27 ( 29 अगस्त से 31अगस्त 2014 तक
आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत --
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
दर्दे सैलाब में डुबकियाँ लगाती रही जिन्दगी |
नश्तर कभी काँटे भी ...चुभाती रही जिन्दगी |
हँसती रही...जिन्दगी..उड़ा कर हँसी बेशर्म सी...
रौशनी सी दिखी...कभी जलाती रही जिन्दगी ||
-----------------#अलका गुप्ता -------------------
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =
मुक्तक
शीर्षक -मुस्कुराना /हँसना/खिलखिलाना /हँसी
विधा -मुक्तक
बहर= २२१२,१२२
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को संबोधित
चलना सिखा दिया है ,फसना सिखा दिया हैं
घनघोर आँधियों में ,हँसना सिखा दिया हैं
माँ ने हमें दिया हैं ,अपना पुनीत आँचल
इस प्यार के सहारे , बसना सिखा दिया हैं
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना,हँसी
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी
------------------------------ --------------
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =
मुक्तक
शीर्षक -मुस्कुराना /हँसना/खिलखिलाना /हँसी
विधा -मुक्तक
बहर= २२१२,१२२
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को संबोधित
चलना सिखा दिया है ,फसना सिखा दिया हैं
घनघोर आँधियों में ,हँसना सिखा दिया हैं
माँ ने हमें दिया हैं ,अपना पुनीत आँचल
इस प्यार के सहारे , बसना सिखा दिया हैं
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी
------------------------------
कैसी खुशियां कैसा गम है ,
जीवन अपना कितना कम है ,
आओ बांटें खुशियां जग को ,
देखें किसमे कितना दम है।
------
महेंद्र वर्मा "धीर"
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना ...................
जीवन अपना कितना कम है ,
आओ बांटें खुशियां जग को ,
देखें किसमे कितना दम है।
------
महेंद्र वर्मा "धीर"
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
कंटक तेरी राहों के मैं हँस - हँस कर चुन लूंगी
पलकों में नवयौवन के सुन्दर सपने बुन लूंगी
शूल चुभन की गहन तड़प को पी लूंगी अधरों से
स्वयं समर्पण करके मैं पल पल जीवन गुन लूंगी.............DR. SHIPRA
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह --२७
कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
विषय --मुस्कुराना /हॅंसना/ खिलखिलाना /हँसी
अध्यक्ष --आ Kanti Shukla जी को सादर समर्पित
============================== ====
हँसना और हँसाना सीखो
गम को दूर भगाना सीखो
नफरत करने वाले के भी
दिल में प्यार जगाना सीखो
पलकों में नवयौवन के सुन्दर सपने बुन लूंगी
शूल चुभन की गहन तड़प को पी लूंगी अधरों से
स्वयं समर्पण करके मैं पल पल जीवन गुन लूंगी.............DR. SHIPRA
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह --२७
कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
विषय --मुस्कुराना /हॅंसना/ खिलखिलाना /हँसी
अध्यक्ष --आ Kanti Shukla जी को सादर समर्पित
==============================
हँसना और हँसाना सीखो
गम को दूर भगाना सीखो
नफरत करने वाले के भी
दिल में प्यार जगाना सीखो
~रमा वर्मा~
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ~27
हमारा मुक्तक(द्वितीय चरण)के अन्तर्गत
विषय~मुस्कराहट,हँसना आदि
आदरणीया कार्यक्रम प्रमुख कांति शुक्ला जी के सम्मुख सादर प्रस्तुत~
Write a comment...
हमारा मुक्तक(द्वितीय चरण)के अन्तर्गत
विषय~मुस्कराहट,हँसना आदि
आदरणीया कार्यक्रम प्रमुख कांति शुक्ला जी के सम्मुख सादर प्रस्तुत~
आके कहाँ बसी है ,इंसान की नगरी।
जाने कहाँ गयी है,मुस्कान की नगरी।
खोये हो अपने आप मे,होश नही है,
शायद नही रही ये,भगवान की नगरी ।
जाने कहाँ गयी है,मुस्कान की नगरी।
खोये हो अपने आप मे,होश नही है,
शायद नही रही ये,भगवान की नगरी ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को सादर
(अतिथि रचना )
*मुक्तक *
आते जाते गाते रहना जीवन है
खुशियाँ खूब लुटाते रहना जीवन है
जीवन है अनमोल धरोहर ईश्वर की
हँसना और हँसाते रहना जीवन है
लव कुमार 'प्रणय'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना, खिलखिलाना ।
अदा है पास आपके सारे जमाने की ,
चाहत है सभी की आपका हो जाने की,
रूप देखा सदा ही खिलखिलाता आपका
हमको भी थोडी दें वजह मुस्कुराने की !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.
------------------------------
सुबह की पहली किरण देख फूल मुस्कुरा उठे ,
फूलों को मुस्काते देख नौनिहाल मुस्कुरा उठे
जीवन कितना अनमोल है इन्हे देखो जरा
मुफ़लिसी मे भी, वो बाशिंदे मुस्कुरा उठे । .........अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-27
शीर्षक- मुस्कुराना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्ष आदरणीया Kanti Shukla जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक।
मापनी 2122×4
********
सह चुका काफी सितम सबको बताना चाहता है
फूलों को मुस्काते देख नौनिहाल मुस्कुरा उठे
जीवन कितना अनमोल है इन्हे देखो जरा
मुफ़लिसी मे भी, वो बाशिंदे मुस्कुरा उठे । .........अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-27
शीर्षक- मुस्कुराना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्ष आदरणीया Kanti Shukla जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक।
मापनी 2122×4
********
सह चुका काफी सितम सबको बताना चाहता है
गान वन्दे मातरम फिर --गुनगुनाना चाहता है
वाद हो प्रतिवाद हो या युद्ध की ललकार बेशक
जिस तरह भी हो तिरंगा मुस्कुराना चाहता है
कैलाश भारद्वाज
फरीदाबाद
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना,हँसी
****************************** **********************'
वाद हो प्रतिवाद हो या युद्ध की ललकार बेशक
जिस तरह भी हो तिरंगा मुस्कुराना चाहता है
कैलाश भारद्वाज
फरीदाबाद
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
******************************
दोस्ती हो या दुश्मनी मुस्कराया करो
जिंदगी दो पल की खूब खिलखिलाया करो
जाने कौन सा पल अंतिम आस हो जाये
जीवन का लुफ्त भी मौज से उठाया करो !!
** आलोक **
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27 ( 29 अगस्त से 31अगस्त 2014 तक
आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत =
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना ।
कठिन राह को सुगम राह बना हँसना सीखा गया कोई
अँधेरी रात में हँसते हँसाते दीपक जला गया कोई
चीर हरण करता रहा जब तलक वह पापी दुशासन
अरे तभी चीर अबला का बढाता ही चला गया कोई ||
-लक्ष्मण रामानुज लडीवाला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
****************************** **************
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.
****************************** ****************************** *********
जिंदगी दो पल की खूब खिलखिलाया करो
जाने कौन सा पल अंतिम आस हो जाये
जीवन का लुफ्त भी मौज से उठाया करो !!
** आलोक **
Write a comment...
आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत =
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
कठिन राह को सुगम राह बना हँसना सीखा गया कोई
अँधेरी रात में हँसते हँसाते दीपक जला गया कोई
चीर हरण करता रहा जब तलक वह पापी दुशासन
अरे तभी चीर अबला का बढाता ही चला गया कोई ||
-लक्ष्मण रामानुज लडीवाला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
******************************
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत.
******************************
मुस्कान इक दूसरे में जान.. भरती है
गैरों के भी साथ पहचान ....करती है
बिन पैसों के लाती है ढेरों... खुशियाँ
प्रेमियों के दिलों में उत्साह भरती है ............ कल्पना मिश्रा बाजपेई
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
गैरों के भी साथ पहचान ....करती है
बिन पैसों के लाती है ढेरों... खुशियाँ
प्रेमियों के दिलों में उत्साह भरती है ............ कल्पना मिश्रा बाजपेई
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
मधुर मधुर मंद मंद मोहन मुस्कावें ।
माॅखन मुख लेप लेप अनुपम सुख पावें ।।
पुलक पुलक लिपट धाय जसुमति दुलरातीं ।
लीला कर कोटि कोटि मटक मटक जावें ।।
डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31
अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति
शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,
खिलखिलाना ।
---------------
चाह के कोई काँटे उगाता नहीं ,
जो रुपा था उगा मन को भाता नहीं ,
कर्म जैसा किया फल भी वैसा मिला ,
फल मिला पाके क्यों मुस्कुराता नहीं ?
---महेश जैन 'ज्योति' ,मथुरा ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
बात पर हंसी आये तो अब हंसना क्या
बात बात पर गुस्से से अब रूठना क्या
बहस बहस बनती आदत अब उनकी हो
एक दूज बीच झमेले फिर फसना क्या
पवन बत्तरा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना ...................
माॅखन मुख लेप लेप अनुपम सुख पावें ।।
पुलक पुलक लिपट धाय जसुमति दुलरातीं ।
लीला कर कोटि कोटि मटक मटक जावें ।।
डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31
अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति
शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,
खिलखिलाना ।
---------------
चाह के कोई काँटे उगाता नहीं ,
जो रुपा था उगा मन को भाता नहीं ,
कर्म जैसा किया फल भी वैसा मिला ,
फल मिला पाके क्यों मुस्कुराता नहीं ?
---महेश जैन 'ज्योति' ,मथुरा ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
बात पर हंसी आये तो अब हंसना क्या
बात बात पर गुस्से से अब रूठना क्या
बहस बहस बनती आदत अब उनकी हो
एक दूज बीच झमेले फिर फसना क्या
पवन बत्तरा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -27
( 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31अगस्त 2014 रविवार तक)
कार्यक्रम अध्यक्ष -सम्मान्य कान्ति शुक्ला जी की प्रतिष्ठा में
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
अधिकार पा कर मुस्कराना अच्छा लगता |
अपने गुनाहों को छुपाना अच्छा लगता ||
कभी अपनी कमी को देखता नही यारों |
कमी औरो की नित उड़ाना अच्छा लगता ||
.............................. .........................
.............................. ...कौशल अस्थाना
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
अपने गुनाहों को छुपाना अच्छा लगता ||
कभी अपनी कमी को देखता नही यारों |
कमी औरो की नित उड़ाना अच्छा लगता ||
..............................
..............................
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 27
( हमारा मुक्तक के अंतर्गत )
विषय - मुस्कराना / हॅसना / खिलखिलाना
समारोह अध्यक्षा - आदरणीया कान्ति शुक्ला जी के समक्ष प्रस्तुत
सोच-सोच कर न तुम कभी मुस्कुराया करो,
हँस-हँस ही हरदम,हँसी के मोती लुटाया करो।
परवरदिगार का सबसे नायब तोहफा है हँसी ;
खोल सब गिरह,खूब खुल,खिलखिलाया करो। ।
मीना मिश्रा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्तक के तहत मुक्तक रचना
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना,हँसी
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को सादर सप्रेम समर्पित ....!
============================== ======================
हँस-हँस ही हरदम,हँसी के मोती लुटाया करो।
परवरदिगार का सबसे नायब तोहफा है हँसी ;
खोल सब गिरह,खूब खुल,खिलखिलाया करो। ।
मीना मिश्रा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
कार्यक्रम हमारा मुक्तक के तहत मुक्तक रचना
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी को सादर सप्रेम समर्पित ....!
==============================
ग़मों के खौफ से क्या हम मुस्कराना छोड़ दें....?
आंधियों के जोर से क्या दिए जलाना छोड़ दें ...?
माना की मुहब्ब्बत के लाख दुश्मन हैं मगर ,
क्या प्रेम का हम आशियाना बनाना छोड़ दें ...?
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-२७
२९ अगस्त से ३१ अगस्त प़ात:१० बजे तक ।
( हमारा मुक्तक के अन्तर्गत )
विषय-मुस्कराना/हँसना/खिलखिलाना
( अतिथि रचना )
आंधियों के जोर से क्या दिए जलाना छोड़ दें ...?
माना की मुहब्ब्बत के लाख दुश्मन हैं मगर ,
क्या प्रेम का हम आशियाना बनाना छोड़ दें ...?
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-२७
२९ अगस्त से ३१ अगस्त प़ात:१० बजे तक ।
( हमारा मुक्तक के अन्तर्गत )
विषय-मुस्कराना/हँसना/खिलखिलाना
( अतिथि रचना )
बेवशों और शोषितों से दिल लगाना सीख लो ।
कंटकों के कठिन पथ पर पग जमाना सीख लो ।
फिर नहीं वीरान हो सकती तुम्हारे दिल की बस्ती-
यदि कहीं निश्छल हृदय से मुस्कराना सीख लो ।
कान्ति शुक्ला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल ाना,हँसी
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी
मुक्तक-
हँसी है वही जो कि सबको हँसी दे.
खुशी है वही जो कि सबको खुशी दे.
वही दीप है जो हटाकर अँधेरा,
हर इक ओर कर रोशनी-रोशनी दे.
-----डाॅ.कमलेश द्विवेदी
----- मो.09415474674
कंटकों के कठिन पथ पर पग जमाना सीख लो ।
फिर नहीं वीरान हो सकती तुम्हारे दिल की बस्ती-
यदि कहीं निश्छल हृदय से मुस्कराना सीख लो ।
कान्ति शुक्ला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह --27
दिनांक 29 अगस्त प्रात:10 बजे से 31 अगस्त 2014 रविवार प्रात:10 बजे तक
विषय---मुस्कुराना,हँसना,खिलखिल
कार्यक्रम अध्यक्ष --आदरणीया कान्ती शुक्ला जी
मुक्तक-
हँसी है वही जो कि सबको हँसी दे.
खुशी है वही जो कि सबको खुशी दे.
वही दीप है जो हटाकर अँधेरा,
हर इक ओर कर रोशनी-रोशनी दे.
-----डाॅ.कमलेश द्विवेदी
----- मो.09415474674
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह --२७
----------------------------------------------
कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
अध्यक्ष --आ .कान्ती शुक्ला जी को समर्पित
-------------------------------------------------...
See More
----------------------------------------------
कार्यक्रम --हमारा मुक्तक
अध्यक्ष --आ .कान्ती शुक्ला जी को समर्पित
-------------------------------------------------...
See More
No comments:
Post a Comment