गोपाल राम गहमरी साहित्यिक समारोह-25
द्वतीय चरण- हमारा मुक्तक
बिषय- आर्यावर्त/ भारत
ँँँ
आदरणीय अध्यक्ष उमेश श्रीवास्तव जी को सादर समर्पित
ँँँँ
उठो जवान नींद से प्रचंड रूप धारिये।
भुजंग ब्याल काल को तुरंत ही मिटाइये।
जमीन आर्य की यहाँ बटी द्विभाग खंड मे।
मिला के' हिन्द पाक को भारत तुम बनाइये।
ँँँ
करन सिंह परिहार
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~2
द्वितीय चरण~हमारा मुक्तक
विषय~हिन्दुस्तान,भारत,देश आदि
अध्यक्ष श्री उमेश श्रीवास्तव जी को समर्पित
-------------------------------------------------------------------------
वतन की रात में ये सिर भले कुर्वान हो जाये,
सत्य कहना देश हित में सदा ईमान हो जाये।
मरण तो सत्य जीवन का मगर है कामना इतनी,
जहाँ आँखें खुलें मेरी वो हिन्दुस्तान हो जाये।
----------------------------------------------------------------
-विनोद
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~2
द्वितीय चरण~हमारा मुक्तक
विषय~हिन्दुस्तान,भारत,देश आदि
अध्यक्ष श्री उमेश श्रीवास्तव
जी को समर्पित
।
-------------
* अतिथि रचना *
सदाँ शांति की लिखे इबारत ,
नफरत की ना करे तिज़ारत ,
माता कहते जिसे निवासी ,
सभी जानते वो है भारत ।
-----
महेश जैन 'ज्योति',
मथुरा ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-25
दिनांक 15 अगस्त समय प्रातः 10 बजे से 16 अगस्त प्रातः 10 बजे तक।
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
मुक्तक - देश, वतन, राष्ट्र, हिंदुस्तान, आर्यावर्त, आदि
द्वतीय चरण- हमारा मुक्तक
बिषय- आर्यावर्त/ भारत
ँँँ
आदरणीय अध्यक्ष उमेश श्रीवास्तव जी को सादर समर्पित
ँँँँ
उठो जवान नींद से प्रचंड रूप धारिये।
भुजंग ब्याल काल को तुरंत ही मिटाइये।
जमीन आर्य की यहाँ बटी द्विभाग खंड मे।
मिला के' हिन्द पाक को भारत तुम बनाइये।
ँँँ
करन सिंह परिहार
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~2
द्वितीय चरण~हमारा मुक्तक
विषय~हिन्दुस्तान,भारत,देश आदि
अध्यक्ष श्री उमेश श्रीवास्तव जी को समर्पित
-------------------------------------------------------------------------
वतन की रात में ये सिर भले कुर्वान हो जाये,
सत्य कहना देश हित में सदा ईमान हो जाये।
मरण तो सत्य जीवन का मगर है कामना इतनी,
जहाँ आँखें खुलें मेरी वो हिन्दुस्तान हो जाये।
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-विनोद
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~2
द्वितीय चरण~हमारा मुक्तक
विषय~हिन्दुस्तान,भारत,देश आदि
अध्यक्ष श्री उमेश श्रीवास्तव
जी को समर्पित
।
-------------
* अतिथि रचना *
सदाँ शांति की लिखे इबारत ,
नफरत की ना करे तिज़ारत ,
माता कहते जिसे निवासी ,
सभी जानते वो है भारत ।
-----
महेश जैन 'ज्योति',
मथुरा ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा जी को सादर समर्पित
धरा युग सुंदरी चंचल है उसका मन मेरा भारत
कि जैसे अप्सरा दुनियां मगर यौवन मेरा भारत
खुदा ने खेलने को मिट्टी का इक घर बनाया था
दरो दीवार सब संसार पर आँगन मेरा भारत
नितिन सिकरवार 'पागल'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -25
दि. 15 अगस्त 2014 प़ात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 प़ात:10 बजे तक
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
विषय- देश/भारत/भारतवर्ष/हिन्दुस्तान/आर्यावर्त्त
अध्यक्ष- सम्मान्य श्री उमेश श्रीवास्तव जी को सादर समर्पित ।
रामगोपाल गहमरी
साहित्य समारोह - 25
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
आ.
धरा युग सुंदरी चंचल है उसका मन मेरा भारत
कि जैसे अप्सरा दुनियां मगर यौवन मेरा भारत
खुदा ने खेलने को मिट्टी का इक घर बनाया था
दरो दीवार सब संसार पर आँगन मेरा भारत
नितिन सिकरवार 'पागल'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -25
दि. 15 अगस्त 2014 प़ात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 प़ात:10 बजे तक
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
विषय- देश/भारत/भारतवर्ष/हिन्दुस्तान/आर्यावर्त्त
अध्यक्ष- सम्मान्य श्री उमेश श्रीवास्तव जी को सादर समर्पित ।
आज भारत में अनेकों भ़ष्ट रावण हो रहे ।
स्वर्ण लंका निज बनाने बीज विष के बो रहे ।
दुराचारों अनाचारों की कथाएँ आम हैं अब -
बाग के रक्षक ही चिंता मुक्त हो क्या सो रहे ।
कान्ति शुक्ला
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-25
दिनांक 15 अगस्त समय प्रातः 10 बजे से 16 अगस्त प्रातः 10 बजे तक।
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा जी को समर्पित
मुक्तक - देश, वतन, राष्ट्र, हिंदुस्तान, आर्यावर्त, आदि
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
स्वर्ण लंका निज बनाने बीज विष के बो रहे ।
दुराचारों अनाचारों की कथाएँ आम हैं अब -
बाग के रक्षक ही चिंता मुक्त हो क्या सो रहे ।
कान्ति शुक्ला
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-25
दिनांक 15 अगस्त समय प्रातः 10 बजे से 16 अगस्त प्रातः 10 बजे तक।
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा जी को समर्पित
मुक्तक - देश, वतन, राष्ट्र, हिंदुस्तान, आर्यावर्त, आदि
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
तिरंगे की बड़ी शान को रखना
इसके उड़ते अभिमान को रखना
जब ये लहराता हवां में जोर से
देश के शहीदों का ध्यान रखना
~~ आलोक ~~
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
इसके उड़ते अभिमान को रखना
जब ये लहराता हवां में जोर से
देश के शहीदों का ध्यान रखना
~~ आलोक ~~
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तव --
तुम कहते हमारा है हम कहते हमारा है.
कयोंकि हम दोनों को यह जान से प्यारा है.
भारत के गुलशन को दे करके लहू अपना,
तुमने भी सँवारा है हमने भी सँवारा है.
डाॅ.कमलेश द्विवेदी
मो.09415474674
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - २५
द्वितीय चरण -- हमारा मुक्तक
विषय - भारत , देश , आर्यावृत ,राष्ट्र.....आदि
आदरणीय अध्यछ् जी एवं समस्त समारोह साथियो
आपके समारोह में पहली बार प्रस्तुत हो रहा हूँ |
प्रार्थी हूं आप सभी से अपनी त्रुटियों हेतु...
तुम कहते हमारा है हम कहते हमारा है.
कयोंकि हम दोनों को यह जान से प्यारा है.
भारत के गुलशन को दे करके लहू अपना,
तुमने भी सँवारा है हमने भी सँवारा है.
डाॅ.कमलेश द्विवेदी
मो.09415474674
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - २५
द्वितीय चरण -- हमारा मुक्तक
विषय - भारत , देश , आर्यावृत ,राष्ट्र.....आदि
आदरणीय अध्यछ् जी एवं समस्त समारोह साथियो
आपके समारोह में पहली बार प्रस्तुत हो रहा हूँ |
प्रार्थी हूं आप सभी से अपनी त्रुटियों हेतु...
आआे मिल कर एक बार फिर अश्वमेघ कर डाले |
विश्वजयी का विजय माल फिर भारत माँ पर डालें|
तब होगा संकल्प पूर्ण आे आर्यावृत के वीरो.........,
चढ़ कैलाश शिखर पर अपने ध्वज को फहरा डाले|
{ अनुपम आलोक }
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि
विश्वजयी का विजय माल फिर भारत माँ पर डालें|
तब होगा संकल्प पूर्ण आे आर्यावृत के वीरो.........,
चढ़ कैलाश शिखर पर अपने ध्वज को फहरा डाले|
{ अनुपम आलोक }
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि
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प्रेम सौहार्द और न्याय का प्रतीक तिरंगा
भारत के गौरव,सम्मान का प्रतीक तिरंगा
लहराये हरदम और राष्ट्र की शान बढ़ाए
सदा ही रहे अभिमान का प्रतीक तिरंगा ॥ ..............अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,वतन , राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय Umesh Srivastava जी को सादर समर्पित
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प्रेम सौहार्द और न्याय का प्रतीक तिरंगा
भारत के गौरव,सम्मान का प्रतीक तिरंगा
लहराये हरदम और राष्ट्र की शान बढ़ाए
सदा ही रहे अभिमान का प्रतीक तिरंगा ॥ ..............अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,वतन , राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय Umesh Srivastava जी को सादर समर्पित
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वतन प्यारा हमारा है, इसे मिलकर सजाना है
जवानों की शहादत को नहीं दिल से भुलाना है
बढ़ाएंगे तिरंगे का......सदा सम्मान दुनिया में
यहाँ सदभाव का दरिया...हमे हरदम बहाना है
~रमा वर्मा~ (१५-८-१४)
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-25
दिनांक 15 अगस्त समय प्रातः 10 बजे से 16 अगस्त प्रातः 10 बजे तक।
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
मुक्तक - देश, वतन, राष्ट्र, हिंदुस्तान, आर्यावर्त, आदि
जवानों की शहादत को नहीं दिल से भुलाना है
बढ़ाएंगे तिरंगे का......सदा सम्मान दुनिया में
यहाँ सदभाव का दरिया...हमे हरदम बहाना है
~रमा वर्मा~ (१५-८-१४)
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-25
दिनांक 15 अगस्त समय प्रातः 10 बजे से 16 अगस्त प्रातः 10 बजे तक।
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
मुक्तक - देश, वतन, राष्ट्र, हिंदुस्तान, आर्यावर्त, आदि
रंग हरा बतलाता है हम गीत अमन का गाते है
सादा रंग सुनाता है हम प्रेम सुधा बरसाते है।
तिरंगे का रंग तीसरा केशरिया जो करे बखान
देश की मान पे आन पड़े तो हसते ही मिट जाते है।
विनय बाली सिंह**********
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाए एवं बधाई। जय हिन्द
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक-15 अगस्त 2014
द्वितीय चरण-हमारा मुक्तक
विषय-देश, राष्ट्र, वतन, भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान आदि ।
अध्यक्ष-आदरणीय उमेश श्रीवास्तव जी को सादर
सादा रंग सुनाता है हम प्रेम सुधा बरसाते है।
तिरंगे का रंग तीसरा केशरिया जो करे बखान
देश की मान पे आन पड़े तो हसते ही मिट जाते है।
विनय बाली सिंह**********
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाए एवं बधाई। जय हिन्द
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक-15 अगस्त 2014
द्वितीय चरण-हमारा मुक्तक
विषय-देश, राष्ट्र, वतन, भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान आदि ।
अध्यक्ष-आदरणीय उमेश श्रीवास्तव जी को सादर
मुक्तक-
भारत की सेना में हूँ, सैनिक अब लिख देना;
करलूँ वसुधा की सेवा, सेवक तब लिख देना;
लाश गिरे जब भी मेरी, अपनी पुण्यजमीं पर;
रज से माथे पर मेरे, भारत सब लिख देना ॥
( नागेन्द्र सिंह निरवाण )
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 2
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया
सम्मान्य अध्यक्ष आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा जी के सम्मान मे सादर समर्पित
भारत की सेना में हूँ, सैनिक अब लिख देना;
करलूँ वसुधा की सेवा, सेवक तब लिख देना;
लाश गिरे जब भी मेरी, अपनी पुण्यजमीं पर;
रज से माथे पर मेरे, भारत सब लिख देना ॥
( नागेन्द्र सिंह निरवाण )
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 2
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया
सम्मान्य अध्यक्ष आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा जी के सम्मान मे सादर समर्पित
स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर एक आह्वाहन देश के नेताओं के लिए कि अडिग
हो जाये हमारा विश्वास उनके प्रति जिनको हम चुनते है और सौपते है अपने देश
की बागडोर....................................
मायामोह के लोभ मे फंसकर, करो ना देश का बंटाधार
गांधी,नेहरू,सुभाष सा बनकर,अब बनो देश के कर्णधार
सत्कर्म करो की मान बढ़े, नेताओं पर जन विश्वास बढे
विध्वंस तो बहुत कर चुके, अब करो देश का कुछ उद्धार...........DR.SHIPRA
मायामोह के लोभ मे फंसकर, करो ना देश का बंटाधार
गांधी,नेहरू,सुभाष सा बनकर,अब बनो देश के कर्णधार
सत्कर्म करो की मान बढ़े, नेताओं पर जन विश्वास बढे
विध्वंस तो बहुत कर चुके, अब करो देश का कुछ उद्धार...........DR.SHIPRA
रामगोपाल गहमरी
साहित्य समारोह - 25
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
आ.
आज स्वाधीनता पर्व पर
आपके लिए शुभकामनाएँ -
यह हिमालय सिर उठाये देश मेँ जब खडा हैँ ,
और उत्तर की दिशा मेँ जब तलक बहती है गंगा ।
जब तलक हैँ चाँद सूरज जब तलक धरती गगन हैँ,
तब तलक फहरे निरन्तर विश्व मेँ अपना तिरंगा ।।
. . . . . . . . . . . . पल्लव *
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,वतन , राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा को सादर
आपके लिए शुभकामनाएँ -
यह हिमालय सिर उठाये देश मेँ जब खडा हैँ ,
और उत्तर की दिशा मेँ जब तलक बहती है गंगा ।
जब तलक हैँ चाँद सूरज जब तलक धरती गगन हैँ,
तब तलक फहरे निरन्तर विश्व मेँ अपना तिरंगा ।।
. . . . . . . . . . . . पल्लव *
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,वतन , राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा को सादर
*मुक्तक*
ये धरा सबकी धरा है ये गगन सबका गगन
फूल हर रँग के खिले हैं ये चमन सबका चमन
कह रहीं हैं ये सदायें ये हवायें कह रहीं
प्रेम से मिलकर रहो तुम ये वतन सबका वतन
लव कुमार 'प्रणय'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~2
द्वितीय चरण~हमारा मुक्तक
विषय~हिन्दुस्तान,भारत,देश आदि
अध्यक्ष श्री उमेश श्रीवास्तव जी को समर्पित
ये धरा सबकी धरा है ये गगन सबका गगन
फूल हर रँग के खिले हैं ये चमन सबका चमन
कह रहीं हैं ये सदायें ये हवायें कह रहीं
प्रेम से मिलकर रहो तुम ये वतन सबका वतन
लव कुमार 'प्रणय'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~2
द्वितीय चरण~हमारा मुक्तक
विषय~हिन्दुस्तान,भारत,देश आदि
अध्यक्ष श्री उमेश श्रीवास्तव जी को समर्पित
गीतोँ मे जग की पीर लिखो।
मन ओज भरो,जब तीर लिखो।
अब बहे पसीना मेहनत का।
बस भारत की तक़दीर लिखो।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तव --
=============================================
मन ओज भरो,जब तीर लिखो।
अब बहे पसीना मेहनत का।
बस भारत की तक़दीर लिखो।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तव --
=============================================
जागो जागो हे भारत वासी,अब भारत माँ का श्रंगार करो....!
आज़ादी की सालगिरह पर, खुल कर जय-जय कार करो ....!
जिनकी कुर्बानियों से आज ये सुनहरा पल हमने पाया है
"संतोष' उन अमर शहीदों को,दिल से नमन बार बार करो ...!
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक के अंतर्गत :
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
आज़ादी की सालगिरह पर, खुल कर जय-जय कार करो ....!
जिनकी कुर्बानियों से आज ये सुनहरा पल हमने पाया है
"संतोष' उन अमर शहीदों को,दिल से नमन बार बार करो ...!
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक के अंतर्गत :
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा जी को सादर समर्पित
( साथ ही अन्य प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ, प्रतिक्रिया आमंत्रण के साथ )
विषय : भारत ।
प्रेम भक्ति का सुधारस बरसाता हुआ, ........ .. खूशबुओं के हाथों लिखा तहरीर है कोई।
भारत महज विश्व का एक वतन ही नहीं, ,,,,,,,,एक चहकते गुलशन की तस्वीर है कोई ।
हरित धरा पर, पावस नदियों का संगम, ........... सूर्य चन्द्र, तारे, मुकुट रत्नाकर है यहाँ,
जन्म लेने को तरसते रहते हैं देवता जहाँ, मानो स्वर्ग से भी मनोरम यह उपवन हो कोई ।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 15.08.2014
( साथ ही अन्य प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ, प्रतिक्रिया आमंत्रण के साथ )
विषय : भारत ।
प्रेम भक्ति का सुधारस बरसाता हुआ, ........ .. खूशबुओं के हाथों लिखा तहरीर है कोई।
भारत महज विश्व का एक वतन ही नहीं, ,,,,,,,,एक चहकते गुलशन की तस्वीर है कोई ।
हरित धरा पर, पावस नदियों का संगम, ........... सूर्य चन्द्र, तारे, मुकुट रत्नाकर है यहाँ,
जन्म लेने को तरसते रहते हैं देवता जहाँ, मानो स्वर्ग से भी मनोरम यह उपवन हो कोई ।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 15.08.2014
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-25
दिनांक 15 अगस्त समय प्रातः 10 बजे से 16 अगस्त प्रातः 10 बजे तक।
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
मुक्तक - देश, वतन, राष्ट्र, हिंदुस्तान, आर्यावर्त, आदि
रख हथेली पर अपनी जान शीश कटाने को तैयार है
अपने वतन की खातिर वह मर मिटने को तैयार है
अपने माँ बाप बीवी बच्चों से कोसों दूर सरहद पर
दिल और जान से मान तिरंगे का रखने को तैयार है
रेखा जोशी
गोपाल गहमरी साहित्य समारोह =२५
दुतिये चरण -हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा
भारत माता के गौरव हो ,तुम तो सभी सृजन सेनानी
मातृभूमि के लिए दियें हैं ,तुमने प्राण सभी बलदानी
देश धर्म के लिए तुम्हे फिर ,तूफानों से टकराना हैं
नवयुग सिर्ष्टा के सैनिक हों ,तुमतो सभी विश्व निर्माणी
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
अपने वतन की खातिर वह मर मिटने को तैयार है
अपने माँ बाप बीवी बच्चों से कोसों दूर सरहद पर
दिल और जान से मान तिरंगे का रखने को तैयार है
रेखा जोशी
गोपाल गहमरी साहित्य समारोह =२५
दुतिये चरण -हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
अध्यक्ष -- आदरणीय उमेश श्रीवास्तवा
भारत माता के गौरव हो ,तुम तो सभी सृजन सेनानी
मातृभूमि के लिए दियें हैं ,तुमने प्राण सभी बलदानी
देश धर्म के लिए तुम्हे फिर ,तूफानों से टकराना हैं
नवयुग सिर्ष्टा के सैनिक हों ,तुमतो सभी विश्व निर्माणी
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।
आज़ादी मिली कुर्बानियो से
जानो तुम शहीद कहानियो से
दौड़े खून उनकी जब रगो में
देखकर देश परेशानियों से
पवन बत्तरा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।..
जानो तुम शहीद कहानियो से
दौड़े खून उनकी जब रगो में
देखकर देश परेशानियों से
पवन बत्तरा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 25
दिनांक- 15 अगस्त 2014 प्रात: 10 बजे से 17 अगस्त 2014 तक प्रात: 10 बजे तक
द्वितीय चरण --हमारा मुक्तक
विषय- देश,राष्ट्र,भारत, भारतवर्ष,हिन्दुस्तान, आर्यावर्त,इंडिया आदि।..
डरते नहीं हम कभी, किसी आंधी-तूफ़ान को ,
ऊँचा रखेंगे हर हाल,विश्व में तेरी शान को।
नहीं झुकेगा शीश कभी दुश्मनों के सामने ;
लुटा देंगे सर्वस्व इस राष्ट्र-ध्वज महान को। ।
मीना मिश्रा
ऊँचा रखेंगे हर हाल,विश्व में तेरी शान को।
नहीं झुकेगा शीश कभी दुश्मनों के सामने ;
लुटा देंगे सर्वस्व इस राष्ट्र-ध्वज महान को। ।
मीना मिश्रा