Sunday, 17 August 2014

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24 दिनांक 8 से 10 अगस्‍त तक हमारा मुक्‍तक अध्‍यक्ष शिल्‍पा शिल्‍पी जी सारी रचना एक साथ

विजेता ''कैलाश चंद प्रथम , दूसरा ---रमा वर्मा 
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-24
द्वितीय चरण
कार्यक्रम- हमारा मुक्तक
शीर्षक- परदेस/विदेश/पर्यायवाची
समारोह अध्यक्ष -आदरणीया शिप्रा शिल्पी जी के समक्ष प्रस्तुत रचना ।
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गोरे हाथो की मेहँदी भी सुखी नही, हमवतन बालमा बेवतन हो गये
चार दिन की सुहागन को तज कर चले, कितने बैरी हमारे सजन हो गये
चूड़ियों की खनक पायलों की झनक, और दमक मेरे चेहरे की बेजा हुई
यूँ लुभाया सखी उनको परदेस ने, स्वप्न सारे सिंदूरी हवन हो गये।

~कैलाश भारद्वाज

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24 द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक
विषय ---परदेश, विदेश
8 August 2014 दिन शुक्रवार
कार्यक्रम अध्‍यक्ष-- आदरणीया शिप्रा शिल्‍पी जी को समर्पित
====मुक्तक ====
हमारे प्यार की खुशबू उसी के ठाँव तक पहुँचे।
हमारी प्रीत की पायल उसी के पाँव तक पहुँचे।
हमारा नेह उसको एक दिन इतना विवश कर दे,
कि वो परदेश से चलकर हमारे गाँव तक पहुंचे।
-----------------------------डॉ.कमलेश द्विवेदी
-------------------------- मो.09415474674

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 24
द्वितीय चरण
कार्यक्रम - हमारा मुक्तक
बिषय - परदेश, विदेश
समय- 08 अगस्त दिन शुक्रवार प्रातः 10 बजे से 10 अगस्त प्रातः 10 बजे तक।
अध्यक्ष- आदरणीया शिप्रा शिल्पी जी के सन्मुख अर्पित।
खोज ना कोई खबर मकान क्यों बदल दिया
देख हुस्न गैर का अंदाज क्यों बदल दिया ।
जो गए परदेश माना दोस्त भी नए मिले
पर हमारे इश्क का अंजाम क्यों बदल दिया।।
@@ विनय बाली सिंह @@

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक -विषय ---परदेश, विदेश,
समय--8 August 2014 दिन शुक्रवार प्रात:10 बजे से 10 august प्रात: 10 बजे तक
कार्यक्रम अध्‍यक्ष-- आदरणीया Shipra Shilpi जी|
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पास में हो और स्वदेश में हो,
खास में हो और विशेष में हो,
तुम्हारा न मिलना समझा नहीं,
अब यह समझूंगा विदेश में हो ||
उद्धव देवली/८/८/२०१४|
S.r. Pallav
गोपाल राम गहमरी
साहित्य समारोह - 24
द्वितीय चरण -
कार्यक्रम - हमारा मुक्तक
विषय - परदेश / विदेश
अध्यक्षा आ. क्षिप्रा शिल्पी जी को समर्पित -
तुम भुला दो हमेँ, हम तुम्हेँ भूल जायेँ ।
यह नहीँ आज मुमकिन कि रिश्ते निभायेँ ।
देश प्यारा हमेँ और परदेश तुमको -
क्योँ दिवस रात विरहा का जोखिम उठायेँ ।।
. . . . . . . . . . . . . .पल्लव
साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण--हमारा मुक्‍तक (8 August 2014 )
विषय ---विदेश,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष-- आदरणीया शिप्रा शिल्‍पी जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
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ये भी क्या अजब पहेली है
विदेश में रही सहेली है
याद नहीं करती अपनों को
यहाँ रहती वो अकेली है

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक
विषय ---परदेश, विदेश,
आदरणीय Shipra Shilpi जी को सादर समर्पित
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ज़िंदगी के सफर में हर पल माँ-बाप के ज़ज़्बात याद रखना....!
ये ज़िंदगी उन्ही की सौगात है,हर कदम ये बात याद रखना ...!
परदेश में जाके ऊंचाइयां लाख हासिल 'संतोष" कर लो तुम ...!
दिल माँ-बाप का कभी न दुखे,जिगर में ये ख्यालात रखना ......!
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -24
कार्यक्रम- हमारा मुक्तक
विषय - परदेश /विदेश
अध्यक्षा - सम्मान्य Shipra Shilpi जी को सादर
*मुक्तक*
बेटा कुछ तो बोलिये,कैसा है परदेश
कैसे उसके लोग हैं ,कैसा उनका वेश
माँ को चिन्ता हो रही ,रोती है दिन -रात
उसके आँसू से लिखा ,भेज रहा सन्देश
लव कुमार 'प्रणय'
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक
विषय ---परदेश, विदेश,
आदरणीय Shipra Shilpi जी को सादर समर्पित
जाकर के परदेश हमें यूँ भूल न जाना
जीवन के रिश्तों को प्रियवर आप निभाना
करना अच्छे कर्म सदा अपने जीवन में
जग में प्यारे भारत का सम्मान बढ़ाना
डॉ अर्चना गुप्ता
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक
विषय ---परदेश, विदेश,
सम्मान्य अखंड गहमरी सर ,परम आदरणीय लव कुमार प्रणय सर,सम्मानीय धीरज श्रीवास्तव जी एवं समस्त" साहित्यकारों की धरती -गहमर" के अनुभवी गुणीजनों के अवलोकनार्थ सादर प्रस्तुत .............................
बाँध गठरिया प्रेम की, ले आई परदेश
मिट्टी की सोंधी महक,औ अपनों का वेश
चूड़ी -कँगना बोलते ,जब आते त्यौहार
मन की यादों में बसा ,मेरा प्यारा देश...................DR. SHIPRA
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24 द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक
विषय ---परदेश, विदेश
9 August 2014 दिन शनिवार
कार्यक्रम अध्‍यक्ष-- आदरणीया शिप्रा शिल्‍पी जी को समर्पित..
होंठों पर मुस्कान,सिर पर हाथ,दिल में थी भारी पीर ,
मेरे परदेश जाने के नाम पर,माँ की आँखों में था नीर।
मैंने पूँछा कारण,तो आंसू छुपा ,मुस्कुरा कर बोली ;
अपनी नहीं बेटी!तेरी फ़िक्र में उभरी,ये चिंता की लकीर।।
मीना मिश्रा

रामगोपाल गहमरी साहित्य समारोह -२४ द्वितीय चरण
कार्यक्रम ---हमारा मुक्तक
विषय -----परदेश / विदेश
आदरणीया शिप्रा शिल्पी जी को सादर समर्पित
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गये परदेश में प्रियतम,सखी सावन नहीं भाये,
बहुत प्यासा लगे मधुवन अभी बादल नही छाये।
सखी लव पर नहीं आये,विरह की वेदना सारी,
काग सन्देश ले आया मगर साजन नहीं आये।
-विनोद


गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -24
विषय : परदेश/विदेश
समय : 08 -Aug -2014
कार्यक्रम अध्क्क्ष्या आ. शिप्रा शिल्पी जी के सम्मान में प्रस्तुत :
बहुत अरमानो को तोड़ तुम चले गए विदेश
नयन निहारे चौकठ-चौकठ ना आये सन्देश
जानू का रात गहरी या दिन के बेरंग उजाले
मिलने को नैना जागे, है सुर्ख ओंठ के प्याले
विजय शंकर मिश्रा

राम गोपाल गहमरी साहित्य समारोह =२४ दुतिये चरण
कार्क्रम हमारा मुक्तक
विषय -प्रदेश /विदेश
कार्यक्रम अध्‍यक्ष-- आदरणीया शिप्रा शिल्‍पी जी को संबोधित करें
मात्राभार =१३/११
मात -पिता को छोड़कर ,बिटियाँ चली विदेश
दिल कठोर कितना बनें ,नहि सहे कभी क्लेश
जिस शाख पर पले हुए ,नाता क्यों हैं टूट
सास -ससुर अब पूज्य हो ,तात दिए उपदेश
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६ 

रामगोपाल गहमरी साहित्य समारोह -२४ द्वितीय चरण
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कार्यक्रम ---हमारा मुक्तक
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विषय -----परदेश / विदेश
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आदरणीया शिप्रा शिल्पी जी को सादर समर्पित
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सतरंगी सपने देखे थे ,मैंने तनहा रातों में .
समझ न पायी कितना छल था ,तेरी मीठी बातों में
धन की खातिर मन को तोड़ा ,जाये बसे परदेश में
बाँझ हुयी मिलने की आशा ,आँच बची ना नातों में .
--------------------------भारती जैन ----------------

साहित्य समारोह -24, द्वितीय चरण--
हमारा मुक्तक (8 August 2014 )
विषय ---विदेश/समानार्थी ।
कार्यक्रम अध्यक्षा-आदरणीया शिप्रा शिल्पी जी के समक्ष
सादर प्रस्तुत !
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ओ बदरा ! तू जाकर भैया से ये कहना ,
चले गये परदेश यहाँ पर बिलखे बहना ,
बहन तुम्हारी बाट जोहती गाँव तुम्हारे ,
जहाँ रहो भैया तुम मेरे सुख से रहना ।
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महेश जैन 'ज्योति' ,मथुरा ।
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक
विषय ---परदेश, विदेश,
समय--8 August 2014 दिन शुक्रवार प्रात:10 बजे से 10 august प्रात: 10 बजे तक
कार्यक्रम अध्‍यक्ष-- आदरणीया शिप्रा शिल्‍पी जी को समर्पित
देश औ विदेश अब रहे सिमट आजकल
विज्ञान से मिल रहा ज्ञान अमिट आजकल
मिटने लगी अब सीमायें भी विश्व की
दूरियाँ दिलों की भी रही मिट आजकल

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक
विषय ---परदेश, विदेश,
शिप्रा शिल्पी जी को सप्रेम
दिल के किसी कोने में सूनापन ढूंढता था
परदेस की राहों में इक स्वपन ढूंढता था
हर चेहरे में देखता था अपनों का चेहरा
दूर देस की माटी में अपनापन ढूँढता था
निधि

साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण--हमारा मुक्‍तक (8 August 2014 )
विषय ---विदेश,
कार्यक्रम अध्‍यक्ष-- आदरणीया शिप्रा शिल्‍पी जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
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राखी तो बहन की, दूर विदेश से आई,
मिट्टी की खुशबू संग, पर देश की लाई,
ये रिश्ते गुथे हैं स्नेह संस्कार डोर में
रहे बहन कहीं भी, न कभी होगी पराई !
-
-ओंम प्रकाश नौटियाल

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -24, द्वितीय चरण
कार्यक्रम --हमारा मुक्‍तक
विषय ---परदेश, विदेश,
आदरणीय Shipra Shilpi जी को सादर समर्पित
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जिस अंगना में खेल कूद बचपन के दिन बिताये
न जाने क्यूँ एक ही पल में.........सारे हुये पराये
काहे बाबुल ब्याह कर मुझको...भेज दिये परदेश
नैना भर भर आये...... नैहर याद मुझे जब आये
~रमा वर्मा~ ८-८-१४

गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~24
हमारा मुक्तक
विषय~परदेश,विदेश
अध्यक्षा आदरणीया शिप्रा शिल्पी जी की प्रतिष्ठा मे प्रस्तुत~
आ गया परदेश मे वह,रोटी कमाने के लिए।
गाँव अपना छोड़ आया,खर्चा चलाने के लिए।
हो गया है बैल सा वो,रात दिन जुतता रहे।
बेटियों का ब्याह होगा,जेवर गढ़ाने के लिए।

गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-24
द्वितीय चरण
कार्यक्रम- हमारा मुक्तक
शीर्षक- परदेस/विदेश/पर्यायवाची
समारोह अध्यक्ष -आदरणीया शिप्रा शिल्पी जी के समक्ष प्रस्तुत रचना
बसे जाकर हजारो मील दिल से दूर है यारो
रहे परदेश में हम बस नशे में चूर है यारो
बधे राखी कलाई में न टीका तीज में माथे
दिखे सपने दिखे सूरत, बहुत मजबूर है यारो
अखंड गहमरी
समस्‍त रचनाकार एवं अध्‍यक्ष महोदया को हार्दिक बधाई

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