Saturday, 2 August 2014

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह 22 का दूसरा चरण हमारा मुक्‍तक दिनांक 25 जुलाई से 27 जुलाई 2014 अध्‍यक्ष आदरणीय एस आर पल्‍लव जी

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह 22 का दूसरा चरण हमारा मुक्‍तक दिनांक 25 जुलाई से 27 जुलाई 2014 अध्‍यक्ष आदरणीय एस आर पल्‍लव जी की अध्‍यक्षता में सम्‍मपन हुआ ।
इस आयोजन में आदरणीय सुमन जोशी दूबे जी, डा0शिप्रा शिल्‍पी जी, सुरेश कुमार मिश्रा, ओम प्रकाश नाटीवाल,विजय शंकर मिश्रा,नागेन्द्र सिंह निरवाण,धीरज श्रीवास्तव,डा0 उमेश चन्द्र श्रीवास्तव,रमा वर्मा जी,रजनीश पतन जी, एस आर पल्‍लव जी, लक्ष्‍मण प्रसाद लाडीवाल जी, कल्‍याणी झा जी,कैलास भारद्वाज जी, विनोद राजपूत जी, कवि सतीश मधुप जी, पुप्‍पेन्‍द्र यादव जी, मीना मिश्रा जी, विजय शंकर मिश्रा जी, कान्‍ती शुक्‍ला जी, रमन कुमार झा जी,रेखा जोशी जी, महेश ज्‍येाती जैन जी ,अरूण शर्मा जी  ने हिस्‍सा लिया लिया। हम आप सभी रचनाकारों का हार्दिक स्‍वागत एवं अभिनंन्‍द करते है तथा अापके स्‍वस्‍थ जीवन एवं उज्‍जवल भविष्‍य की कामना करते है।

जिसमें प्रथम स्‍थान --आदरणीया सुषमा दूबे , द्वितीय स्‍थान - डा0 शिप्रा शिल्‍पी जी एवं प्रतिक्रिया लोक आदरणीय धीरज श्रीवास्‍तव को दिया जाता है ।
दूसरा चरण --हमारा मुक्‍तक
25 जुलाई 10 बजे से 27 जुलाई रविवार 10 बजे तक -
अध्‍यक्ष ---आदरणीय एस आर पल्‍लव जी
विषय---राह,रास्‍ता,मार्ग,इत्‍यादि समानअर्थी शब्द
पा ही लेंगे मंजिल को हम राहों के मोहताज नहीं ।
कल भी आयेगा देखेंगे कर पाये जो आज नहीं।।
गाएंगे फिर राग वही हिम्मत हमने कब हारी है,
बस टूटे हैं तार एक दो टूटा पूरा साज़ नहीं ।।
सुषमा दुबे

साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
शीर्षक - राह, रास्ता आदि।
समारोह अध्यक्ष परम आदरणीय एस.आर.पल्लव सर को समर्पित!
कंटक तेरी राहों के मैं हँस - हँस कर चुन लूंगी
पलकों में नवयौवन के सुन्दर सपने बुन लूंगी
शूल चुभन की गहन तड़प को पी लूंगी अधरों से
स्वयं समर्पण करके मैं पल पल जीवन गुन लूंगी......DR.shipra

राम गोपाल गहमरी साहित्य समारोह =२२
अध्‍यक्ष ---आदरणीय एस आर पल्‍लव जी
विषय =राह /रास्ता ,/ पथ /मार्ग
माँ हमें वह शक्ति दे दो ,संघर्ष पथ पर चल जाये
राह में जो भी मिलेंगे ,उन कंटको को दल जायें
लोक मंगल के लिये माँ ,बढ़ चले संकल्प ले हम
भय प्रलोभन सामने हो ,आज नहि पथ से टल सकें
सुरेश कुमार उत्साही
मेरठ
९६३४७६३०७६
९९१७०१०६६१


साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
शीर्षक- राह/रास्ता/मार्ग/पथ ।
अध्यक्षः आ. श्री S.r. Pallav जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
-
नदिया पार करनी हो, नज़र प्रवाह पर रखना,
गहरे जल में गर उतरें, खबर थाह की रखना,
गुरू से जानिये सन्मार्ग, भक्ति और शक्ति का
उसी राह फिर चलिये, कदर उस राह की रखना!
-ओंम प्रकाश नौटियाल


Vijay Shanker Mishra
द्वतीय चरण -हमारा मुक्तक
शीर्षक : रास्ता /राह /मार्ग /पथ
अधक्ष्य श्री पल्लव जी को प्रेसित
ज़िंदगी कम,मुश्किला के थपेड़े बहुत
कदम कदम पर समाज के झमेले बहुत
सफर के रास्ते का कोई हमसफ़र न हुआ
हमें सब भूले, हमारे पास उनकी यादें बहुत ll
विजय शंकर मिश्रा

साहित्य समारोह- 22
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
शीर्षक - राह /रास्ता/पथ/मार्ग
अध्यक्ष: आदरणीय .S.R.Pallav ji को सादर समर्पित ।
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लौटा लाओ शीश अभी भी, भारत के वीर जवानों के ;
या छोडो पथ लाल किले का, क्यों दोस्त बने हैवानों के ?
माँग रही तरुणाई उत्तर, खूँ उबल रहा है नश- नश में ;
कब तक हम यूँ जुल्म सहेंगे, पाकिस्तानी शैतानों के ?
( नागेन्द्र सिंह निरवाण
* साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
शीर्षक - राह, रास्ता आदि।
समारोह अध्यक्ष परम आदरणीय एस.आर.पल्लव सर को समर्पित!
* अतिथि रचना *
शाम को दीप सी जल रही जिन्दगी!
मौत की बाँह मेँ पल रही जिन्दगी!
ख्वाब की राह पर खार हैँ तो मगर!
लड़खड़ाती सही चल रही जिन्दगी!
रचना - धीरज श्रीवास्तव

साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
शीर्षक - राह, रास्ता, मार्ग , पंथ
अध्यक्ष - आदरणीय श्री S.r. Pallav जी के समक्ष प्रस्तुत
हम चले थे नभ से तेरे
ले के सुन्दर सप्त घेरे ।
दिन सुखद अब रात मे है
खो गये वह पंथ मेरे ।।
डा0 उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ
साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
शीर्षक- राह/रास्ता/मार्ग/पथ ।
अध्यक्षः आ. श्री S.r. Pallav जी को सादर समर्पित
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जीवन की ये राह कठिन है अटक न जाना राही तुम
भटकायेगी राह छलावी भटक न जाना राही तुम
नजर लक्ष्य पर रखकर अपने कदम बढाते ही जाना
घबराकर आंधी तूफां से लटक न जाना राही तुम
~रमा वर्मा~
साहित्य समारोह -22
द्वितीय चरण-हमारा मुक्तक
शीर्षक-राह,मार्ग,रास्ता आदि
अध्यक्ष परमादरणीय श्री एस॰ आर॰ पल्लव जी के सम्मान मे सादर प्रस्तुत~
रस्ता लम्बा,छाँव नदारद।
शहर बस रहे,गाँव नदारद।
मेल दिलोँ का अब मुश्किल है,
मिलने का हर ठाँव नदारद।

साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण -
हमारा मुक्तक -
शीर्षक- राह/रास्ता/मार्ग-
मंच को समर्पित
अतिथि रचना -
दिख रही मंजिल मगर क्यूँ रास्ता दिखता नहीँ है ।
दो दिलोँ के बीच का वह फासला दिखता नहीँ है ।
कोशिशोँ से दूर लगतीँ सब मिलन संभावनाएँ -
क्योँकि है मनभेद पर मतभेद सा दिखता नहीँ है ।।
. . . . . . . . . . . . . .पल्लव *
[तीर एक - लक्ष्य अनेक -
शीर्षक - कवितालोक,
गहमरी साहित्य मंच]

दूसरा चरण --हमारा मुक्‍तक 25 जुलाई 10 बजे से 27 जुलाई रविवार 10 बजे तक -
शीर्षक-राह/मार्ग/रास्ता/पथ/मार्ग आदि
अध्‍यक्ष ---आदरणीय एस आर पल्‍लव जी की प्रतिष्ठा में प्रस्तुत-
नदी बनाती राह यूँ, संगम का रख चाव
गंगा यमुना सुरसती, भरे ह्रदय सद्भाव
इडा पिंगला नाड़ियाँ, तन मन बहे रसधार
महाकुम्भ में नहाइए निर्मल करे स्वभाव
-लक्ष्मण "रामानुज" लडीवाला, जयपुर

साहित्य समारोह -22
द्वितीय चरण-हमारा मुक्तक
शीर्षक-राह,मार्ग,रास्ता आदि
अध्यक्ष परमादरणीय श्री एस॰ आर॰ पल्लव जी के सम्मान मे सादर प्रस्तुत-
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हमें किस्मत के सहारे ही न रहना चाहिए
अपने हाथ -पैर भी थोड़ा चलाना चाहिए
चाहे जितनी भी हो मुश्किल राहे मगर
हमें हर हाल में सदा आगे बढ़ना चाहिए
"कल्याणी झा"

गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-22
हमारा मुक्तक -द्वितीय चरण
शीर्षक- राह /रास्ता/ पथ
समारोह अध्यक्ष -आदरणीय S.r. Pallav ji के समक्ष प्रस्तुत
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दीप इक आँधियों में जला तो सही
नाव तूफां में अपनी चला तो सही
हाँ मिलूंगी तुझे तेरी मंजिल हूँ मैं
एक पग रास्ते पर बढ़ा तो सही
***
कैलाश भारद्वाज


साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
शीर्षक- राह/रास्ता/मार्ग/पथ ।
अध्यक्षः आ. श्री S.r. Pallav जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
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नारी संवेदनाओं पर आधारित एक मुक्तक
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बहुत अब हो चुकी हिंसा अमन के रास्ते खोलो,
भरी सब राह खारों से, चमन के रास्ते खोलो।
सभी बुलबुल सिसकतीं कैद में सैयाद के यारो,
क़फस को तोड़ दो अब तो गगन के रास्ते खोलो।
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-विनोद

साहित्य समारोह 22
द्वितीय चरण -हमारा मुक्तक
शीर्षक:-राह/रास्ता /मार्ग आदि
अध्यक्ष आदरणीय एस.आर.पल्लव जी को सादर समर्पित
राह प्रेम की चलो अगर तो,प्रेम कुसुम खिल जायेंगे ।
फूल प्रेम खिले अगर तो,दिल की चुभन मिटायेंगे।
दिल की चुभन मिटी तो अपनी,मंजिल आसाँ कर देगी,
प्रेम राह पर चलते चलते,परमेश्वर मिल जायेंगे ।
सतीश 'मधुप'
घिरोर (मैनपुरी)
गोपाल राम गहमरी साहित्यिक समारोह-22
द्वितीय चरण- हमारा मुक्तक
शीर्षक:- राह/रास्ता/मार्ग/पथ
आदरणीय S.r. Pallav जी की प्रतिष्ठा में
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स्वप्न थे जो सजीले सजल हो गये
प्रीत यूँ कसमसाती रही उम्र भर
गीत बिखरा किये नेह की राह में
वेदना गुनगुनाती रही उम्र भर
- पुष्पेन्द्र यादव
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-22
हमारा मुक्तक -द्वितीय चरण
शीर्षक- राह /रास्ता/ पथ
समारोह अध्यक्ष -आदरणीय S.r. Pallav ji के समक्ष प्रस्तुत
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राहें नहीं भटकातीं,राही खुद भटक जाता है।
भुला मंजिलें अपनी,स्वार्थ में अटक जाता है।
बहिर्यात्रा कभी कहीं पहुंचाती नहीं किसी को ;
अंतर्यात्रा में समूचा ब्रम्हाण्ड सिमट आता है। ।
मीना मिश्रा

गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-22
हमारा मुक्तक-आदरणीय अध्यक्ष श्री एस. आर. पल्लव जी को समर्पित ।
विषय-राह/समानार्थी ।
सुंदर-सपाट सड़क थी पर तोड़कर चले गए ।
चलती-फिरती राह थी पर खोदकर चले गए ।
पाते थे कभी मंजिल, इस मार्ग पर चल के जो,
उम्मीद के वो राही मुँह मोड़कर चले गए ।
-नारायण गौरव ।

द्वतीय चरण -हमारा मुक्तक -२६/०७/२०१४
शीर्षक : रास्ता /राह /मार्ग /पथ
अधक्ष्य श्री पल्लव जी को प्रेसित
मंज़िल कोई भी हो राह पर तो चलना पड़ेगा
जिस हालात मे ज़िंदगी रोती सुनना पड़ेगा
लाख बंदिशे और कठिनाइयाँ रास्ते के बीच
जोश और उम्मींदो से खुशनुमा करना पड़ेगा II
विजय शंकर मिश्रा

गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह
द्वितीय चरण-हमारा मुक्तक
शीर्षक-राह/मार्ग/रास्ता
समारोह अध्यक्ष-आदरणीय एस .आर. पल्लव जी को सादर समर्पित
राह बोझिल न हो मुस्कराते चलो ।
नेह-दीपक संजो जगमगाते चलो ।
सूख जाए न सरसिज न बिखरें सपन-
गीत-मकरंद अपना लुटाते चलो ।
कान्ति शुक्ला

साहित्य समारोह २२
दूसरा चरण हमारा मुक्तक
शीर्षक राह
माननीय अध्यक्ष श्री पल्लवजी के सम्मान में
इंसान जिसे खोज रहा है
जरूर उसे वही मिला है
पर राह खत्म नहीं होता
कुछ और खोजने चला है
रमन कुमार झा
साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण - हमारा मुक्तक
शीर्षक - राह, रास्ता आदि।
समारोह अध्यक्ष परम आदरणीय एस.आर.पल्लव सर को समर्पित!.
धीरे धीरे मुहब्बत में सरूर आना है
राह ए इश्क में तुम्हे भी जरूर आना है
हमने माना कि बहुत कठिन डगर है प्यार की
वफ़ा ए दीपक जलाने भी जरूर आना है
रेखा जोशी

साहित्य समारोह - 22
द्वितीय चरण -
हमारा मुक्तक
शीर्षक- राह/रास्ता/मार्ग/पथ ।
अध्यक्षः आ. श्री एस आर पल्लव जी
की सेवा में सादर प्रस्तुत ।
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* अतिथि रचना *
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मंजिलें जितनी भी चाहे दूर हैं ,
पाँव थक कर चाहे जितने चूर हैं ,
हैं इरादे दिल में ग़र फौलाद से ,
वो ही पथ पाते कहाते शूर हैं ।
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महेश जैन 'ज्योति' ,
मथुरा ।

साहित्य समारोह --22
द्वितीय चरण--हमारा मुक्तक
शीर्षक--राह,मार्ग रास्ता आदि--अध्यक्ष परमआदरणीय श्री एस.आर. पल्लव जी
के सम्मान में सादर प्रस्तुत-------
न राही न रहबर वहीं रास्ते
चले जा रहें हैं किसके वास्ते।
मिलेंगे तुम्हें किसी मोड़ पर
भला हो बुरा हो अगर रास्ते।।


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