गोपाल राम गहमरी साहित्य समारेाह 23 की रचना एक साथ
गोपाल राम गहमरी साहित्यव समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्याक्ष आदरणीय Ashok Kumar Vishwakarmaजी को सादर समर्पित
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को सादर समर्पित ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ---23
दूसरा चरण -- हमारा मुक्तक
बिषय ----- सावन
अध्यक्ष --- आदरणीय श्री अशोक कुमार बिश्वकर्मा जी को सदर समर्पित।
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्याक्ष आदरणीय Ashok Kumar Vishwakarmaजी को सादर समर्पित
================================================
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्याक्ष आदरणीय Ashok Kumar Vishwakarmaजी को सादर समर्पित
रिमझिम रिमझिम सावन आया नववधुओं का मन हर्षाया
झूले, मेहँदी, कजरी की धुन बाबुल का आँगन मुस्काया
आई आज पिया की पाती , छेड़ रही हैं सखियाँ सारी..
विरह अगन में नयना बरसे , बैरी सावन जब से आया
........DR.SHIPRA
झूले, मेहँदी, कजरी की धुन बाबुल का आँगन मुस्काया
आई आज पिया की पाती , छेड़ रही हैं सखियाँ सारी..
विरह अगन में नयना बरसे , बैरी सावन जब से आया
........DR.SHIPRA
अलका गुप्ता
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को सादर समर्पित ।
काले बादल छाए चहूँ ओर |
उमड़ बरसे मेघ ये दृग कोर |
बिन साजन ये आग लागाए..
बरसे क्यूँ वैरी ये..सावन घोर ||
-----------#अलका गुप्ता------------
गोपाल राम गहमरी साहित्यव समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्त क विषय ---सावन
अध्याक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वएकर्मा जी की प्रतिष्ठा में
जिया पीया का खिल न पाए सावन ही जब सुखा जाए
कैसे यौवन तन मन छाए अश्क नयन के रूक न पाए
बाँट जोहते झूले कोसे बिन बहार न लौटे प्यारी सखियाँ
जाता सावन रिमझिम बरसो वन उपवन में यौवन छाए |
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा
समय ''''1 अगस्त रात्रि 9 बजे से 3अगस्त रविवार रात्रि 9 बजे तक .
============================================
सावन की रिमझिम फुहारें दिल को बहका जाती हैं....!
प्यार के पहले सावन की यादें हमको महका जाती हैं...!
सावन के महीने में ये दिल भँवरे सी गुंजन करता है .....!
मन की उमंगों के झूले, मल्हार बन चहका जाती हैं....!
उमड़ बरसे मेघ ये दृग कोर |
बिन साजन ये आग लागाए..
बरसे क्यूँ वैरी ये..सावन घोर ||
-----------#अलका गुप्ता------------
गोपाल राम गहमरी साहित्यव समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्त क विषय ---सावन
अध्याक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वएकर्मा जी की प्रतिष्ठा में
जिया पीया का खिल न पाए सावन ही जब सुखा जाए
कैसे यौवन तन मन छाए अश्क नयन के रूक न पाए
बाँट जोहते झूले कोसे बिन बहार न लौटे प्यारी सखियाँ
जाता सावन रिमझिम बरसो वन उपवन में यौवन छाए |
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा
समय ''''1 अगस्त रात्रि 9 बजे से 3अगस्त रविवार रात्रि 9 बजे तक .
============================================
सावन की रिमझिम फुहारें दिल को बहका जाती हैं....!
प्यार के पहले सावन की यादें हमको महका जाती हैं...!
सावन के महीने में ये दिल भँवरे सी गुंजन करता है .....!
मन की उमंगों के झूले, मल्हार बन चहका जाती हैं....!
-लक्ष्मण रामानुज लडीवाला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा के समक्ष सादर प्रस्तुत
-------------------------------------------------------------------------------------------
चली आओ प्रिये सावन के झूलों पर रवानी है,
फूल मदहोश हैं कलियों ने ओढ़ी फिर जवानी है।
खींच कर तार मन वीणा के तुमने कर दिया घायल,
करूँ प्रतिकार अब कैसे लुभाये ऋतु सुहानी है।
--------------------------------------------------------------------------------------
-विनोद
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह... 23
दूसरा चरण... हमारा मुक्तक
विषय... सावन
समर्पण... माँ सरस्वती की अर्चना में समर्पित पश्चात् आप सभी समस्त साहित्य सुधीगण... सादर...
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा
समय ''''1 अगस्त रात्रि 9 बजे से 3अगस्त रविवार रात्रि 9 बजे तक |
---------------------------------------------------------------------------
सावन आया चिड़ियायें चहक उठी,
आंगन में पुष्प लतायें महक उठी,
धरती का कोंना-कोंना तृपित हुआ,
प्रिय-प्रियसी की आत्मायें बहक उठी ||
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा के समक्ष सादर प्रस्तुत
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चली आओ प्रिये सावन के झूलों पर रवानी है,
फूल मदहोश हैं कलियों ने ओढ़ी फिर जवानी है।
खींच कर तार मन वीणा के तुमने कर दिया घायल,
करूँ प्रतिकार अब कैसे लुभाये ऋतु सुहानी है।
--------------------------------------------------------------------------------------
-विनोद
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह... 23
दूसरा चरण... हमारा मुक्तक
विषय... सावन
समर्पण... माँ सरस्वती की अर्चना में समर्पित पश्चात् आप सभी समस्त साहित्य सुधीगण... सादर...
***
विनष्ट त्वचा तृण, वृक्षरोम हैं,
मानव के क्यूँ कृत्य विलोम हैं?
अब आँखें सावन पर्व मनातीं,
शुष्क धरा और स्वच्छ व्योम है।
अशोक कुमार विश्वकर्मा 'व्यग्र'
03/08/2014
भोपाल।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२३
दूसरा चरण हमारा मुक्तक
विषय -सावन
अधक्ष्य -आदरनिये श्री अशोक कुमार विष्वकर्मा जी को समर्पित
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23विनष्ट त्वचा तृण, वृक्षरोम हैं,
मानव के क्यूँ कृत्य विलोम हैं?
अब आँखें सावन पर्व मनातीं,
शुष्क धरा और स्वच्छ व्योम है।
अशोक कुमार विश्वकर्मा 'व्यग्र'
03/08/2014
भोपाल।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२३
दूसरा चरण हमारा मुक्तक
विषय -सावन
अधक्ष्य -आदरनिये श्री अशोक कुमार विष्वकर्मा जी को समर्पित
सावन मॉस, सुहाता सबको
चातक रोज ,बुलाता रबको
मन मोर ,मयूर सभी नाचें
विरहन सोचे ,आये कब को
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६
चातक रोज ,बुलाता रबको
मन मोर ,मयूर सभी नाचें
विरहन सोचे ,आये कब को
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१
९६३४७६३०७६
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा
समय ''''1 अगस्त रात्रि 9 बजे से 3अगस्त रविवार रात्रि 9 बजे तक |
---------------------------------------------------------------------------
सावन आया चिड़ियायें चहक उठी,
आंगन में पुष्प लतायें महक उठी,
धरती का कोंना-कोंना तृपित हुआ,
प्रिय-प्रियसी की आत्मायें बहक उठी ||
उद्धव देवली/ २-८-२०१४|
गोपाल राम गहमरी
साहित्य समारोह-23
दूसरा चरण-हमारा मुक्तक
विषय-सावन
अध्यक्ष-आदरणीय श्री Ashok Kumar Vishwakarma जी को समर्पित
गोपाल राम गहमरी
साहित्य समारोह-23
दूसरा चरण-हमारा मुक्तक
विषय-सावन
अध्यक्ष-आदरणीय श्री Ashok Kumar Vishwakarma जी को समर्पित
*****************
दिलों की शान है सावन
धरा का मान है सावन
प्रिये!तुमसे ख़ुशी मेरी
हमारी जान है सावन
-------------कुमुद नयना
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण -मुक्तक
विषय ----सावन
अध्यक्ष ----आदरणीय अशोक कुमार जी विश्वकर्मा
दिलों की शान है सावन
धरा का मान है सावन
प्रिये!तुमसे ख़ुशी मेरी
हमारी जान है सावन
-------------कुमुद नयना
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण -मुक्तक
विषय ----सावन
अध्यक्ष ----आदरणीय अशोक कुमार जी विश्वकर्मा
मत झूलों झूलो पर बेटी ये झूले है अब अभिशाप
हुए सुरक्षित ये झूले जहा लटके बालाओं की लाश
मचल मचल कर जिन पर यौवन रंगीला इठलाता
हो मजबूर आज ये करते उस सावन का यूं उपहास
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,गांधी डीडवाना
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण -हमारा मुक्तक
विषय -सावन
अध्यक्ष -श्री अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को सादर
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हुए सुरक्षित ये झूले जहा लटके बालाओं की लाश
मचल मचल कर जिन पर यौवन रंगीला इठलाता
हो मजबूर आज ये करते उस सावन का यूं उपहास
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,गांधी डीडवाना
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण -हमारा मुक्तक
विषय -सावन
अध्यक्ष -श्री अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को सादर
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चार माह ताप
चार माह शीत
सावन की रीत
चार माह प्रीत
निर्मला पारीक
2..8..2014
चार माह शीत
सावन की रीत
चार माह प्रीत
निर्मला पारीक
2..8..2014
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह ---23
दूसरा चरण -- हमारा मुक्तक
बिषय ----- सावन
अध्यक्ष --- आदरणीय श्री अशोक कुमार बिश्वकर्मा जी को सदर समर्पित।
घन-घोर,घोर घन छाई बदरिया
साजन बिनु है सुनी सजरिया ।
बीत ना जाये "सावन" आजा
मन मोर भी नाचे मोरी अटरिया ।।
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-23
दूसरा चरण- हमारा मुक्तक
शीर्षक -सावन
समारोह अध्यक्ष- आदरनीय Ashok Kumar Vishwakarma जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक
********
हर रोज तेरी याद में जलता रहा हूँ मैं
मोम की मानिंद पिघलता रहा हूँ मैं
सावन के महीने में सजनी तुम्हारे संग
बारिश में भीगने को मचलता रहा हूँ मैं
***
कैलाश भारद्वाज
गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह~23
दूसरा चरण~हमारा मुक्तक -- विषय~सावन
अध्यक्ष आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी के सम्मुख,
एवं मंच के सादर सम्मान में प्रस्तुत~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
गोपाल राम गहमरी साहित्यव समारोह -23 साजन बिनु है सुनी सजरिया ।
बीत ना जाये "सावन" आजा
मन मोर भी नाचे मोरी अटरिया ।।
गोपालराम गहमरी साहित्यिक समारोह-23
दूसरा चरण- हमारा मुक्तक
शीर्षक -सावन
समारोह अध्यक्ष- आदरनीय Ashok Kumar Vishwakarma जी के समक्ष प्रस्तुत मुक्तक
********
हर रोज तेरी याद में जलता रहा हूँ मैं
मोम की मानिंद पिघलता रहा हूँ मैं
सावन के महीने में सजनी तुम्हारे संग
बारिश में भीगने को मचलता रहा हूँ मैं
***
कैलाश भारद्वाज
गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह~23
दूसरा चरण~हमारा मुक्तक -- विषय~सावन
अध्यक्ष आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी के सम्मुख,
एवं मंच के सादर सम्मान में प्रस्तुत~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आये बादल उभरी आस
नैनो के बीच में आकाश
हरियाली तीज में होता
सावन में झूलो पे रास
~~ आलोक ~~
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण -हमारा मुक्तक
विषय -सावन
अध्यक्ष -श्री अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को सादर
नैनो के बीच में आकाश
हरियाली तीज में होता
सावन में झूलो पे रास
~~ आलोक ~~
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण -हमारा मुक्तक
विषय -सावन
अध्यक्ष -श्री अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को सादर
सावन की भीगी रातों में ठंडी फुहार रुलाती है
घनघोर घटा संग दामिनी गगन पर रास रचाती है
छुप गया चंदा बदरा संग तारों की बारात लिये
लगा कर अगन शीतल हवायें बिरहन को सताती है
रेखा जोशी
घनघोर घटा संग दामिनी गगन पर रास रचाती है
छुप गया चंदा बदरा संग तारों की बारात लिये
लगा कर अगन शीतल हवायें बिरहन को सताती है
रेखा जोशी
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्याक्ष आदरणीय Ashok Kumar Vishwakarmaजी को सादर समर्पित
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सावन की रुत है सखी.....कर सोलह श्रृंगार
चूड़ी कंगना बिछिया...........चूनर गोटेदार
बागों में झूला डला............झूलूं पी के संग
रिमझिम बूंदे गिर रही....छाई खुशी अपार
~रमा वर्मा~
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -२३
दूसरा चरण
विषय - सावन
इस समारोह के अध्यक्ष आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को समर्पित रचना
चूड़ी कंगना बिछिया...........चूनर गोटेदार
बागों में झूला डला............झूलूं पी के संग
रिमझिम बूंदे गिर रही....छाई खुशी अपार
~रमा वर्मा~
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -२३
दूसरा चरण
विषय - सावन
इस समारोह के अध्यक्ष आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को समर्पित रचना
सावन को तीज, शिवरत्रि और रक्षाबंधन का मौसम कहूँ
सखियों के संग झूला झूलूँ या प्रीत मिलन की बेला कहूँ
तन मन और यौवन चंचलता से उन्मादित ही होता जाये
माह अलबेला कहूँ या खुशियों के महाकुम्भ का मेला कहूँ
विजय शंकर मिश्रा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को सादर समर्पित ।
सखियों के संग झूला झूलूँ या प्रीत मिलन की बेला कहूँ
तन मन और यौवन चंचलता से उन्मादित ही होता जाये
माह अलबेला कहूँ या खुशियों के महाकुम्भ का मेला कहूँ
विजय शंकर मिश्रा
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक
विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी को सादर समर्पित ।
( साथ ही अन्य प्रबुद्ध मित्रजनों के अवलोकनार्थ , उनकी प्रतिक्रिया आमंत्रण के संग ।
बरस उठीं सावन की फुहारें, पतझड़ में हरसिंगार खिल गये,
संसृति के मृदुल मयुर नृत्य से सहसा धरती और आकाश मिल गये।
प्रिये, तेरी तिलस्मी मुस्कान मात्र से जगे हृदय में ऐसे मृदुल भाव,
कि रेगिस्तानी अंतस में मेरे कविता के बेशुमार सुमन उपज गये।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 01.08.2014
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा
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मंच को नमन करते हुए एक मुक्तक...
बरस उठीं सावन की फुहारें, पतझड़ में हरसिंगार खिल गये,
संसृति के मृदुल मयुर नृत्य से सहसा धरती और आकाश मिल गये।
प्रिये, तेरी तिलस्मी मुस्कान मात्र से जगे हृदय में ऐसे मृदुल भाव,
कि रेगिस्तानी अंतस में मेरे कविता के बेशुमार सुमन उपज गये।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 01.08.2014
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा
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मंच को नमन करते हुए एक मुक्तक...
सखी सुन तो घटा सावन की कितनी मस्त छाई है।
ये मादक रिमझिमी वर्षा पिया की याद लाई है।।
चलो बागों में झूलें पिय मिलन के गीत गायें हम;
सखी सावन की हरियाली बड़े दिन बाद आई है।।
गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह~23
दूसरा चरण~हमारा मुक्तक
विषय~सावन
अध्यक्ष आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी एवं सभी अग्रज के समक्ष एडमिन रचना
ये मादक रिमझिमी वर्षा पिया की याद लाई है।।
चलो बागों में झूलें पिय मिलन के गीत गायें हम;
सखी सावन की हरियाली बड़े दिन बाद आई है।।
गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह~23
दूसरा चरण~हमारा मुक्तक
विषय~सावन
अध्यक्ष आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी एवं सभी अग्रज के समक्ष एडमिन रचना
पड़े सूने यहॉं झूले इशारो से बुलाते है
रहा है बीत अब सावन सभी मिलकर बताते है
विरह की आग में जलकर तडपती हूँ सजन मेरे
बरस कर आज बदरा भी हमारा दिल जलाते है
अखंड गहमरी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण -हमारा मुक्तक
विषय -सावन
अध्यक्ष -श्री Ashok Kumar Vishwakarma जी को सादर
*मुक्तक *
मेरे अधरों पर तुम अपने अधर सजा दो साथी
मेरे नयनों में तुम अपना रूप बसा दो साथी
मैं सावन हूँ फिर भी प्यासा तुम निर्मल जल धारा
मेरे प्यासे मन की अब तुम प्यास बुझा दो साथी
लव कुमार 'प्रणय'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा के समक्ष सादर प्रस्तुत
बीता जमाना "सावन " ने झूलों को नहीं देखा,
माली ने कब से बाग में फूलों को नहीं देखा,
नेताओं का आज उसूल है बस मौकापरस्ती
सियासत ने किन्हीं अन्य उसूलों को नहीं देखा !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
---------------------------
गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह~23
दूसरा चरण~हमारा मुक्तक
विषय~सावन
रहा है बीत अब सावन सभी मिलकर बताते है
विरह की आग में जलकर तडपती हूँ सजन मेरे
बरस कर आज बदरा भी हमारा दिल जलाते है
अखंड गहमरी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण -हमारा मुक्तक
विषय -सावन
अध्यक्ष -श्री Ashok Kumar Vishwakarma जी को सादर
*मुक्तक *
मेरे अधरों पर तुम अपने अधर सजा दो साथी
मेरे नयनों में तुम अपना रूप बसा दो साथी
मैं सावन हूँ फिर भी प्यासा तुम निर्मल जल धारा
मेरे प्यासे मन की अब तुम प्यास बुझा दो साथी
लव कुमार 'प्रणय'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -23
दूसरा चरण--हमारा मुक्तक विषय ---सावन
अध्यक्ष - आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा के समक्ष सादर प्रस्तुत
बीता जमाना "सावन " ने झूलों को नहीं देखा,
माली ने कब से बाग में फूलों को नहीं देखा,
नेताओं का आज उसूल है बस मौकापरस्ती
सियासत ने किन्हीं अन्य उसूलों को नहीं देखा !
-ओंम प्रकाश नौटियाल
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गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह~23
दूसरा चरण~हमारा मुक्तक
विषय~सावन
अध्यक्ष आदरणीय अशोक कुमार विश्वकर्मा जी के सम्मुख,
एवं मंच के सादर सम्मान में प्रस्तुत~
सावन में हरियाली छाई,प्रकृति छटा सुन्दर सुखदाई!
तन में जाग उठी तरुडाई,नव यौवन ने ली अंगडाई!
अति सुन्दर सावन मन भावन,शीतल सरस मधुर सुहावन!
मधुर मनोहर मंगलदाई,प्रकृति में बाज उठी शहनांई!
कुन्दन 2.8.2014
एवं मंच के सादर सम्मान में प्रस्तुत~
सावन में हरियाली छाई,प्रकृति छटा सुन्दर सुखदाई!
तन में जाग उठी तरुडाई,नव यौवन ने ली अंगडाई!
अति सुन्दर सावन मन भावन,शीतल सरस मधुर सुहावन!
मधुर मनोहर मंगलदाई,प्रकृति में बाज उठी शहनांई!
कुन्दन 2.8.2014
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