Sunday, 29 June 2014

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -14 की सभी रचना एक साथ अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -14
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्‍पदी (विषय -तस्‍वीर)
निवेदक अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी को सादर समर्पित-
मुक्तक
यह टकी हुई जिसकी तस्वीर, वे है श्री रघुवीर
देखा जब इसे गौर से, बह चला नयनों से नीर
वन गमन को पहने हुए है, सन्यासी से पीत वस्त्र
जन जन का उद्धार करे जो, उनको भी है कैसी पीर |


शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्‍पदी (विषय -तस्‍वीर)
अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी
मंच संचालिका --आदरणीया कल्‍याणी झा जी
की सेवा में सर्मीपित

देख सके ना हमको जो कभी रोते हुए
जाने क्‍यों छोड़ चले हमको बिलखते हुए
लगा रखे हैं तस्‍वीर आज भी सीने से
दिखे जिसमें प्‍यार से वो मुस्‍कुराते हुए

अखंड गहमरी गहमर गाजीपुर


शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्‍पदी (विषय -तस्‍वीर)
मंच संचालिका --आदरणीया कल्‍याणी झा जी को समर्पित - चतुष्पदी
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तू न आया राह निहारती थक गई,
तेरी तस्वीर से ही बतियाते थक गई .।
आ भी जा ओ ! मेरे सनम तुझे पुकारूँ ,
तुझको पाकर अपनी तकदीर सँवारूँ ॥ ..............अन्नपूर्णा बाजपेई ' अंजु'




गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -14
शुक्रवार से शनिवार ******हमारी चतुष्‍पदी (विषय -तस्‍वीर)
निवेदक अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी को सादर समर्पित
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मेरे मन -मंदिर में बसी हैं एक तस्वीर
जिसे मानती हूँ मैं तो अपनी जागीर
पत्ता नहीं उसके दिल में मैं हूँ या नहीं
उसको मैं समझने लगी हूँ अपनी तकदीर

"कल्याणी झा
गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -14 अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी की प्रतिष्ठा में प्रस्तुत -
बालाएं होती कुर्बान
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माँ वसुधा पर जो कुर्बान, उनको समझो वीर जवान
रानी झांसी जैसी शान, अहिल्या बाई की भी आन |
सीमा पर जो वीर जवान, सच्चे प्रहरी उनको जान
|लोक तंत्र की रखने आन, बालाएं होती कुर्बान ||

जिन्हें है दहेज़ की चाहत, माँ वसुधा को करते आहत
दिल से जो भी करते प्यार, वे जीवन का समझे सार |
कुदरत भी माने कब तलक, मौन रह देखती रहे झलक
आदम का देखे उत्पात, कब तक माँ झेले आघात ||

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गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -14
अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी
मंच संचालिका --आदरणीया कल्‍याणी झा जी की सेवा में
बुधवार से गुरूवार *****दुनिया गीत गजल की
गीत ----विषय ''''चुडिया

मेरी गोरी कलाई है ये भाती है
रात साजन की बाहो मे बज जाती है

ये चुराती है मेरे सजन की नींदिया
भाये न उसे मेरे माथे की बिंदिया
प्‍यार में टूट कर ये तो बिखर जाती है
मेरी गोरी कलाई है ये भाती है
रात साजन की बाहो मे बज जाती है

हाथ मेहंदी लगे और महावर सजे
और बाबुल के डेहरी शहनाई बजे
देखो चुडियाँ ये मेरी खनक जाती है
मेरी गोरी कलाई हैै ये भाती है
रात साजन की बाहो मे बज जाती है

अखंड गहमरी मौलिक
------------------------------------------------------------------------------बुधवार से गुरूवार *****दुनिया गीत गजल की
अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जीलो सा,अर्पित
ह्रदय प्रेम का है आधार (गीत)
सोलह की है महिमा न्यारी, न्यारी करे सोलह श्रृंगार
जिसके भी संगत में आये, उसका भी हो रूप निखार |
कर में पहनकर के चूड़ियाँ, मद में खनक खनक खनकाय
बिंदिया चमके चूड़ी खनके, रंग बिरंगी साडी भी दमकाय |

नारी की है महिमा न्यारी, उसकी महिमा बड़ी अपार
कर सोलह श्रृंगार सदा ही, नयनों में ले काजल धार
मुखड़ा रख दर्पण के आगे, सज धज कर ले आय बहार
फिर सुरमय कोयल सी कूके, झूमे चलते मधुर बयार |

रंग बिरंगी चूड़ियाँ खनके, झनके पाँव के पायल हार
नयन बिछाए प्रियतम निरखे, टकटकी लगा रहे निहार
मना मना के कान्हा रूठे, करते रहे सदा मनुहार
स्वप्न लोक में डोले सुंदरी, ह्रदय प्रेम का है आधार |
-लक्ष्मण प्रसाद लड़ीवाला
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''मंच संचलिका - आ0 कल्याणी झा जी को समर्पित
आधुनिकता के नाम ( व्यंग्य )
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दुनिया मे काम न करते
बड़ों का मान न करते
बड़ी बड़ी ढींगे हांक
झूठी सच्ची कहानी गढ़
खुद की मंजिल पाने को
दूसरों के कंधों का करें प्रयोग
सिगरेट फूंके, करते मदिरा पान
अपने बतलाएं ऊंचे दाम
मेरा तेरा का राग अलापें
भावनाओं से कर खिलवाड़
माता पिता को दुःख पहुंचाते
बधू घर मे आते ही
कर दे घर के भाग .........
भाग बदल दे भागों वाली
बूढ़े कंधों पर थोपें
उनकी ही ज़िम्मेदारी
उनका हक न दे कर
अपना हक दिनभर मांगे
पढ़ने जाने के बहाने
आज लड़के लड़कियां
लड़ाएँ अपनी चोंच
शालीनता ताक पे रख
फूहड़ बातें दुहराएँ
अर्ध नग्न परिधान पहन
अपनी शामत खुद बुलवाए
आधुनिक हुई आज की जेनरेशन
माता पिता का बढ़ रहा टेंशन
हाय आधुनिकता .!!! तूने कैसी रार मचाई ।

मौलिक रचना
.....अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु'

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गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -14
सोमवार मंगलवार **अापका मंच आपकी मर्जी (कोई भी काव्‍य विधा)
अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी
मंच संचालिका --आदरणीया कल्‍याणी झा जी की सेवा में
*मुक्तक *
कीजियेगा अब दवा हर घाव की
आ गई है शुभ घड़ी बदलाव की
इन हवाओं से ,घटाओं से कहो
राह रोकें ना हमारी नाव की

लव कुमार 'प्रणय'


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गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -१४
सोमवार- मंगलवार- हमारा दिन हमारी मर्जी
अध्‍यक्षा -- आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी को सादर समर्पित
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आओ मन जरा खुद को आजमा लें
बदलाव के जरा गीत गुनगुना लें
हौसलों का पंख लगाकर चल उड़े
जो चाहें पाना वो सब कुछ पा लें

"कल्याणी झा"


सभी प्रतिभागी एवं अध्‍यक्षा संचालिका को हार्दिक बधाई

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