गोपाल राम गहमर साहित्य समारोह **10
सोमवार***हमारी चतुष्पदी
शीर्षक ' प्यार
अध्यक्षा -- आदरणीया शुभदा वाजपेयी जी को समर्पित
शीर्षक ' प्यार
अध्यक्षा -- आदरणीया शुभदा वाजपेयी जी को समर्पित
देखा सपने में आयी वो फिर प्यार बन के
मेरी जिंदगी है वो आयी बहार बन के
करता रहा हर घडी इंन्तजार बस उसी का
गम का अखंड इक बदनसीब किरदार बन के
अखंड गहमरी गहमर एडमिन रचना
मेरी जिंदगी है वो आयी बहार बन के
करता रहा हर घडी इंन्तजार बस उसी का
गम का अखंड इक बदनसीब किरदार बन के
अखंड गहमरी गहमर एडमिन रचना
गोपाल दास गहमर साहित्य समारोह ****10
शुक्रवार से शनिवार हमारी चतुष्पदी (प्यार\प्रेम)
अध्यक्षा - आदरणीया शुभदा वाजपेयी जी को सादर समर्पित
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होने लगा हैं प्यार सनम से
खोने लगा हैं चैन कसम से
ख्यालों में ऐसे बस गए हो
जिया में जैसे प्राण कसम से
"कल्याणी झा "
शुक्रवार से शनिवार हमारी चतुष्पदी (प्यार\प्रेम)
अध्यक्षा - आदरणीया शुभदा वाजपेयी जी को सादर समर्पित
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होने लगा हैं प्यार सनम से
खोने लगा हैं चैन कसम से
ख्यालों में ऐसे बस गए हो
जिया में जैसे प्राण कसम से
"कल्याणी झा "
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