Sunday, 29 June 2014

गोपाल राम गहमरी साहित्‍य समारोह -15,प्रारंभ्‍भ दिनांक 6 से 7 जनू 2014 अध्‍यक्ष लव कुमार प्रणय जी सभी रचना ' हमारा मुक्‍तक '''विषय -सालगिरह

आदरणीय अध्‍यक्ष गुरूवर लवकुमार प्रणय जी, एवं कार्यक्रम संचालकआदरणीय धीरज श्रीवास्‍तव जी के भागीरथीप्रयास से आदरणीय गुरूवर ओम नीरवजी को समर्पित गोपाल राम गहमरी साहित्‍यसमारोह -15 दिनांक 6 से 7 जनू 2014 का प्रथम चरण हमारामुक्‍तक पूर्ण हुआ। हम समस्‍त गहमरक्षेत्र वासीयों की तरफ से समस्‍तरचनाकारों एवं अध्‍यक्ष,संचालक एवं आदरणीयगुरूवर ओमनीरव का आभार प्रकटकरते है तथा उनके स्‍वस्‍थ जीवन एवं उज्‍ज्‍वलभविष्‍य की कामना करतें है।विजेता की नाम की घोषण आज के कार्यक्रमके समाप्ति के साथ ही दोनो कार्यक्रम की एक साथ होगी।

रचनाकारों के नाम क्रमस: आदरणीय कैलाशचन्‍द्रा, आदरणीय सुरेश मिश्रा,आ0लव कुमार प्रणय जी, आदरणीय रजनीश तपन जी , आदरणीय संतोष नेमा जी, आदरणीया अन्‍नपूर्णा वाजपेयी जी ,आदरणीय कुन्‍दन उपाध्‍यायजी , आादरणीयलक्ष्‍मण प्रसाद लाडीवाल जी,आदरणीय करन एसपी जी, आदरणीया मंजू शर्मा जी ,आदरणीय पवन गाेयल जी, आदरणीय धनन्‍ंजय उपाध्‍याय जी गजल,आदरणीय नारायण गौरव जी ,आदरणीय नीरज कुमारनीर जी ,एडमिन, आदरणीय डा0 हीरा लाल प्रजापति जी ,एवं आदरणीया रीमा वर्मा जी आप सबका हार्दिक आभार एंव आगे भी आपके सहयोग की आशा

1-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला      2 सुश्री रमा वर्मा   प्रतिक्रिया = श्री सतीश वर्मा जी

Kailash Chand
विषय - सालगिरह
माननीय श्री लव कुमार की अध्यक्षता में
आदरणीय श्री ओम नीरव जी एवं अखंड गहमरीजी के माँ बाबु जी को समर्पित
***
मैं बनू स्वर अगर तुम बनो रागिनी
मैं बनू रात तो तुम बनो चांदनी
बस यही प्रार्थना है प्रभु से मेरी
हर जन्म में हो तू मेरी अर्धांगिनी
~ कैलाश भारद्वाज
फरीदाबाद
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SureshkumarMishra
शुक्रवार से शनिवार तक ''' हमारा मुक्‍तक ''' --- इससप्‍ताह का विषय -सालगिरह---
समारोह अध्यक्ष मा. लव कुमार जी कीअध्यक्षता में
आदरणीय श्री ओम नीरव जी के समक्ष श्रीअखंड गहमरी जी के माता-पिता को समर्पित
केवल कोशिश है आप सब के समक्ष्य -निवेदनस्वारूप किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ
विषय ==सालगिरह
सुमन सा सुगंधित रहो मुस्कराओ ,यह जीवन सुमन देवताको चढ़ाओ
जियो लोकहित और आशीष पाओ ,जीवन सरल तुम यह व्रतनिभाओ
इसी वास्ते तुमको अर्पण किया हैं ,लेखनी से दे रहासालगिरह की बधाई
नहीं देह तुम अमर आत्मा हो ,नहीं स्वार्थी जीवनअब तुम बिताओ
सुरेश कुमार उत्साही
९९१७०१०६६१०
९६३४७६३०७६
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लवकुमार 'प्रणय'
प्रिय भाई अखंड गहमरी जी एवम्
आदरणीय भाई ओमनीरव जी को सादरसमर्पित
आज का विषय == सालगिरह
*मुक्तक *
सालगिरह पर आना प्रियतम
इस दिल में बस जाना प्रियतम
कब तक पीर सहे ये विरहन
अब तो कंठ लगाना प्रियतम
लव कुमार 'प्रणय'

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रजनीश'तपन'
2 hrs
आदरणीय अध्यक्ष जी लव कुमार प्रणय जी ,आदरणीय ओम नीरव जी कीअनुमति से ~
एक मुक्तक~
@@@
आजादी का उत्सव मनता,मुद्दत से हर वर्ष।
न कोई संभावना ही ना ही कोई हर्ष।
पुतले निस दिन बन रहे,जीवित पर अपमान।
आज है उनकी पुण्य तिथि,करने दो उत्कर्ष।
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SantoshNema
शुक्रवार शनिवार ''' हमारा मुक्‍तक ''' विषय -सालगिरह
समारोह अध्यक्ष गुरूवर मा लव कुमार 'प्रणय' जी की अध्यक्षता में
आदरणीय गुरूवर श्री Om Neerav जीको सादर समर्पित मुक्‍तक
वैसे तो सालगिरह ज़िंदगी का घटता क्रम है....!
उमंग-उत्साह के आगे कंहा टिकता भ्रम है....!
बधाइयाँ लेने-देने का भी हर अंदाज़ हैज़ुदा
'संतोष"सालगिरह जिसकी उसका दम- ख़महै ...!

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AnnapurnaBajpai
आदरणीय अध्यक्ष महोदय लव कुमार प्रणय जीऔर माननीय ओम नीरव के समक्ष प्रस्तुत एक मुक्तक विषय- 'सालगिरह'
हर शख्स को रहे जिसका इंतजार
बेसब्र बच्चे करें उसका इंतजार
गरीब की खोली मे कभी न आये
सालगिरहों को धनी का इंतजार । ...................अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु'

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KundanUpadhayay
समारोह अध्यक्ष मा. लव कुमार जी केअध्यक्षता में
आदरणीय श्री ओम नीरव जी के समक्ष श्रीअखंड गहमरी जी के माता पिता को समर्पित~साल गिरह पर एक मुक्तक!
विषय- साल गिरह
त्याग समर्पण भावना, सहयोग समर्पित हाथ!
साल गिरह की शुभ घडी ,लाई खुशियाँ साथ!
स्नेहित मन आनन्दित हुआ,दिया प्रकृति सौगात!
आदर्शवान बेटा खिला,मात पिता के साथ!
कुन्दन>जय हिन्द!
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LaxmanprasadLadiwala
हमार मुक्तक-
समारोह अध्यक्ष मा. लव कुमार जी कीअध्यक्षता में
आदरणीय श्री ओम नीरव जी के समक्ष श्रीअखंड गहमरी जी के माता-पिता को समर्पित=
साल गिरह पर अर्ज करूँ होकर भाव विभोर
बालक एक अबोध को, बना गए सिरमोर|
सही गलत क्या जानता, बालक एक अबोध
ऐसे हम माँ-बाँप को, नमन करे कर जोर ||
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
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Karan Sp

समारोह अध्यक्ष आदरणीय लव कुमार प्रणयजी की अध्यक्षता मे आदरणीय ओम नीरव जी को समर्पित एक मुक्तक

बिषय- सालगिरह
कई सालों से जिनको हम , धडकने देते आये हैं।
उन्हीं से जोडकर बन्धन ,निभाते प्रीति आयेहैं।
सराफत से मेरे मौला, सलामत रखना तुम यूँही।
मेरे हर सालगिरहों मेँ, मिलेँ उनके ही सायेहैं।
ँँँँ
करन सिंह परिहार
पिण्डारन- बाँदा (उ.प्र.)

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ManjuSharma
6 June at 23:00
शुक्रवार से शनिवार तक ''' हमारा मुक्‍तक ''' --- इससप्‍ताह का विषय -सालगिरह---
समारोह अध्यक्ष मा. लव कुमार जी कीअध्यक्षता में
आदरणीय श्री ओम नीरव जी के समक्ष श्रीअखंड गहमरी जी के माता-पिता को समर्पित=====
दो दिलों और दो परिवार के बंधन के अरमानये सालगिरह
लम्बा अरसा संग संग प्यार से गुजारने कीप्रतीक ये सालगिरह
परदेश में नहीं कोई ठिकाना परिणय रिश्तेकी उम्र का
मुबारक हो आपको कई जन्मों के रिश्तों कीपहचान ये सालगिरह
---- मँजु शर्मा०६-०६ २०१४

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PawanGoel
आदरणीय अध्यक्ष महोदय लव कुमार प्रणय जीऔर माननीय ओम नीरव के समक्ष एक अपरिपक्व सा प्रयास:
शीर्षक : सालगिरह
ये जिंदगी कुछ इस तरह से मेरी सालगिरहमनाती है,
जाने दुश्मन है या मुझसे कोई पुरानीदोस्ती निभाती है,
ठग है,व्यापारी है या कोई मंझी हुई कारीगर है जिंदगी,
ले कर अनेक लम्हे उम्र से थोडे़ सेतजुर्बे थमा जाती है।
(पवन गोयल )
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DhananjayUpadhyay
6 June at 23:22
समारोह अध्यक्ष आदरणीय श्री लव कुमारप्रणव जी की अध्यक्षता में मान्यनीय श्री ओम निरव जी के समक्ष सादर प्रस्तुत
मुक्तक
विषय ---साल गिरह
साल गिरह पर आज प्रिये तुमको क्या उपहारदू.
साड़ी,चुनरी ,कंगन ,बिदिया या बाहो का हार दू.
नही मेरे पास कुछ भी बिना तुम्हारे प्यारके
चांद ,सितारे दू तुमको या सिंदूरका श्रृंगार दू.
धनञ्जय उपाध्याय 'गजल'
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NarayanGaurav
20 hrs
आदरणीय अध्यक्षजी को सादर समर्पित ।
"मुक्तक"
विषय-सालगिरह
इस जिंदगी में सिर्फ तड़पन और विरह है।
मिलन की पैरवी मे मेरे दिल की जिरह है।
क्या बताऊँ किस हाल में जिंदा हूँ तुमबिन मैं,
आज जुड़ाव नही, बिखराव की सालगिरहहै।
-नारायण गौरव ।
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नीरज कुमार नीर
16 hrs
विषय '''सालगिरह"
....
आदरणीय अध्यक्ष महोदय लव कुमार प्रणय जीऔर माननीय ओम नीरव जी के समक्ष सादर प्रस्तुत एक मुक्तक
....................
साज का,श्रृंगार का, रूप के त्यौहार का.
क्या मैं उपमान दूँ प्रिय तुम्हारेप्यार का.
सालगिरह का सुअवसर, क्या दूँ मैं सौगात.
सम्य नहीं धरा पर कुछ तुम्हारे प्यारका.
.............. नीरज कुमार नीर .......

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AkhandGahmari
18 hrs · Edited
शुक्रवार शनिवार ''' हमारा मुक्‍तक ''' विषय -सालगिरह
समारोह अध्यक्ष गुरूवर मा लव कुमार 'प्रणय' जी की अध्यक्षता में
आदरणीय गुरूवर श्री Om Neerav जीको समरर्पित मुक्‍तक रचना कहने का प्रयास
212 212 212 212
जुड़ गया नाम अब संग तेरे सजन
प्‍यार से ले चली सात फेरे सजन
सालगिरहे मनाये रहे बस यूँ ही
प्‍यार भूले कभी हम न मेरे सजन
अखंड गहमरी (एडमिन रचना ) मुकाबले सेबाहर
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डॉ.हीरालाल प्रजापति
11 hrs · Edited
अध्‍यक्ष आदरणीय लव कुमार प्रणय जी एवं प्रिय भाई अखंड गहमरी जी एवम्
परम आदरणीय ओमनीरव जी को सादर समर्पित
आज का विषय == सालगिरह
*मुक्तक *
ऐसा करूँ धमाल – धूम सालगिरह पे ॥
ऐसा दिखाऊँ रक़्स झूम सालगिरह पे ॥
इतना हूँ ख़ुश कि आज तो जी है अदू के भी ,
जाकर के लिपट जाऊँ चूम सालगिरह पे ॥
( अदू = शत्रु , दुश्मन )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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RamaVerma
6 June at 23:41 · Nagpur · Edited
''' हमारा मुक्‍तक '''विषय -सालगिरह
समारोह अध्यक्ष मा लव कुमार 'प्रणय' जी की अध्यक्षता में
आदरणीय श्री Om Neerav जीके समक्ष श्री अखंड गहमरी जी के माता-पिता को समर्पित=====
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सालगिरह की शुभ घड़ी, आई ऐसी खास
सबके मन आनंद है , सबके मन उल्लास
अर्ज हमारी है यही , सर पर रखना हाथ
आशीर्वाद के रूप में, हरदम रहना पास
~रमा वर्मा~ ६-६-१४

आप सब रचनाकारों का हार्दिक आभार

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