इस प्रकार कार्यक्रम अध्यक्ष करीम पठान अनमोल के भागीरथी प्रयास से
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -19 दिनांक 04 से 6 जुलाई 2014 का प्रथम
चरण हमारा मुक्तक पूर्ण हुआ। हम समस्त गहमरक्षेत्र वासीयों की
तरफ से समस्त रचनाकारों एवं अध्यक्ष,महोदय का आभार प्रकट करते है तथा आप
सबके स्वस्थ जीवन एवं उज्ज्वल भविष्य के लिये प्रार्थना करतें है।
महेश जैन ज्येाति जी, रमा वर्मा जी, सतीश वर्मा जी, रेखा जोशी जी, कान्ती शुक्ला जी, नारायण गौरव जी, अखंड गहमरी,अलका गुप्ता जी, लक्ष्मण प्रसाद लाडीवाल जी, करण एस पी जी, सुषमा दूबे जी, डा0 हीरालाल प्रजापति जी, कैलास चन्द्र जी, संतोष नेमा जी, मंजू शर्मा जी, कल्याणी झा जी, लव कुमार प्रणय जी, ओम प्रकाश नाटियवाल जी,कवि मिथिलेस गहमरी जी, उदुधव देवली जी अाप सब गुरूजनो मित्रो एवं रचनाकारेा का समारोह की समाप्ती पर हार्दिक आभार हम आपके स्वस्थ जीवन एवं उज्जवल भविष्य की प्रार्थना करते है एव समस्त विेजताओं को हार्दिक बधाई
विजेता '''' प्रथम महेश जैन ज्योति जी
दिवतीय -- रमा वर्मा जी
प्रतिक्रिया ' कल्याणी झा जी
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
आदरणीय अध्यक्ष श्री करीम पठान
अनमोलजी को समर्पित ।
विषय-जुल्फ/गेसू ।
---------------
उनकी जुल्फों में घटाओँ का
नजारा देखा ,
हमने आँखों में समन्दर का
किनारा देखा ,
कभी गिरे भी तो गिरने से
पहले थाम लिया ,
उनकी बाहों में सदाँ हमने
सहारा देखा ।
***
महेश जैन 'ज्योति' ,
मथुरा ।
Rama Verma
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
शीर्षक~ज़ुल्फ,केश,बाल आदि
अध्यक्ष श्री करीम पठान 'अनमोल'जी के समक्ष प्रस्तुत~
*************************************************************
नागिन सी जुल्फें लहराकर......गौरी जब मधुवन में आये
छनक छनक जब पायल बाजे,तब भँवरों का दिल खो जाये
लहराते बालों की खुशबू........मधुवन सुरभित कर जाती है
देख रूप की मादकता को...........अम्बर पर चंदा मुसकाये
अध्यक्ष ---करीम पठान अनमोल जी को सादर समर्पित !
( साथ ही अन्य प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ, प्रतिक्रिया आमंत्रण के साथ )
तारक पुष्प की स्निग्धता तन मन में, सिमटे सकल काले बादल तुम्हारे बालों में,
विधु ने मानो निज हाथों से हो तुम्हें गढ़ा, चंद्र ज्योत्सना की चमक है गालों में।
तुम कली खिली नई नई, परी कोई खूबसूरत हो, या बुत हो एक संगमरमर की ,
ज़मीं रब से रह रह कर दुआ करे तब सुमन ऐसा खिलता कई युग कई सालों में ।
महेश जैन ज्येाति जी, रमा वर्मा जी, सतीश वर्मा जी, रेखा जोशी जी, कान्ती शुक्ला जी, नारायण गौरव जी, अखंड गहमरी,अलका गुप्ता जी, लक्ष्मण प्रसाद लाडीवाल जी, करण एस पी जी, सुषमा दूबे जी, डा0 हीरालाल प्रजापति जी, कैलास चन्द्र जी, संतोष नेमा जी, मंजू शर्मा जी, कल्याणी झा जी, लव कुमार प्रणय जी, ओम प्रकाश नाटियवाल जी,कवि मिथिलेस गहमरी जी, उदुधव देवली जी अाप सब गुरूजनो मित्रो एवं रचनाकारेा का समारोह की समाप्ती पर हार्दिक आभार हम आपके स्वस्थ जीवन एवं उज्जवल भविष्य की प्रार्थना करते है एव समस्त विेजताओं को हार्दिक बधाई
विजेता '''' प्रथम महेश जैन ज्योति जी
दिवतीय -- रमा वर्मा जी
प्रतिक्रिया ' कल्याणी झा जी
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
आदरणीय अध्यक्ष श्री करीम पठान
अनमोलजी को समर्पित ।
विषय-जुल्फ/गेसू ।
---------------
उनकी जुल्फों में घटाओँ का
नजारा देखा ,
हमने आँखों में समन्दर का
किनारा देखा ,
कभी गिरे भी तो गिरने से
पहले थाम लिया ,
उनकी बाहों में सदाँ हमने
सहारा देखा ।
***
महेश जैन 'ज्योति' ,
मथुरा ।
Rama Verma
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
शीर्षक~ज़ुल्फ,केश,बाल आदि
अध्यक्ष श्री करीम पठान 'अनमोल'जी के समक्ष प्रस्तुत~
*************************************************************
नागिन सी जुल्फें लहराकर......गौरी जब मधुवन में आये
छनक छनक जब पायल बाजे,तब भँवरों का दिल खो जाये
लहराते बालों की खुशबू........मधुवन सुरभित कर जाती है
देख रूप की मादकता को...........अम्बर पर चंदा मुसकाये
~रमा वर्मा~ (४-७-१४)
Satish Verma
गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्तक के अंतर्गत :अध्यक्ष ---करीम पठान अनमोल जी को सादर समर्पित !
( साथ ही अन्य प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ, प्रतिक्रिया आमंत्रण के साथ )
तारक पुष्प की स्निग्धता तन मन में, सिमटे सकल काले बादल तुम्हारे बालों में,
विधु ने मानो निज हाथों से हो तुम्हें गढ़ा, चंद्र ज्योत्सना की चमक है गालों में।
तुम कली खिली नई नई, परी कोई खूबसूरत हो, या बुत हो एक संगमरमर की ,
ज़मीं रब से रह रह कर दुआ करे तब सुमन ऐसा खिलता कई युग कई सालों में ।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 04.07.2014
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -१९
हमारा मुक्तक -४जुलाई प़ात:१० बजेसे ६ जुलाई प़ात:१० बजे तक
समारोह अध्यक्ष - सम्मान्य करीम पठान अनमोल जी को सादर समर्पित
शीर्षक -जुल्फ /बाल/गेसू/केश...
मुम्बई / 04.07.2014
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -१९
हमारा मुक्तक -४जुलाई प़ात:१० बजेसे ६ जुलाई प़ात:१० बजे तक
समारोह अध्यक्ष - सम्मान्य करीम पठान अनमोल जी को सादर समर्पित
शीर्षक -जुल्फ /बाल/गेसू/केश...
ज़ुल्फ़ों की छाँव में उलझ गए जब
धागे मुहब्बत के सुलझ गए सब
खुशनसीब हूँ मिली जो मुहब्बत
ज़िन्दगी हसीन है समझ गए अब
रेखा जोशी
धागे मुहब्बत के सुलझ गए सब
खुशनसीब हूँ मिली जो मुहब्बत
ज़िन्दगी हसीन है समझ गए अब
रेखा जोशी
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -१९
हमारा मुक्तक -४जुलाई प़ात:१० बजेसे ६ जुलाई प़ात:१० बजे तक
समारोह अध्यक्ष - सम्मान्य करीम पठान अनमोल जी को सादर समर्पित
शीर्षक -जुल्फ /बाल/गेसू/केश
हमारा मुक्तक -४जुलाई प़ात:१० बजेसे ६ जुलाई प़ात:१० बजे तक
समारोह अध्यक्ष - सम्मान्य करीम पठान अनमोल जी को सादर समर्पित
शीर्षक -जुल्फ /बाल/गेसू/केश
मेघ ! तुम्हारे श्यामल केशों का जूड़ा हो गया विश्रृंखलित ।
शीतल पवन बही पुलकित हो मंथर गति से सरस सुगंधित
हरित मखमली वसन सजें अब खेतों की सूखी माटी पर -
वर्षा ने वितरण कर डाला अपना संचित कोष अपरिमित ।
कान्ति शुक्ला 'उर्मि'
शीतल पवन बही पुलकित हो मंथर गति से सरस सुगंधित
हरित मखमली वसन सजें अब खेतों की सूखी माटी पर -
वर्षा ने वितरण कर डाला अपना संचित कोष अपरिमित ।
कान्ति शुक्ला 'उर्मि'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
आदरणीय अध्यक्ष श्री करीम पठान अनमोलजी को समर्पित ।
विषय-जुल्फ/गेसू ।
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
आदरणीय अध्यक्ष श्री करीम पठान अनमोलजी को समर्पित ।
विषय-जुल्फ/गेसू ।
आज तो आज है, जो बीत चुका, वो कल कहाँ से लाऊँ ?
ठोस हो गए हैं भाव अगर, तो फिर तरल कहाँ से लाऊँ ?
कभी हर पल था मेरा, तेरी जुल्फ के घने साये में,
वक्त के सूखे में गेसू की वो, फसल कहाँ से लाऊँ ?
-नारायण गौरव ।
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -19
हमारा मुक्तक -4जुलाई प्रात:1० बजेसे 6 जुलाई प्रात:1० बजे तक
समारोह अध्यक्ष - सम्मान्य करीम पठान अनमोल जी को सादर
शीर्षक -जुल्फ /बाल/गेसू/केश.
ठोस हो गए हैं भाव अगर, तो फिर तरल कहाँ से लाऊँ ?
कभी हर पल था मेरा, तेरी जुल्फ के घने साये में,
वक्त के सूखे में गेसू की वो, फसल कहाँ से लाऊँ ?
-नारायण गौरव ।
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -19
हमारा मुक्तक -4जुलाई प्रात:1० बजेसे 6 जुलाई प्रात:1० बजे तक
समारोह अध्यक्ष - सम्मान्य करीम पठान अनमोल जी को सादर
शीर्षक -जुल्फ /बाल/गेसू/केश.
लहराई जो तेरी जुल्फ घटा घनघोर छा गई
मेरा दिल हुआ बेकाबू तू नैनो को भा गई
अब जीने की तमन्ना तेरी जुल्फो की छांव में
तू बन के हमारी जिन्दगी जिन्दगी में आ गई
अखंड गहमरी एडमिन रचना
अलका गुप्ता
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
शीर्षक - ज़ुल्फ,केश,बाल आदि
अध्यक्ष श्री करीम पठान 'अनमोल'जी के समक्ष सादर प्रस्तुति -
=======================================
मेरा दिल हुआ बेकाबू तू नैनो को भा गई
अब जीने की तमन्ना तेरी जुल्फो की छांव में
तू बन के हमारी जिन्दगी जिन्दगी में आ गई
अखंड गहमरी एडमिन रचना
अलका गुप्ता
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
शीर्षक - ज़ुल्फ,केश,बाल आदि
अध्यक्ष श्री करीम पठान 'अनमोल'जी के समक्ष सादर प्रस्तुति -
=======================================
केश काले कजरारे नयन |
घुन्घरारी लटें सजल नयन |
बांकपन झटके बदन ज्यूँ ..
काकुले मद भरे तिरछे नयन ||
----------अलका गुप्ता------------
Laxmanprasad Ladiwala
गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्त क
अध्यलक्ष ---करीम पठान अनमोल जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत
विषय ---जुल्फ-, बाल, केश गेसू .
गीतिका छंद ( 14 -14 मात्राए, अंत लघु गुरु से )
घुन्घरारी लटें सजल नयन |
बांकपन झटके बदन ज्यूँ ..
काकुले मद भरे तिरछे नयन ||
----------अलका गुप्ता------------
Laxmanprasad Ladiwala
गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्त क
अध्यलक्ष ---करीम पठान अनमोल जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत
विषय ---जुल्फ-, बाल, केश गेसू .
गीतिका छंद ( 14 -14 मात्राए, अंत लघु गुरु से )
शिक्षा का विस्तार करे, शौचालय निर्माण करे
उनके ही अब बाल बचे, सब सरकारे ध्यान धरे |
फौजी का सम्मान रहे |देश सुरक्षित तभी रहे,
केश लोचती विधवाएं, शर्मनाक ये घटनाए |
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला,जयपुर
Karan Sp
गोपाल राम गहमरी साहित्यिक समारोह- 19
बिषय- जुल्फ
ँँँ
समारोह अध्यक्ष सम्मान्य आदरणीय करीम पठान अनमोल जी, आदरणीय अखण्ड गहमरी जी एवं मंच के प्रबुद्ध जनों के अवलोकनार्थ एक मुक्तक
ँँँँ
उठी मन मरु में जो हलचल, बयाँ कैसे करूँ यारा।
खुली जुल्फों में उलझा मै, बही अन्तस सरस धारा।
खिला तन पुष्प के जैसा, निगाहें देखकर उनकी।
धरूँ अब धीर मै कैसे, नयन बाणों नें है मारा।
ँँँँ
करन सिंह परिहार
पिण्डारन- बाँदा(उ.प्र.)
Sushma Joshi Dubey
मा० गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-१९ |
हमारा मुक्तक-४ जुलाई से ६ जुलाई १० बजे तक|
बिषय:-जुल्फ,बाल,केश,गेसू,समानार्थी|
समारोह प्रमुख मा० करीम पठान 'अनमोल' साहब|
````````````````````````````````````````````````````````````````
कुंतल केश कोमल वरन उज्जवल उसके नैन
भोली चितवन दिखे नहीं तो हो जाती बेचैन !
गिरती/ इठलाती ठुमक ठुमक कर चलती वो
मैं बावरी जीती बचपन उसके संग दिन रैन !!
उनके ही अब बाल बचे, सब सरकारे ध्यान धरे |
फौजी का सम्मान रहे |देश सुरक्षित तभी रहे,
केश लोचती विधवाएं, शर्मनाक ये घटनाए |
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला,जयपुर
Karan Sp
गोपाल राम गहमरी साहित्यिक समारोह- 19
बिषय- जुल्फ
ँँँ
समारोह अध्यक्ष सम्मान्य आदरणीय करीम पठान अनमोल जी, आदरणीय अखण्ड गहमरी जी एवं मंच के प्रबुद्ध जनों के अवलोकनार्थ एक मुक्तक
ँँँँ
उठी मन मरु में जो हलचल, बयाँ कैसे करूँ यारा।
खुली जुल्फों में उलझा मै, बही अन्तस सरस धारा।
खिला तन पुष्प के जैसा, निगाहें देखकर उनकी।
धरूँ अब धीर मै कैसे, नयन बाणों नें है मारा।
ँँँँ
करन सिंह परिहार
पिण्डारन- बाँदा(उ.प्र.)
Sushma Joshi Dubey
मा० गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-१९ |
हमारा मुक्तक-४ जुलाई से ६ जुलाई १० बजे तक|
बिषय:-जुल्फ,बाल,केश,गेसू,समानार्थी|
समारोह प्रमुख मा० करीम पठान 'अनमोल' साहब|
````````````````````````````````````````````````````````````````
कुंतल केश कोमल वरन उज्जवल उसके नैन
भोली चितवन दिखे नहीं तो हो जाती बेचैन !
गिरती/ इठलाती ठुमक ठुमक कर चलती वो
मैं बावरी जीती बचपन उसके संग दिन रैन !!
सुषमा दुबे
गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्त क
अध्यलक्ष ---करीम पठान अनमोल जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत
विषय ---जुल्फ-, बाल, केश गेसू .
=======================================
आख़िरी क्या सोचकर पहला लिखा ?
उनका इक्का किसलिए दहला लिखा ?
वाँ सभी लोगों के सिर बिन बाल थे ,
तुमने कुछ को ही मगर टकला लिखा ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
=======================================
Kailash Chand
गोपालराम गहमरी समारोह-19
हमारा मुक्तक
विषय-जुल्फ/गेसू
समारोह अध्यक्ष आदरणीय करीम पठान अनमोल जी एवं सभी सुधिजनो के समक्ष प्रस्तुत
*******
सोचता हूँ क्या लिखूं उस रूप और श्रृंगार पर
गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्त क
अध्यलक्ष ---करीम पठान अनमोल जी के प्रतिष्ठा में प्रस्तुत
विषय ---जुल्फ-, बाल, केश गेसू .
=======================================
आख़िरी क्या सोचकर पहला लिखा ?
उनका इक्का किसलिए दहला लिखा ?
वाँ सभी लोगों के सिर बिन बाल थे ,
तुमने कुछ को ही मगर टकला लिखा ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
=======================================
Kailash Chand
गोपालराम गहमरी समारोह-19
हमारा मुक्तक
विषय-जुल्फ/गेसू
समारोह अध्यक्ष आदरणीय करीम पठान अनमोल जी एवं सभी सुधिजनो के समक्ष प्रस्तुत
*******
सोचता हूँ क्या लिखूं उस रूप और श्रृंगार पर
जो अप्सरा सी छा गयी दिल के दरो दीवार पर
लाख कोशिश की संभालू दिल मगर संभला नही
दो लटें जब गेसुओं की आ गयीं रुखसार पर
~~~
"कैलाश भारद्वाज"
फरीदाबाद
Santosh Nema
लाख कोशिश की संभालू दिल मगर संभला नही
दो लटें जब गेसुओं की आ गयीं रुखसार पर
~~~
"कैलाश भारद्वाज"
फरीदाबाद
Santosh Nema
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -19
समारोह - हमारा मुक्तक, विषय-जुल्फ
आदरणीय-करीम पठान अनमोल जी को;;सादर समर्पित....;;;;;;;
=========================================
समारोह - हमारा मुक्तक, विषय-जुल्फ
आदरणीय-करीम पठान अनमोल जी को;;सादर समर्पित....;;;;;;;
=========================================
जुल्फों के साये में पनाह मांगते हैं .
मुहब्बत भरी एक निगाह मांगते हैं
जिन पर हमारी जां फिदां है 'संतोष"
उन्ही से मुहब्बत बे-पनाह मांगते हैं ....!
मुहब्बत भरी एक निगाह मांगते हैं
जिन पर हमारी जां फिदां है 'संतोष"
उन्ही से मुहब्बत बे-पनाह मांगते हैं ....!
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गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्तक
अध्यक्ष ---करीम पठान अनमोल जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
विषय ---जुल्फ-, बाल, केश गेसू .
गर लटें जो खुल जायें , तम हो जायेगा
गर नजर ये मिल जाये , कुछ हो जायेगा
पकड़ के हाथ जता ना अपना पागलपन
गर विदा अंतिम लें लें ,गम हो जायेगा
--- मँजु शर्मा ०४-०७-२०१४
Kalyani Jha
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
शीर्षक~ज़ुल्फ,केश,बाल आदि
अध्यक्ष श्री करीम पठान 'अनमोल'जी के समक्ष सादर प्रस्तुत~
***************************************************************************
निगाहे देखती तुझको राहो में न मटकना तुम
तारीफ करे जुल्फों की तेरी तो न बहकना तुम
इन रेश्मी जुल्फो की छांव में मरने की चाहत
खुली जुल्फो पे रहम करना न इन्हे झटकना तुम
गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्तक
अध्यक्ष ---करीम पठान अनमोल जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
विषय ---जुल्फ-, बाल, केश गेसू .
गर लटें जो खुल जायें , तम हो जायेगा
गर नजर ये मिल जाये , कुछ हो जायेगा
पकड़ के हाथ जता ना अपना पागलपन
गर विदा अंतिम लें लें ,गम हो जायेगा
--- मँजु शर्मा ०४-०७-२०१४
Kalyani Jha
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~19
हमारा मुक्तक 4 से 6 जुलाई 2014
शीर्षक~ज़ुल्फ,केश,बाल आदि
अध्यक्ष श्री करीम पठान 'अनमोल'जी के समक्ष सादर प्रस्तुत~
***************************************************************************
निगाहे देखती तुझको राहो में न मटकना तुम
तारीफ करे जुल्फों की तेरी तो न बहकना तुम
इन रेश्मी जुल्फो की छांव में मरने की चाहत
खुली जुल्फो पे रहम करना न इन्हे झटकना तुम
कल्याणी झा"
लव कुमार 'प्रणय'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -19
हमारा मुक्तक -4जुलाई प्रात:1० बजेसे 6 जुलाई प्रात:1० बजे तक
समारोह अध्यक्ष - सम्मान्य करीम पठान अनमोल जी को सादर
शीर्षक -जुल्फ /बाल/गेसू/केश...
(अतिथि रचना )
*मुक्तक *
तुम्हारे केश लहराये लगा सावन घटायें हैं
बुझाने प्यास अब मन की उठीं पावन घटायें हैं
प्रिये कुछ रूप की बारिश हमारे घर भी हो जाये
सुधा -रस आज बरसाओ कि मनभावन घटायें हैं
लव कुमार 'प्रणय'
Om Prakash Nautiyal
गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्तक
अध्यक्ष ---करीम पठान अनमोल जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
विषय ---जुल्फ-, बाल, केश गेसू .
-
बंधी जुल्फ़ें देखकर ही, यूं बेहोश हो लेंगें,
क्या होगा हाल हुजूर का, वो जब केश खोलेंगे,
घटायें छायेंगी मुँह पर फिर दमकेगी दामिनी
झटक कर जुल्फ़ चेहरे से जब हृदयेश बोलेंगे ! -
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Kavi Mithilesh Gahmari
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -19
समारोह - हमारा मुक्तक, विषय-जुल्फ
आदरणीय-करीम पठान अनमोल जी को;;;;;;;;;
नदी की तरह दो किनारों में बहना
सितम हो कोई मुस्कुरा के ही सहना
जमाने रहना में कही जाके, लेकिन
मुहब्ब्त की जुल्फों के साये में रहना
लव कुमार 'प्रणय'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -19
हमारा मुक्तक -4जुलाई प्रात:1० बजेसे 6 जुलाई प्रात:1० बजे तक
समारोह अध्यक्ष - सम्मान्य करीम पठान अनमोल जी को सादर
शीर्षक -जुल्फ /बाल/गेसू/केश...
(अतिथि रचना )
*मुक्तक *
तुम्हारे केश लहराये लगा सावन घटायें हैं
बुझाने प्यास अब मन की उठीं पावन घटायें हैं
प्रिये कुछ रूप की बारिश हमारे घर भी हो जाये
सुधा -रस आज बरसाओ कि मनभावन घटायें हैं
लव कुमार 'प्रणय'
Om Prakash Nautiyal
गोपाल राम गहमरी साहित्या समारोह -19 हमारा मुक्तक
अध्यक्ष ---करीम पठान अनमोल जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
विषय ---जुल्फ-, बाल, केश गेसू .
-
बंधी जुल्फ़ें देखकर ही, यूं बेहोश हो लेंगें,
क्या होगा हाल हुजूर का, वो जब केश खोलेंगे,
घटायें छायेंगी मुँह पर फिर दमकेगी दामिनी
झटक कर जुल्फ़ चेहरे से जब हृदयेश बोलेंगे ! -
-ओंम प्रकाश नौटियाल
Kavi Mithilesh Gahmari
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -19
समारोह - हमारा मुक्तक, विषय-जुल्फ
आदरणीय-करीम पठान अनमोल जी को;;;;;;;;;
नदी की तरह दो किनारों में बहना
सितम हो कोई मुस्कुरा के ही सहना
जमाने रहना में कही जाके, लेकिन
मुहब्ब्त की जुल्फों के साये में रहना
मिथिलेस गहमरी, धनबाद झारखंड 9451936687
Uddhav Deoli
मा० गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-१९ |
हमारा मुक्तक-४ जुलाई से ६ जुलाई १० बजे तक|
बिषय:-जुल्फ,बाल,केश,गेसू,समानार्थी|
समारोह प्रमुख मा० करीम पठान 'अनमोल' साहब|
--------------------------------------------------------
बिष्णु जी के चरणों से,
शिव जी की जटाओं से,
परमार्थ करनें हेतु,
गंगा चली शिखरों से||
Uddhav Deoli
मा० गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-१९ |
हमारा मुक्तक-४ जुलाई से ६ जुलाई १० बजे तक|
बिषय:-जुल्फ,बाल,केश,गेसू,समानार्थी|
समारोह प्रमुख मा० करीम पठान 'अनमोल' साहब|
--------------------------------------------------------
बिष्णु जी के चरणों से,
शिव जी की जटाओं से,
परमार्थ करनें हेतु,
गंगा चली शिखरों से||
उद्धव देवली/४-जुलाई २०१४|
समस्त रचनाकारेा का हार्दिक धन्यवाद '''''''''''''''''''''''''''''''समाप्त''''''''''''''''''''''''''''''''''अखंड गहमरी ''''''''''''''''''''
समस्त रचनाकारेा का हार्दिक धन्यवाद '''''''''''''''''''''''''''''''समाप्त''''''''''''''''''''''''''''''''''अखंड गहमरी ''''''''''''''''''''
अत्यंत सुंदर संकलन
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