इस प्रकार गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह 20 का प्रथम चरण हमारा मुक्तक दिनांक 11 जुलाई 2014 से 13 जुलाई 2014 तक
अध्यक्ष आदरणीय महेश चन्द्र जैन ज्योति एवं आप सब के प्रयास से पूर्ण
हुआ। हम आपस के उज्ज्वल भविष्य एवं स्वस्थ जीवन की कामना करते है तथा
आशा करते है कि आप सब इसी प्रकार मंच को अपना स्नेह देते रहेगें ।
इस समारोह में आप क्रमंस - आदरणीय हितीक शर्मा जी , नितिन सिकरवार जी , ओमप्रकाश नौटींयाल जी, लक्ष्मण प्रसाद लाडीवाल जी , विजय शंकर मिश्रा जी, पारूल गुप्ता जी, लव कुमार प्रणय जी, नारायण गौरव जी, उमेश श्रीवास्तव जी, पवन गोली जी,मीना मिश्रा जी, धीरेन्द्र कुमर जोशी जी, राकेश जोशी जी, सतीश वर्मा जी, महेश जैन ज्योति जी, डा अर्चना गुप्ता जी, अन्नुपूर्णा बाजपेयी जी, सुषमा जोशी दूबे जी,Uddhav Deoli जी, कल्याणी जैन झा जी, कैलास चन्द्रा जी, अरूण शर्मा जी,कान्ती शुक्ला जी, सतोष नेमा जी, रजनीश तपन जी, पारूल गुप्ता जी, अलका गुप्ता जी, प्रियंका पांड जी, कवि सतीश मघुप जी, डा0 हीरा लाल प्रजापति जी, रमा वर्मा जी, कुन्दन उपाश्याय जी, मीना मिश्रा जी,सब ने अपना योगदान दिया हम पूरे गहमर क्षेत्र के तरफ से आप के आभारी है ।
इस समारोह में प्रथम स्थान ---आदरणीय हितीक शर्मा जी
दितीय स्थान ------आदरणीय नितिन सिकरवार पागल जी
प्रतिक्रिया के लिये आदरणीय सतीश वर्मा जी
को दिया गया आप सब का हार्दिक अभिनंन्दन
Hitesh Sharma
11 July at 15:46 · Lucknow
शुक्रवार शनिवार - मुक्तक
विषय - आँख/नयन/नेत्र समानार्थी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 20
समारोह अध्यक्ष आदरणीय Mahesh Jainjyoti
चाँद छिपा, बादल ने कर दी, मद्धम हो बाती जैसे।
और हवा कानों में मीठी, लोरी थी गाती वैसे।
थकन थकी दे खूब थपकियाँ, खूब किया मनुहार मगर,
ख्वाब तुम्हारे थे आँखों में, नींद भला आती कैसे।
- हितेश शर्मा “पथिक”
Nitin Sikarwar
11 July at 21:02
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी की प्रतिष्ठा में प्रस्तुत
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
मेरी आँखों में इक प्यासा समंदर रो रहा है।
जिधर देखूं उधर हर एक मंज़र रो रहा है ।
सर.ए.महफ़िल छुपा कर ग़म मैं जब से मुस्कुराया,
कोई तो है मेरे अंदर ही अंदर रो रहा है ।
नितिन सिकरवार 'पागल'
हमारा मुक्तक 11 से 13 जुलाई 2014
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
उन आँखो मे कहाँ नूर जिनमे हया न हो,
किस बात का गुरूर जब कि दिल में दया न हो,
छंद, शिल्प से सजी उस रचना में क्या पढें
अगर भाव, अनुभव, विचार कुछ भी नया न हो !
-
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी की प्रतिष्ठा में प्रस्तुत
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
जब बहते नयनों से आंसू विरह गीत नया बन जाता
सजल नेत्र से निरखे जिसका जीवन सफल हो जाता
करुनामयी के आँसू जब छलके करुना में निर्झर –
ह्रदय से निकले गीत स्नेह के आशीष वचन देजाता |
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~20
हमारा मुक्तक
शीर्षक~आँख ,नयन,चछु,नयन आदि।
समारोह अध्यक्ष श्री जैन ज्योति जी की प्रतिष्ठा मे प्रस्तुत~
***
एक आँख मे दो दो पानी।
एक खुशी,इक करुण कहानी
होती कब पहचान किसी को।
अंतस मे है कौन कहानी।
गोपाल गहमरी साहित्य समारोह-२०
शीर्षक -आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-सम्मान्य Mahesh Jainjyoti जी को समर्पित-
मौन भी मुखर हो जाता है
छंदों की लय में लहराता है
जब हीरे पन्ने सी आँखों में
कोई भाव उतर इठलाता है !
इस समारोह में आप क्रमंस - आदरणीय हितीक शर्मा जी , नितिन सिकरवार जी , ओमप्रकाश नौटींयाल जी, लक्ष्मण प्रसाद लाडीवाल जी , विजय शंकर मिश्रा जी, पारूल गुप्ता जी, लव कुमार प्रणय जी, नारायण गौरव जी, उमेश श्रीवास्तव जी, पवन गोली जी,मीना मिश्रा जी, धीरेन्द्र कुमर जोशी जी, राकेश जोशी जी, सतीश वर्मा जी, महेश जैन ज्योति जी, डा अर्चना गुप्ता जी, अन्नुपूर्णा बाजपेयी जी, सुषमा जोशी दूबे जी,Uddhav Deoli जी, कल्याणी जैन झा जी, कैलास चन्द्रा जी, अरूण शर्मा जी,कान्ती शुक्ला जी, सतोष नेमा जी, रजनीश तपन जी, पारूल गुप्ता जी, अलका गुप्ता जी, प्रियंका पांड जी, कवि सतीश मघुप जी, डा0 हीरा लाल प्रजापति जी, रमा वर्मा जी, कुन्दन उपाश्याय जी, मीना मिश्रा जी,सब ने अपना योगदान दिया हम पूरे गहमर क्षेत्र के तरफ से आप के आभारी है ।
इस समारोह में प्रथम स्थान ---आदरणीय हितीक शर्मा जी
दितीय स्थान ------आदरणीय नितिन सिकरवार पागल जी
प्रतिक्रिया के लिये आदरणीय सतीश वर्मा जी
को दिया गया आप सब का हार्दिक अभिनंन्दन
Hitesh Sharma
11 July at 15:46 · Lucknow
शुक्रवार शनिवार - मुक्तक
विषय - आँख/नयन/नेत्र समानार्थी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह - 20
समारोह अध्यक्ष आदरणीय Mahesh Jainjyoti
चाँद छिपा, बादल ने कर दी, मद्धम हो बाती जैसे।
और हवा कानों में मीठी, लोरी थी गाती वैसे।
थकन थकी दे खूब थपकियाँ, खूब किया मनुहार मगर,
ख्वाब तुम्हारे थे आँखों में, नींद भला आती कैसे।
- हितेश शर्मा “पथिक”
Nitin Sikarwar
11 July at 21:02
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी की प्रतिष्ठा में प्रस्तुत
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
मेरी आँखों में इक प्यासा समंदर रो रहा है।
जिधर देखूं उधर हर एक मंज़र रो रहा है ।
सर.ए.महफ़िल छुपा कर ग़म मैं जब से मुस्कुराया,
कोई तो है मेरे अंदर ही अंदर रो रहा है ।
नितिन सिकरवार 'पागल'
Om Prakash Nautiyal
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-20हमारा मुक्तक 11 से 13 जुलाई 2014
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी के समक्ष सादर प्रस्तुत !
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
उन आँखो मे कहाँ नूर जिनमे हया न हो,
किस बात का गुरूर जब कि दिल में दया न हो,
छंद, शिल्प से सजी उस रचना में क्या पढें
अगर भाव, अनुभव, विचार कुछ भी नया न हो !
-
-ओंम प्रकाश नौटियाल
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी की प्रतिष्ठा में प्रस्तुत
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
जब बहते नयनों से आंसू विरह गीत नया बन जाता
सजल नेत्र से निरखे जिसका जीवन सफल हो जाता
करुनामयी के आँसू जब छलके करुना में निर्झर –
ह्रदय से निकले गीत स्नेह के आशीष वचन देजाता |
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी
तेरे नैनों के जादू से बचना चाहा,
ऑंखें नदियाँ उसकी-समुन्दर चाहा,
उसे डूबोने का हर हुनर मालूम था,
कागज की कश्ती से पार करना चाहा II
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी
तेरे नैनों के जादू से बचना चाहा,
ऑंखें नदियाँ उसकी-समुन्दर चाहा,
उसे डूबोने का हर हुनर मालूम था,
कागज की कश्ती से पार करना चाहा II
विजय शंकर"मिश्रा"
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र "
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी एवं समस्त गुनीजनो के सम्मुख प्रस्तुत मुक्तक
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र "
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी एवं समस्त गुनीजनो के सम्मुख प्रस्तुत मुक्तक
सूनी मेरे मन की गलियाँ रहती पंथ निहार
कब आओगे कब डारोगे इन पर प्रीत फुहार
आये न बालमवा भेजी एक निगोड़ी चिठिया
बरसी प्रीत आँखों से तब बन कर मेघ मल्हार
------------------पारुल'पंखुरी'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
विषय --आँख /नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीयश्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर
(अतिथि रचना )
*मुक्तक*
डाल से टूटकर फूल है कब खिला
ढूँढते ही रहे पर कहाँ रब मिला
आँसुओं से भरी आँख ने ये कहा
जिन्दगी में सभी को कहाँ सब मिला
लव कुमार 'प्रणय'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-20
हमारा मुक्तक 11 से 13 जुलाई 2014
आदरणीय अध्यक्ष श्री महेश चंद्र जैन ज्योति जी को समर्पित ।
विषय-नयन/समानार्थी ।
कब आओगे कब डारोगे इन पर प्रीत फुहार
आये न बालमवा भेजी एक निगोड़ी चिठिया
बरसी प्रीत आँखों से तब बन कर मेघ मल्हार
------------------पारुल'पंखुरी'
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
विषय --आँख /नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीयश्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर
(अतिथि रचना )
*मुक्तक*
डाल से टूटकर फूल है कब खिला
ढूँढते ही रहे पर कहाँ रब मिला
आँसुओं से भरी आँख ने ये कहा
जिन्दगी में सभी को कहाँ सब मिला
लव कुमार 'प्रणय'
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह-20
हमारा मुक्तक 11 से 13 जुलाई 2014
आदरणीय अध्यक्ष श्री महेश चंद्र जैन ज्योति जी को समर्पित ।
विषय-नयन/समानार्थी ।
चलो नयन से नयन लड़ाते हैं ।
नयन लड़ाकर नयन चुराते हैं ।
नयन चुराकर के नयनों से फिर,
नयन चोर की रपट कराते हैं ।
-नारायण गौरव ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह 20
विषय - ऑखे/ नयन/ नेत्र
अध्यक्ष - माननीय महेश जैनज्योति जी
देखकर फिर सघन जलधर
विकल बरसे नयन झरझर ।
खिल उठे फिर प्रेम-मधुबन
अश्रु बरसो आज निर्झर ।।
डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
विषय --आँख /नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीयश्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित ।
नयन लड़ाकर नयन चुराते हैं ।
नयन चुराकर के नयनों से फिर,
नयन चोर की रपट कराते हैं ।
-नारायण गौरव ।
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह 20
विषय - ऑखे/ नयन/ नेत्र
अध्यक्ष - माननीय महेश जैनज्योति जी
देखकर फिर सघन जलधर
विकल बरसे नयन झरझर ।
खिल उठे फिर प्रेम-मधुबन
अश्रु बरसो आज निर्झर ।।
डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
विषय --आँख /नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीयश्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
सुख किसी साधन के नीचे मरा पड़ा है,
लिहाज आंख के पानी में ही डूब मरा है,
शर्म गुमशुदगी की फेहरिस्त में है कहीं,
जमीर नोटों के ढेर तले कुचला पड़ा है।
(पवन गोयल )
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -२ओ
पहला चरण -हमारा मुक्तक-११ जुलाई २०१४ से १३ जुलाई प्रातः तक
विषय :-आँखें/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र ज्योति जी
लिहाज आंख के पानी में ही डूब मरा है,
शर्म गुमशुदगी की फेहरिस्त में है कहीं,
जमीर नोटों के ढेर तले कुचला पड़ा है।
(पवन गोयल )
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -२ओ
पहला चरण -हमारा मुक्तक-११ जुलाई २०१४ से १३ जुलाई प्रातः तक
विषय :-आँखें/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र ज्योति जी
गुरु पूर्णिमा पर सद्गुरु भगवान के श्री चरणों में कोटिशः नमन के साथ
===============================================
नहीं पहुंच पा रही आज,बाबा! मैं तेरे द्वारे;
विवशता है क्षमा करो,बरस रहे नैन हमारे।
तुम हो करुणा-सागर,हम अबोध तेरी संतान ;
बचे रहें सब दोषों से,बरसें सदा आशीष तुम्हारे। ।
मीना मिश्रा
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -२०
हमारा मुक्तक-११ जुलाई शुक्रवार प़ात: १० बजे से १३ जुलाई प्रातः १० बजे तक
शीर्षक(विषय)-आँखें/नयन /नेत्र
समारोह अध्यक्ष -सम्मान्य श्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
साथ चले दोनों हमजोली,
सुबह दिवाली ,शामें होली,
शब्दों से भी परे प्रीत है ,
समझे नयन,नयन की बोली!
*********धीरेन्द्र कुमार जोशी
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नहीं पहुंच पा रही आज,बाबा! मैं तेरे द्वारे;
विवशता है क्षमा करो,बरस रहे नैन हमारे।
तुम हो करुणा-सागर,हम अबोध तेरी संतान ;
बचे रहें सब दोषों से,बरसें सदा आशीष तुम्हारे। ।
मीना मिश्रा
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -२०
हमारा मुक्तक-११ जुलाई शुक्रवार प़ात: १० बजे से १३ जुलाई प्रातः १० बजे तक
शीर्षक(विषय)-आँखें/नयन /नेत्र
समारोह अध्यक्ष -सम्मान्य श्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
साथ चले दोनों हमजोली,
सुबह दिवाली ,शामें होली,
शब्दों से भी परे प्रीत है ,
समझे नयन,नयन की बोली!
*********धीरेन्द्र कुमार जोशी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित ।
न चाहते हुये भी हमे उनसे प्यार हो गया
लब खुले भी नही आँखों से इज़हार हो गया
खुदा बचाये इस नामुराद मुहब्बत से हमे
न जाने कैसे दिल फिर इसका शिकार हो गया
रेखा जोशी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित ।
लब खुले भी नही आँखों से इज़हार हो गया
खुदा बचाये इस नामुराद मुहब्बत से हमे
न जाने कैसे दिल फिर इसका शिकार हो गया
रेखा जोशी
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित ।
( साथ ही अन्य प्रबुद्ध मित्रों के अवलोकनार्थ , प्रतिक्रिया आमंत्रण के संग )
शीर्षक : नयन ।
नयनों में मधुशाला झलके, अधरों पर खिले फूल पूनम के,
मुख पर दमके चंद्र ज्योत्सना , मुसकराओ जब तुम हल्के हल्के ।
जली वर्तिका बुझे दीप की, एक मुस्कान ये आभास दे गई
चंचल चपल कामिनि के मुख पर रह रह कर ज्यों दामिनि चमके ।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 11.07.2014
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
सभी सम्मान्य विद्वजनों की समालोचनार्थ ।
* अतिथि रचना *
---------------
नयन की बात को नैना समझते ,
कभी बचते कभी ये जा उलझते ,
चतुर इतने छिपाते कुछ भी नहीं ,
बडे नाजुक , पलों में ये बरसते ।
-----
महेश जैन 'ज्योति' ,
मथुरा ।
शुक्रवार से शनिवार =मुक्तक
विषय -आँख /नयन नेत्र
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२०
अध्यक्ष =माननीय महेश चाँद जैन जी को समर्पित
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
शीर्षक--आँख, नयन,चछु आदि।
समारोह अध्यक्ष श्री जैन ज्योति जी की प्रतिष्ठा में प्रस्तुत------
शीर्षक : नयन ।
नयनों में मधुशाला झलके, अधरों पर खिले फूल पूनम के,
मुख पर दमके चंद्र ज्योत्सना , मुसकराओ जब तुम हल्के हल्के ।
जली वर्तिका बुझे दीप की, एक मुस्कान ये आभास दे गई
चंचल चपल कामिनि के मुख पर रह रह कर ज्यों दामिनि चमके ।
: सतीश वर्मा
मुम्बई / 11.07.2014
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
सभी सम्मान्य विद्वजनों की समालोचनार्थ ।
* अतिथि रचना *
---------------
नयन की बात को नैना समझते ,
कभी बचते कभी ये जा उलझते ,
चतुर इतने छिपाते कुछ भी नहीं ,
बडे नाजुक , पलों में ये बरसते ।
-----
महेश जैन 'ज्योति' ,
मथुरा ।
शुक्रवार से शनिवार =मुक्तक
विषय -आँख /नयन नेत्र
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२०
अध्यक्ष =माननीय महेश चाँद जैन जी को समर्पित
मेरे मन का निबंध मौन की आँखों ने पढ़ लिया
तुम्हारी यादों ने असर मेरे दिल पर कर दिया
तैर आई हैं नयनों में तरल सी परछाइयाँ
उनकों भी संभाल अपने रुमाल में रख लिया
डॉ अर्चना गुप्ता
तुम्हारी यादों ने असर मेरे दिल पर कर दिया
तैर आई हैं नयनों में तरल सी परछाइयाँ
उनकों भी संभाल अपने रुमाल में रख लिया
डॉ अर्चना गुप्ता
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
विषय --आँख /नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीयश्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
हमारा मुक्तक
विषय --आँख /नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीयश्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
दिल ही नहीं तुमने नैनो का काजल भी चुराया है
इंतजार मे मुझको , तुमने दिन रात खूब रुलाया है
चित चोर कहलाते हो चोरी करना काम है तुम्हारा
प्रीत का नाम न लेना , तुमने दिल मेरा दुखाया है ।
..................अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु '
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी
इंतजार मे मुझको , तुमने दिन रात खूब रुलाया है
चित चोर कहलाते हो चोरी करना काम है तुम्हारा
प्रीत का नाम न लेना , तुमने दिल मेरा दुखाया है ।
..................अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु '
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी
अश्रु के मोती निरंतर चक्षु से गिरते रहे
रेत प्यासी हिरनियों की प्यास से झरते रहे
मिल न पाया आज भी सुख का किनारा
जिंदगी की दौड़ में हम बावरे फिरते रहे
रेत प्यासी हिरनियों की प्यास से झरते रहे
मिल न पाया आज भी सुख का किनारा
जिंदगी की दौड़ में हम बावरे फिरते रहे
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गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-२०
पहला चरण -हमारा मुक्तक -११, ११ जुलाई से १३ जुलाई २०१४ ,१० बजे प्रात: तक|
विषय-आँखें/नयाँ/नेत्र|समारोह अध्यक्ष- माननीय Mahesh Jainjyoti साहब
==================================================
आँखें देखती हैं सुख को,
आँखें देखती हैं दुःख को,
जिनकी आँखें नहीं होती,
नहीं देख सकें हैं सुख को||
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
****************************************************************
तुम्हें पसंद किया मेरे नयना
बन जाओ तुम यार मेरे सजना
देखो मुझे न तुम और सताओ
चाहूँ हर हाल में तेरी बनना
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह-२०
पहला चरण -हमारा मुक्तक -११, ११ जुलाई से १३ जुलाई २०१४ ,१० बजे प्रात: तक|
विषय-आँखें/नयाँ/नेत्र|समारोह अध्यक्ष- माननीय Mahesh Jainjyoti साहब
==================================================
आँखें देखती हैं सुख को,
आँखें देखती हैं दुःख को,
जिनकी आँखें नहीं होती,
नहीं देख सकें हैं सुख को||
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
****************************************************************
तुम्हें पसंद किया मेरे नयना
बन जाओ तुम यार मेरे सजना
देखो मुझे न तुम और सताओ
चाहूँ हर हाल में तेरी बनना
"कल्याणी झा"
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -20
शीर्षक -नयन/आँखे/नेत्र
समारोह अध्यक्ष आदरणीय महेश जैन ज्योति जी के समक्ष प्रस्तुत
*****-*
कुदरत ने ख़ास ही सांचे में फुरसत में तुमको ढाला है
जब से देखा है एक नज़र मुश्किल से दिल सम्भाला है
शहद घुला है बातों में और कस्तूरी है साँसों में
तेरे होठ छलकते पैमाने तेरी आँखों में मधुशाला है
***
कैलाश भारद्वाज
फरीदाबाद
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -20
शीर्षक -नयन/आँखे/नेत्र
समारोह अध्यक्ष आदरणीय महेश जैन ज्योति जी के समक्ष प्रस्तुत
*****-*
कुदरत ने ख़ास ही सांचे में फुरसत में तुमको ढाला है
जब से देखा है एक नज़र मुश्किल से दिल सम्भाला है
शहद घुला है बातों में और कस्तूरी है साँसों में
तेरे होठ छलकते पैमाने तेरी आँखों में मधुशाला है
***
कैलाश भारद्वाज
फरीदाबाद
उद्धव देवली/१२-७-२०१४|
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
शीर्षक--आँख, नयन,चछु आदि।
समारोह अध्यक्ष श्री जैन ज्योति जी की प्रतिष्ठा में प्रस्तुत------
प्रखर वेदना--- पर मनन है नयन में।
असीम प्रेम है--- मेरे प्यारे सजन में।
विरह में जीवन-- बिताये हैं लेकिन।
आनंदित हुआ बस उन्हीं के लगन में।
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -२०
हमारा मुक्तक-११ जुलाई शुक्रवार प़ात: १० बजे से १३ जुलाई प़ात १० बजे तक
शीर्षक(विषय)-आँखें/नयन /नेत्र
समारोह अध्यक्ष -सम्मान्य श्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
असीम प्रेम है--- मेरे प्यारे सजन में।
विरह में जीवन-- बिताये हैं लेकिन।
आनंदित हुआ बस उन्हीं के लगन में।
गोपालराम गहमरी साहित्य समारोह -२०
हमारा मुक्तक-११ जुलाई शुक्रवार प़ात: १० बजे से १३ जुलाई प़ात १० बजे तक
शीर्षक(विषय)-आँखें/नयन /नेत्र
समारोह अध्यक्ष -सम्मान्य श्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
उभरीं हैं स्मृति की अनगिन परछाइयां ।
कोकिल की तान वही हेमिल अमराईंयां ।
बीते क्षण तिरने लगे नेत्रों की सीपी में -
विजन तले सपन छलें बोझिल तनहाईंयां ।
कान्ति शुक्ला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
विषय --आँख /नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीयश्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
============================================
बंद जो जुवां हो तो बोलती हैं आँखे....!
दिल का हर राज खोलती हैं आँखे....!
"संतोष' गम हो या ख़ुशी हर बक्त
एक नए अंदाज़ में बोलती है आँखे....!
कोकिल की तान वही हेमिल अमराईंयां ।
बीते क्षण तिरने लगे नेत्रों की सीपी में -
विजन तले सपन छलें बोझिल तनहाईंयां ।
कान्ति शुक्ला
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
हमारा मुक्तक
विषय --आँख /नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीयश्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
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बंद जो जुवां हो तो बोलती हैं आँखे....!
दिल का हर राज खोलती हैं आँखे....!
"संतोष' गम हो या ख़ुशी हर बक्त
एक नए अंदाज़ में बोलती है आँखे....!
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह~20
हमारा मुक्तक
शीर्षक~आँख ,नयन,चछु,नयन आदि।
समारोह अध्यक्ष श्री जैन ज्योति जी की प्रतिष्ठा मे प्रस्तुत~
***
एक आँख मे दो दो पानी।
एक खुशी,इक करुण कहानी
होती कब पहचान किसी को।
अंतस मे है कौन कहानी।
गोपाल गहमरी साहित्य समारोह-२०
शीर्षक -आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-सम्मान्य Mahesh Jainjyoti जी को समर्पित-
मौन भी मुखर हो जाता है
छंदों की लय में लहराता है
जब हीरे पन्ने सी आँखों में
कोई भाव उतर इठलाता है !
© पारुल
११जुलाई१४
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२०
विषय -आँख /नयन नेत्र
अध्यक्ष =माननीय Mahesh Jainjyoti जी को सादर समर्पित
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आप सब रचनाकारों का हार्दिक आभार''''''''''''''''''''''''''''''''''''''अखंड गहमरी११जुलाई१४
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२०
विषय -आँख /नयन नेत्र
अध्यक्ष =माननीय Mahesh Jainjyoti जी को सादर समर्पित
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साँझ ढले जब आएँगे ..प्रियतम !
श्रृंगार अनुपम शर्माएंगे प्रियतम !
उतावले नयन राह निहारें आकुल ..
हर आहट तुम्हें बताएंगे प्रियतम !!
-------------अलका गुप्ता---------------
शुक्रवार से शनिवार =मुक्तक
विषय -आँख /नयन नेत्र
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२०
अध्यक्ष =माननीय महेश चाँद जैन जी को समर्पित
विधा =मुक्तक
श्रृंगार अनुपम शर्माएंगे प्रियतम !
उतावले नयन राह निहारें आकुल ..
हर आहट तुम्हें बताएंगे प्रियतम !!
-------------अलका गुप्ता---------------
शुक्रवार से शनिवार =मुक्तक
विषय -आँख /नयन नेत्र
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२०
अध्यक्ष =माननीय महेश चाँद जैन जी को समर्पित
विधा =मुक्तक
व्यथा बसी जो मेरे उर में तेरे लिए आनंद हुई
अविरल धार नयन निर्झर की तेरे हित मकरंद हुई
मान कवि यशगान किया इतना ही पर ज्ञान मुझे
व्यथा उमड मसि रूप धरे पन्नों पर आकर छंद हुई
-----प्रियंका
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह 20,
शीर्षक:-आँखें,नयन,नेत्र आदि
समारोह अध्यक्ष:-माननीय महेश जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
हमारा मुक्तक
जब तक आँखें खुली हुई हैं,दुनियाँ शीश झुकाती है ।
जीवन भर हमको साँसों की,सरगम गीत सुनाती है ।
हीरा पन्ना कंचन होती,जब तक आँखें रहें खुलीं,
आँखें बन्द हुईं तो काया,मिट्टी की हो जाती है ।।
सतीश 'मधुप'
घिरोर (मैनपुरी)
अविरल धार नयन निर्झर की तेरे हित मकरंद हुई
मान कवि यशगान किया इतना ही पर ज्ञान मुझे
व्यथा उमड मसि रूप धरे पन्नों पर आकर छंद हुई
-----प्रियंका
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह 20,
शीर्षक:-आँखें,नयन,नेत्र आदि
समारोह अध्यक्ष:-माननीय महेश जैन ज्योति जी को सादर समर्पित
हमारा मुक्तक
जब तक आँखें खुली हुई हैं,दुनियाँ शीश झुकाती है ।
जीवन भर हमको साँसों की,सरगम गीत सुनाती है ।
हीरा पन्ना कंचन होती,जब तक आँखें रहें खुलीं,
आँखें बन्द हुईं तो काया,मिट्टी की हो जाती है ।।
सतीश 'मधुप'
घिरोर (मैनपुरी)
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह--20
पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी
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ज्यों आँखें मलते उठते हो यों ही भीतर से जागो तुम ॥
मैं आईना हूँ अपने सच से मत बचकर के भागो तुम ॥
क़सीदे से कहीं उम्दा लगे ऐसी रफ़ू मारो ,
फटे दामन को कथरी की तरह मत हाय तागो तुम ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
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गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२०
विषय -आँख /नयन नेत्र
अध्यक्ष =माननीय Mahesh Jainjyoti जी को सादर समर्पित
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पहला चरण- हमारा मुक्तक --11 जुलाई शुक्रवार प्रात: 10 बजे से 13 जुुलाई प्रात: 10बजे तक
विषय ''-आँखे/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र जैन ज्योति जी
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ज्यों आँखें मलते उठते हो यों ही भीतर से जागो तुम ॥
मैं आईना हूँ अपने सच से मत बचकर के भागो तुम ॥
क़सीदे से कहीं उम्दा लगे ऐसी रफ़ू मारो ,
फटे दामन को कथरी की तरह मत हाय तागो तुम ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
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गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह =२०
विषय -आँख /नयन नेत्र
अध्यक्ष =माननीय Mahesh Jainjyoti जी को सादर समर्पित
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बड़े गहरे नयन तेरे न जाने क्या क्या कहते हैं
कभी गर चोट खाए दिल तो ये चुपचाप बहते हैं
कभी उठते कभी झुकते हाल कह जाते हैं सारा
किसी की याद में जालिम बड़े गुमसुम से रहते हैं
~रमा वर्मा~
श्री गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह ~20
अध्यक्ष ~ माननीय श्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित~
विषय~ आँखे ,नयन ,नेत्र आदि
कभी गर चोट खाए दिल तो ये चुपचाप बहते हैं
कभी उठते कभी झुकते हाल कह जाते हैं सारा
किसी की याद में जालिम बड़े गुमसुम से रहते हैं
~रमा वर्मा~
श्री गोपल राम गहमरी साहित्य समारोह ~20
अध्यक्ष ~ माननीय श्री महेश चन्द्र जैन ज्योति जी को सादर समर्पित~
विषय~ आँखे ,नयन ,नेत्र आदि
स्नेह नयन प्रीति में बरसे
विन्दु सार जग में रस टपके
रसिक नयन व्याकुल मधुवन में
चंचल नयन चहुं दिश भटके ॥
कुन्दन> जय हिन्द!
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -२ओ
पहला चरण -हमारा मुक्तक-११ जुलाई २०१४ से १३ जुलाई प्रातः तक
विषय :-आँखें/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र ज्योति जी
विन्दु सार जग में रस टपके
रसिक नयन व्याकुल मधुवन में
चंचल नयन चहुं दिश भटके ॥
कुन्दन> जय हिन्द!
गोपाल राम गहमरी साहित्य समारोह -२ओ
पहला चरण -हमारा मुक्तक-११ जुलाई २०१४ से १३ जुलाई प्रातः तक
विषय :-आँखें/नयन/नेत्र
अध्यक्ष-माननीय महेश चन्द्र ज्योति जी
गुरु पूर्णिमा पर सद्गुरु भगवान के श्री चरणों में कोटिशः नमन के साथ
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नहीं पहुंच पा रही आज,बाबा! मैं तेरे द्वारे;
विवशता है क्षमा करो,बरस रहे नयन हमारे।
तुम हो करुणा-सागर,हम अबोध तेरी संतान ;
बचे रहें सब दोषों से,बरसें सदा आशीष तुम्हारे। ।
मीना मिश्रा
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नहीं पहुंच पा रही आज,बाबा! मैं तेरे द्वारे;
विवशता है क्षमा करो,बरस रहे नयन हमारे।
तुम हो करुणा-सागर,हम अबोध तेरी संतान ;
बचे रहें सब दोषों से,बरसें सदा आशीष तुम्हारे। ।
मीना मिश्रा
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